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आखिर घरेलू हिंसा है क्या? चारदीवारी के भीतर होने वाली हर हिंसा घरेलू हिंसा की श्रेणी में आती है. दो लोगों के बीच जब प्यार, सम्मान और सहानुभूति की भावना समाप्त होकर नफरत और क्रूरता में तब्दील हो जाती है तो वो घरेलू हिंसा बन जाती है.
ये शारीरिक, सेक्सुअल और व्यवहारिक तीनों ही तरह की हो सकती है. ऐसे में ये जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि घरेलू हिंसा के क्या-क्या कारण हो सकते हैं. आंकड़ों के आधार पर देखें तो घर में पद, पैसे और दूसरे भौतिक सुखों के चलते ही ज्यादातर मामले घरेलू हिंसा का रूप ले लेते हैं. कई बार बदले की भावना भी इसे जन्म देने का काम करती है.
घरेलू हिंसा एक अपराध है पर बावजूद इसके इससे जुड़े ज्यादातर मामले सामने आ ही नहीं पाते हैं. कई बार घर-परिवार के डर से तो कई बार समाज में इज्जत खोने के डर से लोग इसे जाहिर नहीं होने देते हैं. ऐसे में पीड़ित प्रताड़ित होता रहता है और पीड़ा देने वाला अपनी बर्बरता करता रहता है.
रिलेशनशिप से जुड़े मामलों के विशेषज्ञों की मानें तो बीते कुछ समय में इस तरह के मामलों में काफी तेजी आई है. विशेषज्ञ मानते हैं कि पार्टनर्स के बीच आपसी भरोसे और प्यार के खत्म हो जाने से ही चीजें इस मुकाम पर पहुंच जाती हैं.
घरेलू हिंसा के प्रभाव:
घरेलू हिंसा के प्रभावों का जिक्र करने से पहले ये बात समझ लेना बहुत जरूरी है कि परिवार समाज की इकाई है और अगर परिवार में कलह है तो इसका सीधा असर समाज पर पड़ेगा.ज्यादातर मामलों में महिलाएं ही घरेलू हिंसा की शिकार होती हैं लेकिन ऐसा नहीं है पुरुष वर्ग इससे अछूता है.
1. घरेलू हिंसा का शिकार हुआ शख्स कभी भी अपने डर से बाहर नहीं आ पाता है
अगर किसी शख्स ने अपने जीवन में घरेलू हिंसा झेली है तो उसके लिए इस डर से बाहर आ पाना बेहद मुश्किल होता है. लगातार हिंसा का शिकार होने के बाद उसकी सोच में नकारात्मकता इस कदर हावी हो जाती है कि उसे अपने को स्थिर करने में सालों लग जाते हैं.
2. मानसिक आघात इंसान को भीतर से तोड़कर रख देता है
घरेलू हिंसा का एक सबसे बुरा पहलू ये है कि इसका पीड़ित मानसिक आघात से बाहर नहीं आ पाता है. ऐसे मामलों में अक्सर देखा गया है कि लोग या तो अपना मानसिक संतुलन खो बैठते हैं या फिर अवसाद का शिकार हो जाते हैं.
3. ये एक ऐसा दर्द है जिसकी दवा शायद ही किसी के पास हो
ऐसे मामले जिनमें शारीरिक यातना भी शामिल है, पीड़ित को बेइंतहा दर्द सहना पड़ता है. कई मामलों में शारीरिक असमर्थता की भी स्थिति आ जाती है या फिर कोई अंग ही काम करना बंद कर देता है. इसके साथ ही कुछ चोटें ऐसी होती हैं जो जानलेवा भी साबित हो जाती हैं.
4. मनोरोग की स्थिति में पहुंच जाता है पीड़ित
घरेलू हिंसा का ये सबसे खतरनाक और दुखद पहलू है. जिन लोगों पर हम इतना भरोसा करते हैं और जिनके साथ रहते हैं जब वही अपने इस तरह का दुख देते हैं तो इंसान का रिश्तों पर से भरोसा उठ जाता है और वो खुद को अकेला बना लेता है. वो कहीं न कहीं ये तय कर लेता है कि इस दुनिया में उसका कोई नहीं और उसे अपने सहारे ही रहना होगा. कई बार इस स्थिति में लोग आतमहत्या भी कर लेते हैं.
ऐसे में ये बेहद जरूरी है कि न तो घरेलू हिंसा को बढ़ावा दें और न ही उसके शिकार बनें. किसी भी प्रकार की घरेलू हिंसा, हिंसा ही है और उसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है.