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गौरव सावंत ने कहा- 'JNU तक जवानों की वीरता की कहानियां पहुंचनी चाहिए, देश का अपमान दर्द देता है'

दिल्ली में साहित्य का सबसे बड़ा मेला चल रहा है. साहित्य आजतक के तीन दिन के कार्यक्रम में सिनेमा, संगीत, सियासत, संस्कृति और थिएटर से जुड़े जाने-माने चेहरे हिस्सा ले रहे हैं. साहित्य के मंच पर पत्रकार और साहित्यकार गौरव सावंत और शिव अरूर ने शिरकत की. मंच पर उन्होंने युद्ध के अपने अनुभव साझा किए.

साहित्य आजतक के मंच पर पत्रकार गौरव सावंत और शिव अरूर साहित्य आजतक के मंच पर पत्रकार गौरव सावंत और शिव अरूर
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 19 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 3:55 PM IST

शब्द-सुरों के महाकुंभ, साहित्य आज का आज दूसरा दिन है. साहित्य का ये मेला तीन दिन का है, जो 18 से 20 नवंबर तक दिल्ली के मेजर ध्यानचऺद नेशनल स्टेडियम में लगा हुआ है. इस कार्यक्रम में 'शौर्य गाथा' नाम के सेशन में पत्रकार और साहित्यकार गौरव सावंत (Gaurav Sawant) और शिव अरूर (Shiv Aroor) ने शिरकत की.

गौरव सावंत ने Dateline Kargil नाम की पुस्तक लिखी, वहीं शिव अरूर the India's Most Fearless: True Stories of Modern Military Heroes लिखी है. पत्रकार श्वेता सिंह दोनों से सवाल जवाब कर रही थीं. 

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भारत की प्रतिष्ठा की वजह से बची थी जान 

हमारे सैनिकों पर गर्व क्यों होता है इसपर शिव अरूर ने कहा 'लिबिया एक ऐसा देश है जहां लोग नहीं जाते हैं. लेकिन 2011 में मैं और गैरव वहां गए थे. भारत के लिए जो रिस्पेक्ट हमने वहां देखा वो हमें कहीं नहीं दिखा. वहां गौरव को वहां किडनैप कर लिया गया था. दो दिन ये लापता हो गए थे. तब स्मार्टफोन नहीं थे, कोई कनेक्टिविटी नहीं थी. तब उन्होंने कहा कि हमें दो शब्द सिखाए गए थे कि जब भी परेशानी में हो तो ये शब्द याद रखना. वे शब्द थे- सहाफे अल हिंद, जिसका मतलब है इंडियन जर्नलिस्ट. जब गौरव ने ये शब्द बोले, तो वहां की परिस्थिति ही बदल गई थी. लीबिया के लोगों ने ये शब्द सुनकर उन्हें छोड़ दिया और गाड़ी से सुरक्षित मुझ तक पहुंचा दिया. भारत के लोग, भारत की प्रतिष्ठा ऐसी है, जिसकी वजह से गौरव बच पाए.' उन्होंने बताया कि लिबिया में ही जहां युद्ध चल रहा था, वहां वे भी एक बार इसी तरह पकड़े गए थे. 

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'देश के प्रति सैनिकों का सेवा भाव देखिए...'

गौरव ने टाइगर हिल का जिक्र किया जहां युद्ध चल रहा था. उन्होंने कहा- 'कमांड पोस्ट पर वायरलेस से मैं उनकी बातें सुन रहा था. उन्होंने बताया कि वो अपने तोपखाने को बोल रहे हैं कि यहां गोला फेंको. तो उन्हें कहा गया कि यहां तो तुमको चोट लग जाएगी. तो उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं हम मरेंगे या घायल होंगे तो पाकिस्तानी तो मर जाएंगे. देश के प्रति उनका सेवा भाव देखिए. कि जो बचेंगे वो ऊपर जाकर तिरंगा लगाएंगे.' 

'JNU तक वीरता की कहानियां पहुंचनी चाहिए'

गौरव सावंत ने कहा कि वे जेएनयू का सम्मान करते हैं, लेकिन वहां टुकड़े-टुकड़े की बात होती है. उन तक ये वीरता की कहानियां पहुंच जाएं, तो उन्हें पता चलेगा कि कितने लोगों ने अपना लहु बहाया है. सेना और जवानों ने तो त्याग किया, उनके परिवारों ने त्याग किया. वे शहीद हो गए, परिवार अकेले रह गए. और यहां कुछ लोग देश का अपमान करते हैं ये बात बहुत दर्द देती है. 

'शहीदों के लिए नेताओं ने जो वादे किए वो पूरे नहीं किए'

शिव अरूर ने कहा कि ये दुखद सच्चाई है कि जब भी कोई इनकाउंटर होता है या शहादत होती है, तो मीडिया उनके घर जाता है उनका अंतिम संस्कार कवर किया जाता है. लेकिन कुछ दिन बाद सब चले जाते हैं और परिवार ऐसे के ऐसे ही रह जाते हैं. उसके बाद परिवार के लिए सिर्फ एक सपोर्ट है, वो फौज है. उस वक्त नेता भी कई वादे कर देते हैं कि ऐसा कर देंगे-वैसा कर देंगे, लेकिन ऐसे कई परिवार हैं, जो आपको बताएंगे कि उस वक्त नेताओं ने जो वादे किए वो पूरे नहीं किए हैं. ये बहुत दुख की बात है. लेकिन हमने अपनी किताब में ऐसी ही कहानियों को लिखा है, जो लोगों तक पहुंचनी चाहिए. 

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