
मध्यप्रदेश के नीमच और मंदसौर जिले में स्थित गांधी सागर अभ्यारण्य में चीतों का नया घर तैयार हो गया है. जो कूनो नेशनल पार्क के बाद चीतों का दूसरा महत्वपूर्ण आवास होगा. हाल ही में कान्हा नेशनल पार्क से 18 नर और 10 मादा चीतल लाए गए हैं, जिन्हें गांधी सागर अभयारण्य के बाड़े में छोड़ा गया.
वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि चीतों के शिकार की संख्या बढ़ाने के प्रयासों के तहत 1250 चित्तीदार हिरण (चीतल) गांधीसागर अभयारण्य में छोड़ा जाएगा.
फिलहाल कान्हा नेशनल पार्क से 18 नर और 10 मादा चीतल लाए गए और उन्हें गांधीसागर के बाड़े वाले क्षेत्र में छोड़ा गया. इसके साथ ही अब तक गांधीसागर में 434 चित्तीदार हिरण छोड़े जा चुके हैं, जिनमें 120 नर और 314 मादा हैं.
मध्य प्रदेश में चीतों के दूसरे घर को देखने के लिए केन्या का एक प्रतिनिधिमंडल भी आया था. उसने इसी साल 21 और 22 मई को मंदसौर और नीमच जिलों में फैले गांधीसागर अभयारण्य का दौरा किया था.
बता दें कि साल 1952 में भारत से विलुप्त घोषित किए गए चीतों को महत्वाकांक्षी पुनर्स्थापन योजना के तहत सितंबर 2022 और फरवरी 2023 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से कूनो नेशनल पार्क में लाया गया था. वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क में शावकों सहित 24 चीते हैं.
एमपी सरकार की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में लिखा गया कि इस विशेष परियोजना का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को जाता है, जिन्होंने वन्य-जीव संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. उनकी पहल से चीतों के पुनर्स्थापना योजना को गति मिली है.
इस पहल से पर्यटन पर भी सकरात्मक प्रभाव पड़ेगा. गांधी सागर अभयारण्य और इसके आसपास के क्षेत्रों में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा. जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था का विकास होगा. चीतों और अन्य वन्य-जीवों के प्रति पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र रहेगा.