
मध्यप्रदेश के हरदा जिले पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट के बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह हरदा आए. कहा कि जिम्मेदारों के ऊपर आपराधिक दायित्व तय हों और कार्रवाई होनी चाहिए. सबसे पहले कांग्रेस नेता ने ITI स्थित राहत कैंप में पीड़ितों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं. इसके बाद घटनास्थल पर पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया था, लेकिन कुछ देर बाद चार लोगों को अंदर जाने की अनुमति दी. जिसके बाद दिग्विजय सिंह 4 प्रभावितों को लेकर अंदर पहुंचे और वहां घटना स्थल पर जर्जर हुए मकान का निरीक्षण किया. इसके बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए सिंह ने कहा कि इस हादसे को टाला जा सकता था. लेकिन प्रशासन की लापरवाही के कारण इतना बड़ा हादसा हो गया.
दिग्विजय सिंह ने कहा, फायर सेफ्टी एक्ट जो पूरे प्रदेश में सही तरीके से लागू नहीं हो रहा है. उमाभारती के सिमी से जुड़े बयान पर कहा कि हर मामले में हिंदू मुसलमान करने की उनकी आदत है. मैं इससे सहमत नहीं हूं, जांच होनी चाहिए और जांच चल रही है. कमलनाथ के भाजपा में जाने और राज्यसभा सांसद बनाने के सवाल पर कहा कि कमलनाथ जी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, यह सब बातें गोदी मीडिया चलाता है. झाबुआ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार शुरू करने पर कहा कि उनका चुनाव अभियान बंद नहीं होता. हमेशा चलता रहता है. झूठी बातें करना, झूठे वादें करना उनकी आदत है.
सरकार को दी सलाह
पूर्व मुख्यमंत्री ने मप्र सरकार को सलाह दी है कि वह बिहार और यूपी के अखबार में हेल्पलाइन नंबर की सूचना प्रकाशित करना चाहिए. शिवाकाशी जाकर वहां के जैसे फायर सेफ्टी कानून बनाना चाहिए. आबादी से दूर पटाखा फैक्ट्री होना चाहिए. विस्फोट पदार्थ का उपयोग करने वाली फैक्ट्री आबादी से एक किलोमीटर दूर होना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रशासन की खामियां कहां कहां रहीं? उसकी न्यायिक जांच हो और 6 माह में रिपोर्ट आना चाहिए. कई लोगों के मकान टूटे हैं, जिनके पास पट्टे नहीं उनको पट्टे देना चाहिए. ईडब्ल्यूएस वाली बिल्डिंग में कुछ समय के लिए उनको व्यवस्था बनाकर रुकवाना चाहिए.
अधिकारियों पर सवाल
सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा, कलेक्टर के आदेश को किस दबाव में कमिश्नर ने स्टे किया. जो जिम्मेदार हैं, उनके ऊपर आपराधिक दायित्व तय हों और कार्रवाई होना चाहिए. घायलों को राशि नहीं मिली. एनजीटी के ऑर्डर के अनुसार, घायलों को 5-5 लाख और मृतकों को 15-15 लाख रुपए देना चाहिए. उन्होंने कहा कि जिसका जैसा मकान था, उसको वैसा मकान देना चाहिए.
150-200 मजदूर होने का दावा
दिग्विजय सिंह ने माना कि 200 लोग से ज्यादा नहीं थे. मीडिया से चर्चा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह गनीमत है कि मंगलवार का दिन था और भुगतान हो रहा था, नहीं तो 800-1000 लोग फैक्ट्री में रहते थे. भुगतान के कारण उस दिन वहां 150- 200 लोग ही अंदर थे. उन्होंने कहा कि इसकी फोरेंसिक जांच होना चाहिए. ताकि यदि मलबे में कोई शव दबा हो तो उसके डीएनए के माध्यम से उसकी जांच की जाना चाहिए.