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'डॉक्टर ने नशे में लगाया था इंजेक्शन...', जिला अस्पताल में युवती की मौत पर परिवार का हंगामा

मध्य प्रदेश में राजगढ़ के जिला अस्पताल में एक युवती की मौत से बवाल मच गया. युवती के परिजनों का आरोप था कि जिस समय युवती को लाया गया उस समय डॉक्टर अमर सिंह और नर्स की टीम ने उसका ठीक ढंग से इलाज नहीं किया और गलत इंजेक्शन लगा दिया. 

अस्पताल में परिजनों का हंगामा अस्पताल में परिजनों का हंगामा
पंकज शर्मा
  • राजगढ़,
  • 08 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 2:03 PM IST

मध्य प्रदेश में राजगढ़ का जिला अस्पताल इन दिनों सुर्खियों में है. यहां एक युवती की मौत से बवाल मच गया. युवतीकी इलाज के दौरान मौत हुई और परिजनों ने हंगामा करते हुए धरना दिया. परिजनों का आरोप था कि जिस समय युवती को लाया गया उस समय डॉक्टर अमर सिंह और नर्स की टीम ने उसका ठीक ढंग से इलाज नहीं किया और गलत इंजेक्शन लगा दिया. 

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उन्होंने दावा किया कि 'जब युवती की हालत बिगड़ी तो डॉक्टर अमर सिंह नशे की हालत में था और उसने गलत इंजेक्शन लगा दिया था जिसके बाद युवती की पल्स चली गई. यही वजह रही कि आखिरकार उसने तड़पते हुए अपना दम तोड़ दिया.'

परिजनों ने युवती की मौत के बाद डॉक्टर की मेडिकल जांच करने की मांग की. वहीं जब मेडिकल जांच में देरी हुई तो परिजनों ने हंगामा करना शुरू कर दिया. हंगामा बढ़ता देख जिला अस्पताल की टीम ने पुलिस को इसकी जानकारी दी. पुलिस मौके पर पहुंची और हल्का बल प्रयोग कर के परिजनों का गुस्सा शांत करवाया. वहीं युवती की मौत के बाद परिजनों का रो- रोकर बुरा हाल है.  

युवती के एक परिजन ने कहा- यहां के डॉक्टर और नर्स के कारण मौत हुई है. सही समय पर इलाज नहीं किया. पहले हमसे कहा कि सब ठीक है. बाद में बोलते है कि पल्स नहीं मिल रही है. डॉक्टर मुझसे नशे में बात कर रहा था. हम डॉक्टर का मेडिकल कराना चाहते है.'

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वहीं दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि एक 21 वर्षीय युवती की मौत के बाद उसके परिजनों ने हंगामा कर दिया था. परिजनों का आरोप था कि डॉक्टर नशे की हालत में था. इसी वजह से युवती की जान चली गई है. बवाल के बाद डॉक्टर का मेडिकल परीक्षण करवाया गया है और जब उसकी रिपोर्ट आएगी तब आगे की कार्रवाई की जाएगी.'

आपको बता दें जिस युवती की मौत हुई है, उसका नाम कीर्ति था जो प्राइवेट कंपनी में कैशियर का काम करती थी. कृति के सिर पर अपने परिवार को पालने की जिम्मेदारी थी. पिछले 4 दिनों से उसकी तबीयत खराब थी और वह इलाज के लिए जिला अस्पताल आई थी, लेकिन कीर्ति को नहीं पता था कि जिला अस्पताल में उसकी जिंदगी के बजाय मौत नसीब होगी.

 

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