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कुत्ता बीमार पड़ा तो करवाया बड़े शहर में इलाज, मत्यु होने पर मुंडवा दिए खुद के बाल, तेरहवीं पर हजारों को करवाया भोज

अपने पालतू कुत्ते की मृत्यु के बाद दशाकर्म के साथ ही हिंदू परंपरा अनुसार, आत्मा की शांति के लिए मुंडन करवाकर परम्परा निभाई. बाद में तेहरवीं पर एक हजार से अधिक लोगों को मृत्यु भोज करवाया.

कुत्ता रोमी के मालिक जीवन नागर. कुत्ता रोमी के मालिक जीवन नागर.
पंकज शर्मा
  • राजगढ़,
  • 21 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 1:52 PM IST

पालतू कुत्ते को लगभग सभी लोग घर के सदस्य की भांति ही प्रेम करते हैं और परिवार का ही हिस्सा मानते हैं. मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में भी ऐसा ही एक नजारा देखने को मिला. यहां एक पालतू कुत्ते की तेरहवीं पर एक हजार से अधिक लोगों को भोजन करवाया गया.

जिले के सारंगपुर के पास सुल्तानिया गांव का यह मामला है. यहां जीवन नागर नाम के युवक का जर्मन शेफर्ड कुत्ता तेज सर्दी में अचानक बीमार हो गया. मालिक ने पहले कुत्ते का सांरगपुर में इलाज करवाया. जब आराम नहीं मिला तो अपने पालतू कुत्ते को लेकर वह कार से भोपाल पहुंचा. लेकिन पशु चिकित्सालय में इलाज के दौरान कुत्ते ने दम तोड़ दिया. 

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इसके बाद जीवन नागर ने अपने सुल्तानिया गांव में लाकर कुत्ते को दफनाया और 13वें दिन मृत्यु भोज का आयोजन किया. जिसमें एक हजार से अधिक लोगों ने शिरकत की. इतना ही नहीं, मृत्यु भोज के पहले मौत के दस दिन बाद उज्जैन की शिप्रा नदी के किनारे दशाकर्म करवाते हुए अपना मुंडन भी करवाया. 

राजगढ़ जिले में हुई इस घटना की सभी लोग चर्चा करते हुए पशु प्रेम के बारे में बात कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि सुल्तानिया निवासी जीवन नागर ने साल 2018 में जर्मन शेफर्ड प्रजाति का यह कुत्ता भोपाल से खरीदा था, जो उनके परिवार में एक सदस्य की तरह से रह रहा था. 

उस पालतू कुत्ते के अचानक 10 जनवरी को ठंड के कारण प्लेटलेट्स घट गए और गंभीर बीमार हो गया. उसकी देखभाल के लिए हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन जब स्थानीय स्तर पर बीमार कुत्ते के स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ तो उसे कार से भोपाल ले जाकर वहां  पशु चिकित्सालय में दिखाया, लेकिन कुत्ते की मौत हो गई. 

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मालिक जीवन नागर ने कुत्ते को अपने गांव में सम्मान के साथ दफनाया दिया. मालिक जीवन नागर का कुत्ते के प्रति गहरा लगाव था. इसके चलते उसने धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे दशाकर्म किया.

दशाकर्म के साथ ही हिंदू परंपरा अनुसार, आत्मा की शांति के लिए मुंडन करवाकर परम्परा निभाई. बाद में तेरहवीं पर एक हजार से अधिक लोगों को मृत्यु भोज करवाया. आयोजन में शामिल हुए लोग युवक के इस कदम की सराहना कर रहे हैं और इसे पालतू जानवरों के प्रति प्यार और जिम्मेदारी का अद्भुत उदाहरण बता रहे हैं.  

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