
भारत में तीर्थ यात्रा पर आए 50 वर्षीय फ्रांसीसी नागरिक स्टीफन एलेक्जेंडर का हाल ही में ओंकारेश्वर में निधन हो गया था. जब जिला प्रशासन ने दूतावास के माध्यम से उनके परिजनों से संपर्क किया, तो उन्होंने इच्छा जताई कि स्टीफन का अंतिम संस्कार हिंदू परंपरा के अनुसार किया जाए. अब मध्य प्रदेश में खंडवा की एक सामाजिक संस्था ने यह कार्य विधि-विधान से संपन्न किया है.
जानकारी के अनुसार, फ्रांस के रहने वाले स्टीफन एलेक्जेंडर धार्मिक यात्रा पर भारत आए थे. उन्होंने पहले प्रयागराज पहुंचकर महाकुंभ में स्नान किया. इसके बाद उज्जैन में महाकाल के दर्शन किए. वहां से वे ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग पहुंचे, जहां उन्हें दिल का दौरा पड़ा. गंभीर हालत में उन्हें खंडवा के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका.
स्टीफन के निधन की सूचना जब दूतावास के माध्यम से उनके परिजनों को दी गई, तो पता चला कि उनके माता-पिता वृद्ध हैं और भारत आने में असमर्थ हैं. उन्होंने बताया कि स्टीफन भारतीय संस्कृति से अत्यधिक प्रभावित थे और संतों जैसा जीवन जीते थे. इसलिए उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किए जाने की इच्छा जाहिर की.
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परिजनों के निर्देश पर जिला प्रशासन ने पूर्व निमाड़ सामाजिक सांस्कृतिक सेवा समिति से संपर्क किया, जो लंबे समय से ज्ञात-अज्ञात शवों का उनके रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करती आ रही है. किशोर कुमार मुक्तिधाम पर जिला प्रशासन के अधिकारियों की उपस्थिति में स्टीफन एलेक्जेंडर का विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया गया.
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि फ्रांस के स्टीफन जी ब्रह्मचारी जीवन जीते थे. वे प्रयागराज, उज्जैन और ओंकारेश्वर की यात्रा पर आए थे, जहां उन्हें हार्ट अटैक हुआ और उनका निधन हो गया. परिजनों की इच्छा के अनुसार, हिंदू रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार किया गया. मंत्रोच्चार और विधिवत अनुष्ठान के साथ संस्कार संपन्न हुआ.
पूर्व निमाड़ सामाजिक सांस्कृतिक सेवा समिति कई वर्षों से ज्ञात-अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार कर रही है. इस संस्था में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग शामिल हैं,. जो हिंदू शवों का अग्नि संस्कार करते हैं और मुस्लिम शवों को कब्रिस्तान में दफनाते हैं. यह पहली बार था, जब समिति ने किसी विदेशी नागरिक का अंतिम संस्कार किया.