
MP News: कूनो नेशनल पार्क से चीतों को अब दूसरे नेशनल पार्कों में भी बसाने पर सरकार विचार कर रही है. मध्यप्रदेश के मंदसौर स्थित गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के वैकल्पिक रहवास के तौर पर तैयार किया जा रहा है. हालांकि, कूनो नेशनल पार्क में अनुमानित क्षमता के मुकाबले अभी चीते कम बचे हैं.
दरअसल, केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव सोमवार को भोपाल में थे. जहां उन्होंने प्रोजेक्ट चीता को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, वन मंत्री विजय शाह और मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अफसरों के साथ बैठक की.
इस बैठक में तय किया गया है कि चीता परियोजना अंतर्गत चीता संरक्षण एवं प्रबंधन से जुड़े अधिकारी और कर्मचारियों को नामीबिया-दक्षिण अफ्रीका अध्ययन प्रवास के लिए चयनित कर भेजा जाएगा. केंद्र सरकार द्वारा चीतों की सुरक्षा, संरक्षण, संवर्धन और प्रस्तावित चीता प्रोटेक्शन फोर्स के लिए केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय संसाधन सहित हर संभव सहयोग दिया जाएगा.
विकल्प के तौर पर गांधी सागर अभयारण्य को किया जा रहा तैयार: भूपेंद्र यादव
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि वर्तमान में कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 7 चीते खुले वन क्षेत्र और 10 चीते बाड़ों में रह रहे हैं. आगामी नवंबर तक चीतों के लिए वैकल्पिक रहवास के तौर पर गांधी सागर अभयारण्य को भी तैयार किया जा रहा है. कूनो में अभी अनुमानित क्षमता के मुकाबले चीते कम हैं. केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि वह खुद 6 जून को कूनो राष्ट्रीय उद्यान जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे.
इस बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 'प्रोजेक्ट की शुरुआत में ही चीता शावकों के जन्म के सर्वाइवल रेट की जानकारी दी गई थी'. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिए कि चीतों के लिए वैकल्पिक रहवास के लिए गांधी सागर अभयारण्य में आवश्यक व्यवस्थाएं युद्ध स्तर पर पूर्ण करवाएं.
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