
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में सट्टेबाजी को लेकर मध्य प्रदेश के खंडवा में 8 करोड़ रुपए के कारोबार का मामला सामने आया है. पुलिस को लंबे समय से क्रिकेट के सट्टे के अवैध कारोबार की जानकारी थी. अभी इस मामले में पुलिस ने दो व्यक्तियों को गिरफ़्तार किया है. पूछताछ में आरोपियों के तार कहां से जुड़े हैं? इसका भी पता लगाने में पुलिस जुटी है. इस मामले में एक भाजपा पार्षद के पुत्र की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है.
खंडवा पुलिस ने जूनी इंदौर लाइन क्षेत्र में एक कमरे में पुलिस ने दबिश देकर यह आईपीएल का सट्टा पकड़ा है. पुलिस ने यहां से राजेश जुनेजा और उसके सहयोगी रितेश राजपूत को गिरफ्तार किया. साथ ही 7 मोबाइल, लैपटॉप, हाई स्पीड इंटरनेट ब्रॉडबैंड भी ज़ब्त किया है. राजेश जुनेजा पहले भी क्रिकेट की सट्टेबाज़ी करता रहा है. केस दर्ज है. आरोपी का संपर्क मुंबई और इंदौर सहित महानगरों के बड़े सटोरियों से रहा है.
पुलिस ने जब लैपटॉप खंगाला तो आरंभिक तौर पर ही आठ करोड़ के सट्टेबाज़ी की जानकारी सामने आई है. 22 मार्च से शुरू हुए आईपीएल से लेकर अब तक सट्टे का कारोबार होने के प्रमाण मिले हैं. बुधवार को राजस्थान रॉयल्स और गुजरात टाइटन के मैच में करीब 9 लाख रुपयों का सट्टा एक ही दिन में लगाया जाना पाया गया.
एडिशनल एसपी महेन्द्र तारणेकर ने बताया, हमारी टीम काफी समय से आईपीएल के सट्टे को लेकर जानकारियां जुटा रही थी. कार्रवाई में करीब 8 करोड़ रुपए का हिसाब मिला है. पुलिस टीम इसमें अभी और इन्वेस्टिगेशन कर रही है तो आगे चलकर खुलासा करेंगे. अभी दो लोगों को पकड़ने के बाद यह जानकारी सामने आई है.अभी रुपया बरामद नहीं हुआ है. बैंक ट्रान्सेक्शन की जांच कर रहे हैं.
बता दें कि खंडवा क्रिकेट के सट्टे को लेकर पहले भी सुर्खियों में रहा है. इसमें बड़े कारोबारी भी पकड़े जा चुके हैं, जिन्हें बड़ा राजनैतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है. इस बार भाजपा पार्षद माला खटवानी के बेटे रवि खटवानी का नाम इसमें सामने आया है. पुलिस ने पूछताछ के लिए तो बुलाया लेकिन अभी आरोपी नहीं बनाया है. पुलिस उसके बैंक खातों की भी जांच कर रही है, जिसके आधार पर इसके ट्रांजेक्शन पता लगाए जा सकें. बहरहाल पुलिस ने इसमें गहन पड़ताल की तो इसमें बड़े रैकेट का पर्दाफ़ाश हो सकता है और कुछ बड़े कारोबारी भी बेनक़ाब हो सकते हैं.