कवि, गीतकार और लेखक प्रसून जोशी ने साहित्य आजतक के मंच से कहा कि मुझसे जब राष्ट्रवाद या देशप्रेम की बात की जाती है तो आश्चर्य होता कि क्या ये एक बेहद नेचुरल सा स्टेट नहीं है. इस पर विवाद क्यों? चर्चा ही क्यों? मुझे ऐसा लगता है कि देशप्रेम को लेकर क्या लोग कन्फ्यूज हैं. मुझे मेरे गीतों के जरिए देशप्रेम दिखता है. देशप्रेम की अलग-अलग मुद्राएं है. इसे कौन आगे ले जाएगा. जो किसी भी तरीके से देश के लिए काम करता है, वह उसे आगे ले जा रहा है.