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Smart Forest City: वॉटर गार्डेन, गगनचुंबी इमारतें, ऑटोमेटिक ट्रांसपोर्ट... दुनिया की पहली स्मार्ट फॉरेस्ट सिटी में सबकुछ होगा अल्ट्रामॉडर्न!

World's first Smart Forest City अंडरवॉटर सिटी, फ्लोटिंग सिटी, अंडरग्राउंड सिटी, स्पेस सिटी, सिटी ऑफ गोल्ड के बाद हम आपको बताने जा रहे हैं दुनिया के पहले प्रस्तावित स्मार्ट फॉरेस्ट सिटी के बारे में. जिसे इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है कि यहां रहने वालों को नेचुरल लाइफ और मॉडर्निटी का मजा एक साथ मिले. ट्रांसपोर्टेशन ऐसी कि जैसी हम सिर्फ फिल्मों में ही देख पाते हैं. इसके साथ ही शहर में एनर्जी फ्लो को मॉनिटर करने की आधुनिक सुविधा भी होगी ताकि हेल्थ और ऊर्जा संरक्षण के लिहाज से प्लानिंग तैयार की जा सके. आइए देखते हैं दुनिया का ये पहला स्मार्ट फॉरेस्ट शहर जब बन कर तैयार होगा तो कैसा होगा?

स्मार्ट फॉरेस्ट सिटी स्मार्ट फॉरेस्ट सिटी
संदीप कुमार सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 10 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 2:18 PM IST

बदलती टेक्नोलॉजी के कारण हमारे शहरों की लाइफस्टाइल भी बहुत तेजी से बदल रही है. लोग तेजी से तकनीक को रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करते जा रहे हैं. आज लोग अपनी लाइफस्टाइल में तमाम अत्याधुनिक चीजें चाहते हैं इसीलिए दुनियाभर में कई मॉडर्न शहरों के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है जहां मॉडर्न हाउसिंग, मॉडर्न ट्रांसपोर्टेशन, मॉडर्न फैसिलिटी तो लोग चाहते ही हैं साथ ही प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर जिंदगी का बैलेंस भी लोग चाहते हैं. लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि घने जंगलों के बीच कोई अल्ट्रामॉडर्न शहर भी आकार ले सकता है? जिसकी थीम ही स्मार्ट और फॉरेस्ट सिटी हो.

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हम बात कर रहे हैं दुनिया के पहले स्मार्ट फॉरेस्ट सिटी की. जिसकी प्लानिंग पर तेजी से काम चल रहा है. तैयार हो जाने के बाद घने जंगलों के बीच अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इस शहर में रहने वालों के लिए जिंदगी की वो सारी सुविधाएं मौजूद होंगी जो आज हमें सिर्फ फिल्मों में ही देखने को मिलती हैं.

कहां बन रही है पहली स्मार्ट फॉरेस्ट सिटी?

इस प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है मैक्सिको में. मैक्सिको के कैनकन में बन रहे इस स्मार्ट फॉरेस्ट सिटी प्रोजेक्ट के आइडिया पर काम कर रही है इटैलियन आर्किटेक्चर कंपनी बोएरी. मॉडर्न अर्बन प्लानिंग का ये प्रोजेक्ट 557 हेक्टेयर इलाके में फैला होगा. यहां रहने वालों के लिए आधुनिक जिंदगी होगी, प्राकृतिक खूबसूरती का नजारा होगा और फ्यूचर की चुनौतियों से निपटने की वो सारी तैयारी होगी जिसकी आने वाले कल के इंसान को जरूरत होगी.

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तैयार हो जाने के बाद इस स्मार्ट फॉरेस्ट सिटी में 1 लाख 30 हजार लोग रह सकेंगे. इस शहर को ऐसे डिजाइन किया जा रहा है कि यहां तकनीक और पर्यावरण का फुल बैलेंस रहने वाले लोगों को मिल सके. यहां मॉडर्न हाउसिंग तैयार की जा रही है जो कि एक डिजाइन किए गए खूबसूरत फॉरेस्ट के बीच स्थित होगी. जहां 350 स्पेसीज के पेड़-पौधों के एक लाख 20 हजार से अधिक प्लांट शोभा बढ़ाएंगे, साथ ही ऑक्सीजन जेनरेट करेंगी और पूरा नेचुरल फील देंगे.

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नेचुरल लाइफ की क्या सुविधाएं होंगी?

दुनिया की इस पहली स्मार्ट फॉरेस्ट सिटी में जगह-जगह बड़े-बड़े पार्क, गार्डन रूफ, ग्रीन फेसिंग, तराई, झील से घिरे मकान होंगे जिनमें तमाम अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद होंगी. यह शहर पूरी तरह अपने संसाधनों पर चलेगा और आत्मनिर्भर होगा. यहां एक विशाल शॉपिंग सेंटर होगा. यहां हाइटेक इनोवेशन कैंपस, यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट्स, लेबोरेट्री और कंपनीज होंगी जो ग्लोबल बिजनेस करेंगी. इस कैंपस में रिसर्च और डेवलपमेंट विंग भी होगा जो पर्यावरण संरक्षण और फ्यूचर इनोवेशन के काम करेगा.

पूरी तरह आत्मनिर्भर शहर

यह स्मार्ट फॉरेस्ट सिटी इस तरह से डिजाइन की जा रही है कि यह अपनी ऊर्जा जरूरतों को खुद के प्रोडक्शन से पूरी करेगी. बोएरी ने इस शहर को बसाने के लिए जर्मन इंजीनियरिंग कंपनी के साथ हाथ मिलाया है. पानी की जरूरतों के लिए समंदर से जुड़ा वॉटर चैनल भी बना होगा. सिंचाई के लिए इरिगेशन चैनल, समंदर के पानी को नॉर्मल करने वाले प्लांट, रिहाइशी मकानों तक पानी पहुंचाने के लिए कैनल-वे भी इस शहर को नेचुरल माहौल देंगे.

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यह स्मार्ट फॉरेस्ट सिटी अपने लिए फूड और एनर्जी जरूरत भर खुद उत्पादित करेगा. इसके लिए सोलर पैनल, फार्मलैंड्स आदि डेवलप किए जा रहे हैं. सिंचाई के लिए कैनल-सिस्टम है, कैरीबियन सी से जुड़े हुए वॉटर चैनल्स हैं, शहर के चारों ओर वॉटर गार्डन फैले हैं, जिसका इस्तेमाल न केवल बाढ़ जैसे हालात को संभालने के लिए बल्कि बोटिंग के लिए भी होगा.

 

अल्ट्रामॉडर्न सुविधाओं में क्या होगा?

इस शहर के प्रोजेक्ट को देखा जाए तो यहां एकदम अत्याधुनिक ट्रांसपोर्ट सुविधाएं होंगी. यहां बाहर से आने वालों को अपनी गाड़ियों को सिटी के एंट्री गेट पर ही छोड़ना होगा साथ ही यहां रहने वालों को भी. क्योंकि इस सिटी के अंदर केवल इलेक्ट्रिक और सेमी-ऑटोमेटिक गाड़ियों की ही अनुमति होगी. शहर का अपना फुली-इलेक्ट्रिक और ऑटोमेटिक-सेमी ऑटोमेटिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम होगा. यहां मकान न केवल अमीर लोगों के लिए बल्कि, युवा स्टूडेंट्स, रिसर्चर्स, प्रोफेसर्स आदि प्रोफेशन से जुड़े लोगों के लिए अलग-अलग बजट की और डिजाइन के बनेंगे.

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कैसी लाइफस्टाइल होगी यहां?

आर्किटेक्ट्स का दावा है कि इस शहर का डिजाइन प्राचीन माया सभ्यता के शहरों से प्रभावित होगा. इस शहर में सारी इमारतें मॉडर्न आर्किटेक्चरल डिजाइन से बनी होंगी. साथ ही, यहां रहने वालों के लिए वॉकिंग से लेकर साइक्लिंग तक तमाम सुविधाएं मुहैया होंगी. इस शहर में नेचर और मॉडर्न लाइफस्टाइल के बीच संतुलन बनाने के लिए एक विशाल बोटैनिकल गार्डेन भी होगा. पेड़ों से घिरीं गगनचुंबी इमारतें चारों ओर बनेंगी. इस प्रस्तावित शहर को प्रदूषण से मुक्त रखने के लिए प्लांट और पेड़ इतने लगाए जा रहे हैं कि वे 116,000 टन कार्बन डाइ ऑक्साइड सोंख सकेंगे. यहां रहने वाले लोगों की डेटा सिक्योरिटी के लिए भी खास व्यवस्था की जाएगी.

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एनर्जी सेंसर और मॉडर्न साइंटिफिक रिसर्च

इमारतों के निर्माण के साथ एनर्जी सेंसर भी लगाए जा रहे हैं जो घरों में फ्रिज-वॉशिंग मशीन जैसी मशीनों में ऊर्जा इस्तेमाल के डेटा प्रोवाइड कराएंगे जिससे ऊर्जा संरक्षण के नए उपायों पर एजेंसियां विचार कर पाएंगी और प्लान बना पाएंगी. साथ ही नेचुरल एनर्जी का पूरा इस्तेमाल कर लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए एनवायरमेंट बेहतर बनाने पर काम होगा. सेंसर से जुटाई गई डेटा का मिसयूज न हो इसके प्रति कंपनी खास सिक्योरिटी प्रबंध करेगी.

यहां बन रहे एडवांस रिसर्च सेंटर में 6 अत्याधुनिक सुविधाओं पर काम होगा- जिसमें बायो-हेल्थकेयर, ऑस्ट्रोफीजिक्स, प्लेनेटरी साइंस, कोरल रिफ रोस्टोरेशन, फार्मिंग और रिजेनेरेशन टेक्नोलॉजी, स्मार्ट सिटी, मोबिलिटी और रोबोटिक्स. साथ ही मोलेक्यूलर बायोलॉजी, आईटी, रोबोटिक्ट आदि क्षेत्रों में रिसर्च और डेवलपमेंट के काम को यहां प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्लान है.

इको-फ्रेंडली शहरों की जरूरत क्यों?

आज दुनिया का कोई भी हिस्सा हो हर जगह पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियां बढ़ रही हैं. हर देश अपने शहरों में आधुनिक सुविधाएं विकसित कर जा रहा है. भारत में भी दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों के बाद आज तमाम राज्यों की राजधानियों और टू-टियर शहरों में मेट्रो जैसी आधुनिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पहुंचने लगी है लेकिन भीड़-भाड़ को नियंत्रित करने और ट्रैफिक को सिस्टमेटिक करने के लिए अर्बन प्लानिंग और शहरों की रिडिजाइनिंग पर बहुत काम करना होगा. शहरीकरण बढ़ रहा है तो इससे जुड़ी प्लानिंग की चुनौतियां भी बढ़ रही हैं.

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संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2050 तक दुनिया की 68 फीसदी आबादी शहरी इलाकों में रह रही होगी. एशिया और अफ्रीका के शहरों में तेजी से आबादी पलायन करके बसेगी आने वाले वर्षों में. उसी के मुताबिक हमारे तमाम शहरों को खुद को बदलना होगा. ऐसे में स्मार्ट फॉरेस्ट सिटी का आइडिया हमारे शहरों के लिए एक मॉडल साबित हो सकता है ताकि हमारे लोगों को भी आधुनिक और नेचर के बैलेंस वाली जिंदगी जीने की सहूलियत मिल सके.

 

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