
देश में भारतीय भाषाओं के साहित्य के सबसे बड़े मंच 'साहित्य आज तक 2022' की घोषणा के साथ ही आपके मन में यह कयास शुरू हो गया होगा कि इस साल इसमें कौन कब शिरकत करेगा. हम आपको इसमें शामिल होने के लिए सहमत साहित्यकारों और कलाकारों की जानकारी यहीं देते रहेंगे. आपको इतना तो हम बता ही चुके हैं कि देश की राजधानी दिल्ली के केंद्र में स्थित मेजर ध्यान चऺद नेशनल स्टेडियम में यह मेला इस साल 18 नवंबर से 20 नवंबर तक होने जा रहा है.
कुतले खान साहित्य आज तक 2022 में शामिल होने वाले नए फनकारों की सूची में शामिल हैं. भारतीय संगीत जगत के रसिकों के लिए कुतले खान कोई नया नाम नहीं हैं, यानी वे किसी खास तरह की तारीफ़ के मोहताज नहीं. फिर भी अपने श्रोताओं और साहित्य आज तक के दीवानों को कुतले खान की थोड़ी-बहुत जानकारी देना बनता है.
कुतले खान राजस्थान की समृद्ध और जीवंत भूमि के एक बहु-प्रतिभाशाली लोक संगीतकार हैं. एक संगीतकार, बहु-वादक और गायक के रूप में उनकी बहुमुखी प्रतिभा उनके प्रदर्शन को जोश और उत्साह से भरपूर बनाती है. जैसलमेर में जन्मे कुतले ने ज्यादातर तमिल सिनेमा में काम किया है.
कुतले खान संगीतकारों के मंगनियार परिवार से आते हैं. 8 साल की उम्र से ही उन्होंने ध्वनिकी बजाना शुरू कर दिया. कुतले ने पार्सल, ढोलक, सारंग, खर्ताल, हारमोनियम और भापंग जैसे वाद्ययंत्र बजाने की तालीम ली और खरताल में उन्हें महारथ हासिल है.
कुतले खान ज़्यादातर सूफ़ी और लोक गीत गाते हैं, और इसके अलावा अपनी धुनों की रचना और निर्माण भी वह स्वयं करते हैं. कुतले साल 2000 से मंचों पर परफॉर्म कर रहे हैं, जिसका सिलसिला आज भी जारी है.
भारत में दर्शकों को अपने हुनर से दीवाना बना देने वाले कुतले खान ने भारतीय कार्यक्रमों के अलावा 53 देशों की यात्रा कर वहां अपनी कला की छटा बिखेरी है और वह दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भारतीय शास्त्रीय संगीत का विस्तार कर रहे हैं.
'राजस्थान रूट्स' जो राजस्थान के कुल लोक कलाकारों का एक प्रचलित बैंड है, कुतले उसके मुख्य सदस्य भी हैं. यह बैंड नए प्रचलित गाने और लोक संगीत बनाते हैं. इतना ही नहीं वह एक यूके-तमिल संगीतकार सुशीला रमन के साथ भी संगीत कार्यक्रमों में भ्रमण करते हैं, जिनकी सुरीली आवाज़, दूरदर्शी मधुर परिदृश्य और आकर्षक मंच उपस्थिति ने यूरोप, भारत और उसके बाहर कई दर्शकों को आकर्षित किया है.
2010 में, उन्हें निर्देशक क्लॉस हुंड्सविचलर के वृत्तचित्र फिल्म जिप्सी स्पिरिट में भी देखा जा चुका है. कुतले खान को डबलिन स्थित नाम बालकनी टीवी द्वारा आमंत्रित किया जा चुका है, जो एक प्रमुख ऑनलाइन वायरल संगीत शो है और दुनिया भर में फैले बालकनी समूहों, कलाकारों और अन्य के अभिनय को उजागर करता है.
याद रहे कि हर बार की तरह इस साल भी कला, सिनेमा, संगीत, थिएटर, राजनीति और संस्कृति से जुड़े दिग्गजों से टेलीविजन के बड़े एंकर उनकी किताबों, प्रस्तुतियों, काम, समसामयिक विषयों पर खुले मंच पर चर्चा करेंगे. इस दौरान नाट्य, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी रखी गई हैं.
साहित्य आज तक के पिछले संस्करणों में जिन गायकों ने हिस्सा लिया है उनमें शुभा मुद्गल, वडाली ब्रदर्स, मालिनी अवस्थी, हंस राज हंस, कैलाश खेर, नूरा सिस्टर्स, निज़ामी बंधु, रेखा भारद्वाज, विद्या शाह, मैथिली ठाकुर, उस्ताद राशिद अली, उस्ताद शुजात हुसैन खान, रुहानी सिस्टर्स, स्वानंद किरकिरे, अनूप जलोटा, पंकज उधास, इरशाद कामिल, मनोज मुंतशिर, संदीपनाथ, शैली के अलावा सलमान अली आदि शामिल हैं.
'साहित्य आज तक' के मंच पर अब तक जावेद अख्तर, अनुपम खेर, कुमार विश्वास, प्रसून जोशी, पीयूष मिश्रा, अनुराग कश्यप, चेतन भगत, आशुतोष राणा, कपिल सिब्बल, नजीब जंग, हंस राज हंस, मनोज तिवारी, अनुजा चौहान, रविंदर सिंह, चित्रा मुद्गल, अशोक वाजपेयी, उदय प्रकाश, मालिनी अवस्थी, दारेन शाहिदी, उदय माहुरकर, हरिओम पंवार, अशोक चक्रधर, पॉपुलर मेरठी, गोविंद व्यास, राहत इंदौरी, नवाज देवबंदी, राजेश रेड्डी, स्वानंद किरकिरे, नासिरा शर्मा, मैत्रेयी पुष्पा, शाज़ी ज़मां और देवदत्त पटनायक जैसी हस्तियां शामिल हो चुकी हैं.
गायन, वादन, कहानी पाठ के अलावा यहां मुशायरा और कवि सम्मेलन भी हो रहा है. तो कौन, कहां, कब, किस मंच की शोभा बढ़ाएगा, इसकी जानकारी आपको आने वाले दिनों में इसी जगह मिलती रहेगी, पर असली सूची रजिस्ट्रेशन की लाइन ओपेन होने के बाद ही पता चलेगी.