
मध्य प्रदेश में साल के अंत में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को हरा बड़ा उलटफेर कर दिया था. बाद में सरकार जरूर बीजेपी ने दोबारा बना ली, लेकिन जमीन से मिला संकेत स्पष्ट था. अब उसी संकेत को समझते हुए बीजेपी ने जमीन पर मध्य प्रदेश चुनाव के लिए अपनी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है. पार्टी ना सिर्फ अपनी रणनीति पर काम कर रही है, बल्कि दूसरी पार्टियों से किन्हें अपने दल में शामिल किया जा सकता है, इस पर भी जोर दिया जा रहा है.
बताया जा रहा है कि इस बार का मध्य प्रदेश चुनाव बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम पर लड़ेगी. अब पीएम तो हर बार की तरह पार्टी के लिए सबसे बड़े स्टार प्रचारक रहेंगे ही, वहीं दूसरी तरफ शिवराज सिंह चौहान की मामा वाली छवि का पूरा इस्तेमाल किया जाएगा. इस लोकप्रियता के दम पर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश रहेगी. वैसे इसके अलावा मध्य प्रदेश में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार भी संभव है. एक बार केंद्रीय नेतृत्व से हरी झंडी मिल जाएगी तो राज्य में कई बड़े परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं. अब चेहरों के दम पर तो पार्टी आगे बढ़ने ही वाली है, टेक्नोलॉजी का भी पूरा इस्तेमाल किया जा रहा है.
बीजेपी ने अब तक 65 हजार बूथ समितियों में से 62 हजार बूथ समितियों का डिजिटल सत्यापन कर दिया है. पूरे देश में मध्य प्रदेश इकलौता राज्य है जहां पर बीजेपी ने ये कर दिखाया है. अब उसी कड़ी में हर बूथ समिति को मतदाता सूची, पिछले दो विधानसभा तथा दो लोक सभा चुनावों के उस बूथ पर परिणामों का विश्लेषण दिया गया. साथ ही, उस बूथ पर राज्य तथा केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों की सूची भी सौंपी गई है ताकि उनसे सीधा संपर्क हो सके. इसके अलावा हर बूथ समिति को उस बूथ पर प्रभावी व्यक्तियों की पहचान करने और उनसे संपर्क करने को कहा गया जो मतदाताओं पर असर डाल सके.
अब बूथ मैनेजमेंट के साथ-साथ जातीय और धार्मिक समीकरण साधने पर भी जोर दिया जा रहा है. हर बार की तरह इस बार भी मध्य प्रदेश में हिंदुत्व का मुद्दा हावी रहेगा. वहां भी महाकाल कॉरिडोर और दर्शन जैसी अन्य धार्मिक योजनाओं को गिनाया जाएगा. वैसे इस बार के टिकट वितरण को लेकर भी बीजेपी हाईकमान ने अपना रुख साफ कर दिया है. परिवारवाद को कोई तवज्जो नहीं दिया जाएगा, किसी के भी रिश्तेदार को टिकट नहीं देने की बात हो रही है. सिर्फ जीतने वाले प्रत्याशी पर ही दांव चलने की तैयारी है.