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सौम्य मालवीय को 'घर एक नामुमकिन जगह है’ कविता संग्रह के लिए भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार

रजा फाउंडेशन की ओर से दिया जाने वाला भारतभूषण पुरस्कार इस वर्ष सौम्य मालवीय को मिला है. उनके कविता संग्रह ‘घर एक नामुमकिन जगह है’ को इस वर्ष के जूरी श्री अष्टभुजा शुक्ल के चयन के आधार पर मिला.

सौम्य मालवीय सौम्य मालवीय
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 03 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 6:45 AM IST

रजा फाउंडेशन की ओर से दिया जाने वाला भारतभूषण पुरस्कार इस वर्ष सौम्य मालवीय को मिला है. उनके कविता संग्रह ‘घर एक नामुमकिन जगह है’ को इस वर्ष के जूरी श्री अष्टभुजा शुक्ल के चयन के आधार पर मिला. इस पुरस्कार में 21,000 रुपये प्रदान की जाएगी. सौम्य मालवीय का यह कविता संग्रह बीते वर्ष प्रकाशित हुआ था.  

चयन मंडल के जूरी अष्टभुजा शुक्ल ने ‘घर एक नामुमकिन जगह है’ को पुरस्कार के लिए चयनित करते हुए लिखा था, 'सौम्य की कविताओं के युवकोचित संवेदन और अभिव्यक्ति रूपों की ऐसी विकलता है, जिसके लिए वे जरूरत भर कविता के शिल्प और उसकी भाषा की वल्गा को तानते या मुक्त करते रहते हैं. इसीलिए वे कविता की कोई नियत पद्धति या ठौर-ठिकाना तय करने से सतत असहमत हैं. बल्कि इस विलोम के बावजूद वे किसी विलोमवादी छवि के कवि नहीं. आज के उन्मादी उच्चाटन अथवा स्तुतिनम्र युवा कविता से अलग संवाद करने को उद्विग्र इस संग्रह की कविताएं संस्कृति के स्कंध पर चढ़ी हिंसकता से हिले कवि की भाषा को कभी तिर्यक तो कभी मुक्तिबोधी चेतना के साथ पाठक से रूबरू होना चाहती हैं. बेआवाज़ बारिश को, दोस्त की शक्ल को, सूरज को चखने और चांद के उतरने को, एक बच्चे की आंख से कविता को पढने के लिए समुत्सुक आज की कविता को अपनी उपस्थिति से उकसाने वाले सौम्य को शुभकामनाएं. इस उम्मीद के साथ के वे आगे चलकर अपनी अभिव्यक्ति के इस बिखराव को और सघन एवं पुंजीभूत करने की कोशिश निरंतर जारी रख सकेंगे.' 

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कवि के साथ समाजशास्त्री हैं सौम्य मालवीय

सौम्य मालवीय (जन्म 25 मई 1987, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश) लम्बे समय से हिंदी में कविताएं लिख रहे हैं और अनुवाद में भी गहरी रुचि रखते हैं. एक कवि होने के अतिरिक्त सौम्य एक समाजशास्त्री भी हैं. दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स के समाजशास्त्र विभाग से उन्होंने गणितीय ज्ञान के समाजशास्त्र पर पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है और इसी विषय पर अंग्रेज़ी में सतत लेखन करते रहे हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय के कई महाविद्यालयों में अध्यापन के बाद, वे क़रीब दो वर्ष अहमदाबाद विश्वविद्यालय से सम्बद्ध रहे और वर्तमान में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के मानविकी एवं समाज विज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के पद पर कार्यरत हैं. गणित में आधुनिकता के विषय पर जारी शोध के अलावा, हिंदी साहित्य के समाजेतिहास पर एक और शोध योजना के तहत वे गजानन माधव मुक्तिबोध के टेक्स्ट 'एक साहित्यिक की डायरी' का अंग्रेज़ी में अनुवाद कर रहे हैं और मुक्तिबोध की ही ऐंथ्रोपोलॉजिकल जीवनी की रूपरेखा पर भी काम कर रहे हैं. पुरस्कृत संग्रह 'घर एक नामुमकिन जगह है' उनका पहला कविता संग्रह है. 

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