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भारत पाकिस्तान के बीच तनाव के बीच सीमा पर देश की वीरांगनाएं तैनात हैं. हजारों किमी में फैले थार रेगिस्तान में सरहद की हिफाजत के लिए सीमा सुरक्षा बल की महिलाओं की टुकड़ी दिन-रात पसीने बहा रही है.
20-21 साल में कंधे पर राइफल लिए थार रेगिस्तान में देश की सीमा की रक्षा करते हुए इन बहादुर बेटियों को देखकर भला किसका सीना चौड़ा नहीं होगा. बाॅर्डर सिक्योरिटी फोर्स की महिला ब्रिगेड को पहली बार पाकिस्तानी सीमा पर जैसलमेर शहर से करीब दो सौ किमी दूर बेहद संवेदनशील माने जाने वाले शकीरेवाला बाॅर्डर पर तैनात किया गया है. इस यूनिट के लिए पूरे भारतवर्ष से लड़कियों को चुना गया है.
क्या कहती हैं बहादुर बेटियां
सरहद पर तैनात रूपा गुझाली कहती हैं कि पाकिस्तान एक बार हिम्मत तो करके देखे, हम तैयार हैं. उनके ईंट का जवाब पत्थर से देंगे.. इसी तरह संगीता कहती हैं कि हमारे देश के लोग निश्चिंत रहें, हमारे होते दुश्मन उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकते. रात के अंधेरे में कोई घुसपैठिया, कोई तस्कर, कोई आतंकी देश की सीमा में दाखिल ना हो पाए इसके लिए हम पैदल पेट्रोलिंग करती हैं.
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महिला जवाव नीरजा कुंतल कहती हैं कि पाकिस्तान अगर एक गोली चलाएगा तो हम उसका जवाब बर्स्ट से देंगें. जमना राठौड़ कहती हैं कि बचपन से वर्दी देखकर मन करता था फौज में जाने का और अब तो वर्दी पहनकर देश की सुरक्षा में लगे हैं.
हालांकि इन महिला कमांडो को 44 सप्ताह की कठोर ट्रेनिंग दी गई है लेकिन इसके बावजूद दुश्मनों से मुकाबला करने के लिए लगातार इनकी ट्रेनिंग जारी है. किशनगढ़ चांदमारी का बैटल ग्राउंड इनकी बरसती गोलियों से थर्रा उठता है. कंबैट ट्रेनिंग में पूरी तरह से दक्ष होने के बाद ये रेगिस्तानी इलाके में दुश्मन से मुठभेड़ होने पर उन्हें खत्म करने की ट्रेनिंग ले रही हैं.