
मध्य प्रदेश में महाकाल की नगरी उज्जैन में शिवरात्रि का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया गया. इसी क्रम में आज शिवरात्रि के दूसरे दिन परंपरा अनुसार, उनकी भस्म आरती दोपहर में की गई. साल में एक बार महाकाल की भस्म आरती दोपहर में होती है, जबकि बाकी दिनों में सुबह के समय ही भस्म आरती की जाती है.
शनिवार को महाशिवरात्रि के दूसरे दिन तड़के बाबा का श्रृंगार कर उन्हें दूल्हे रूप में सजाया गया. बाबा महाकाल को स्वर्ण के आभूषण, स्वर्ण का चंद्रमा, स्वर्ण का त्रिपुंड, स्वर्णकार तिलक लगाकर दूल्हा बनाया गया. इसके बाद सप्तधान्य अर्पण किया गया.
इसके बाद सवा मन फूलों का सेहरा चढ़ाया गया और सवा लाख बेलपत्र अर्पित की गई. दोपहर को बाबा का सेहरा उतारा गया और भगवान एक बार फिर से निराकार रूप में आ गए. पंचामृत पूजन अर्चन के बाद महानिर्वाणी अखाड़ा ने भोले बाबा की भस्मारती की. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन लाभ लिया.
बताते चलें कि महाकाल मंदिर में रोजाना करीब डेढ़ से दो लाख भक्त दर्शन करने पहुंचते हैं. शनिवार और रविवार को यह संख्या बढ़कर चार से पांच लाख तक पहुंच जाती है. वहीं, खास पर्वों भक्तों की संख्या 7 से 8 लाख तक हो जाती है.
मंदिर के प्रशासक संदीप सोनी ने हाल ही में बताया था कि इस साल (साल 2023 और 2024 के लेखा-जोखा के अनुसार) पिछले 10 महीनों में 130 करोड़ की दान राशि मिली है. यह राशि दान के साथ ही लड्डू प्रसादी और VIP शुल्क दर्शन राशि मिलाकर है. मंदिर को साल 2022 और 2023 में 46 करोड़ रुपये से अधिक दान मिला था. वहीं, साल 2021 और 2022 में 22 करोड़ रुपये से अधिक का दान मिला था.