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'हे प्रभु! बस उस दिन जिंदा रखना...', राम लला के दर्शन को लेकर किस बात से डरे हुए हैं मनोज मुन्तशिर

मनोज मुंतशिर ने कहा कि, सिर्फ कुछ घंटों बाद राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होने वाली है. उस पल को लेकर मन में कई तरह की भावनाएं उमड़ रही हैं. मन इतना भावविभोर है कि डर लग रहा है. उन्होंने कहा कि, डर ऐसा कि कहीं प्राण न निकल जाएं. मैं भगवान से प्रार्थना कर रहा हूं कि हे प्रभु, खुशी में मेरे प्राण न निकल जाएं, मुझे उस दिन जिंदा रखना.   

साहित्य आजतक में शिरकत करने पहुंचे फिल्म लेखक और गीतकार मनोज मुंतशिर साहित्य आजतक में शिरकत करने पहुंचे फिल्म लेखक और गीतकार मनोज मुंतशिर
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 20 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 9:34 PM IST

साहित्य आजतक के मंच पर मशहूर गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर ने श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर अपनी भावनाएं शेयर की. उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा है कि श्रीराम मंदिर बन गया है. मुझे भी प्राण प्रतिष्ठा के दिन के लिए न्योता मिला है, खुद श्रीराम ने मुझे बुलाया है. मेरी आंखें खुशी में भीगी हुई हैं.

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श्रीराम के दर्शन को लेकर कही ये बात
मनोज मुंतशिर ने कहा कि, सिर्फ कुछ घंटों बाद राम प्रतिष्ठा होने वाली है. उस पल को लेकर मन में कई तरह की भावनाएं उमड़ रही हैं. मन इंतना भावविभोर है कि डर लग रहा है. उन्होंने कहा कि, डर ऐसा कि कहीं प्राण न निकल जाएं. मैं भगवान से प्रार्थना कर रहा हूं कि हे प्रभु, खुशी में मेरे प्राण न निकल जाएं, मुझे उस दिन जिंदा रखना.   

मंच पर पहुंचते ही मनोज मुंतशिर ने जय श्रीराम का कई बार उद्घोष किया और लोगों से अपील करते हुए कहा कि, इतनी जोर से उद्घोष कीजिए कि मंगल ग्रह तक आवाज जाए. जब उनसे पूछा गया कि क्या आपने कभी सोचा था कि राम मंदिर बनेगा. उन्होंने कहा, सच कहूं तो मैंने सच में ऐसा कभी नहीं सोचा था. उन्होंने कहा कि मैं बहुत आशावादी हूं, इसी उत्तर प्रदेश की पैदाइश हूं. यहीं अमेठी में पला-बढ़ा, लेकिन मैंने ऐसा कभी नहीं सोचा. लेकिन आज जब ये राम मंदिर बन रहा है तो सच कहूं कि ये किसी स्वप्न जैसा लगता है. डर लगता है कि कहीं कोई इस सपने से मुझे जगा न दे. 

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मैंने ऐसा दौर देखा है कि कोई जय श्रीराम बोलता था, तो लोग उन्हें पिछड़े हुए लोग, बैकवर्ड कहते थे. ये सब सुन-सुनकर तो मैं बड़ा हुआ हूं. लेकिन अब हमें हमारी सांस्कृतिक श्रेष्ठता का पता चलता है. लोग पहले कहते थे कि, 2024 में मंगल पर जीवन खोज लिया गया है और तुम वही पुरानी रामायण की कहानी लेकर बैठ जाते हो. मैं उन्हें क्या कहूं, हम तो ऐसे राम को पूजते हैं, जिन्होंने त्रेतायुग में जीवन में मंगल खोज लिया था. 

मंच पर सुनाई गीत की पंक्तियां
मंच से उन्होंने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी, यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह, शिवसेना का प्रमुख रहे बाला साहब ठाकरे और अशोक सिंहल का नाम लेकर उनके लिए लोगों से जयश्रीराम का जयघोष भी कराया. इस दौरान उन्होंने अपने गीत की दो पंक्तियां भी सुनाई. कहा कि, 'मेरी चौखट पर चलके आज चारों धाम आए हैं, बजाओ ढोल स्वागत में मेरे घर में राम आए हैं.'

'जो 22 जनवरी को नहीं आएगा, वो 2024 में नहीं आएगा'
मनोज मुंतशिर ने मंच से कहा कि, राजनीतिक स्वतंत्रता तबतक अधूरी है, जब तक सांस्कृतिक स्वतंत्रता उसमें शामिल न हो. उन्होंने कहा कि, मैं दावा करता हूं कि, 2027 तक हम 5 ट्रिलियन इकॉनमी बनकर दिखाएंगे. उन्होंने बिना नाम लिए कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि, जो लोग इस प्राण प्रतिष्ठा में शामिल नहीं हो रहे हैं, बड़े उदार मन से भगवान श्रीराम का ध्यान करके उन सबको क्षमा कर देना चाहिए. जो 22 जनवरी को नही आएगा, वो 2024 में नहीं आएगा..

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