
Sahitya Aaj Tak Lucknow 2024: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज से 'साहित्य आजतक-लखनऊ 2024' के दूसरे संस्करण का आगाज हो गया है. यह आयोजन शनिवार 20 और रविवार 21 जनवरी 2024 को अंबेडकर मेमोरियल पार्क, गोमती नगर, लखनऊ में हो रहा है. 'साहित्य आजतक लखनऊ' में 'राम बुलावा भेजिया' सेशन के दौरान मुख्य अतिथि मशहूर लेखक और अद्वैत शिक्षक आचार्य प्रशांत ने अपने विचार व्यक्त किए.
आचार्य प्रशांत आईआईटी दिल्ली और आईएमएम अहमदाबाद से डिग्रीधारी आचार्य हैं. 2022 में उन्हें मोस्ट इंफ्लूएंशन वीगन ऑफ द ईयर के रूप में सम्मानित किया गया है. उन्हें वेदांत की प्रखर मशाल, अंधविश्विवास और आंतरिक दुर्बलता के विरुध मुखर योद्धा, पशु प्रेमी, शुद्ध शाकाहारी के प्रचारक, पर्यावरण संरक्षक और युवाओं के पथ प्रदर्शक मित्र इनमें से किसी भी रूप में किसी भी नाम से पुकारा जा सकता है. उन्होंने वेदांत और गीता के ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने का अद्वितीय कार्य का संकल्प उठाया है. उन्हें आध्यात्मिक, सामाजिक जागरण की शक्तिशाली आवाज माना जाता है.
राम सगुण हैं या निर्गुण हैं, आपके मन में राम की क्या छवि है?
आचार्य प्रशांत से जब यह सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, 'निर्गुण सगुण द्व से न्यारा कहै कबीरा राम हमारा' इस वकत्व्य से अपनी बात की शुरुआत करते हुए आचार्य प्रशांत ने कहा कि राम न सगुण हैं और न निर्गुण हैं, क्योंकि निर्गुण कहेंगे तो उन्हें अपने मन की कोई बात बना लेंगे, अपनी छवियों में कैद कर लेंगे और सगुण कहेंगे तब तो हमने उनकी छवि खड़ी कर ही दी. निर्गुण-सगुण द्व से न्यारा.
राम क्या हैं?
इसका जवाब देते हुए आचार्य प्रशांत ने कहा कि इसके लिए मुक्तिका उपनिषद की ओर जाना होगा. जिसका आरंभ होता है हनुमान जी श्री राम से कहते हैं कि सारा जीवन आपके सेवा में लगा रहा और आपके देह देखी, शरीर देखा, आपकी लीलाएं देखी हैं, अब मुझे अपना वो स्वरूप बताइये जो उच्चतम है सत्य है असली है और मुक्ति दायक है. तब राम कहते हैं कि हे हनुमान अगर मेरी सच्चाई जानना चाहते तो सुनो मैं वेदांत में वास करता हूं, मैं वेदांत में वास करता हूं, जो मुझे सचमुच मुझे जानने के इच्छुक हैं वे वेदांत में आएंगे. नहीं तो मेरे चार तल या प्रकार हैं, ज्यादातर लोग जो नीचे के तीन तल हैं उसी में आरंभ करके रुक जाते हैं. मैं वेदांत में वास करता हूं वही मेरा सच्चा और उच्चतम स्वरूप है. जो सचमुच मुझे पाना चाहते हैं वे वेंदात की ओर आएं.
चार राम कौन हैं?
चार राम हैं जगत में, तीन राम व्यवहार ।
चौथ राम सो सार है, ताका करो विचार ॥
आचार्य प्रशांत ने कहा कि जो तीन राम हैं व्यवहार, उसमें हम नीचे के तीन रामों में ही सीमित रह जाते हैं. संतों ने कहा कि चौथे राम में सार है उनका करो विचार - सार, असलियत, सच्चाई, मुक्ति.
एक राम दसरथ घर डोले, एक राम घट-घट में बोले
एक राम का सकल पसारा, एक राम हैं सबसे न्यारा
दसरथ के घर में जो बाल राम हैं वे पहले राम हैं, दूसरे राम जो प्रत्येक व्यक्ति भीतर जो चेतना बोल रही है, ये जो पूरा विस्तार है वो तीसरे राम हैं, लेकिन जो असली राम हैं वो इन सबसे अलग हैं. राम जी ने हनुमान जी को इन्हीं चौथे राम तक पहुंचने के लिए कहा था, जो वेदांत में बसते हैं.
जो लोग राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर नहीं पहुंच पाए तो क्या करें?
उन्हें दुखी नहीं होना चाहिए, बल्कि और ऊंचाई पर जाने की कोशिश करनी चाहिए. क्योंकि घट-घट राम बसत है भाई ज्ञान बिन नहीं देत दिखाई. तुम आत्म ज्ञान की तरफ चले जाओ क्योंकि राम तु्म्हारे भीतर ही हैं, हर जगह है, ज्ञान की कमी की वजह से दिखाई नहीं दे रहे. धर्म का पूरा क्षेत्र आत्मज्ञान के लिए ही है. जिन्हें तुम ढूंढ रहे हो वो आपके भीतर ही वास करते हैं. मन को मंदिर बनाना ही सबसे जरूरी बात है. मन मंदिर बन गया तो जीवन सार्थक है और मन मंदिर नहीं बन पाया तो जीवन निरर्थक है.