
कृशकाय शरीर, करीब पांच-साढ़े फुट का कद और उम्र- 33 साल. और आदिवासी तबके लिए संघर्ष करने वाला फक्कड़-सा लड़का. कुछ घंटे पहले तक तो कमलेश्वर डोडियार की पहचान यही थी. लेकिन 3 दिसंबर को मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने पर यह पहचान बदलकर अब 'माननीय विधायक श्री कमलेश्वर डोडियार' होने की ओर अग्रसर है.
कमलेश्वर डोडियार न तो सूबे में सत्तारूढ़ रहने वाली भारतीय जनता पार्टी और न ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस से कोई ताल्लुक रखते हैं. इस नवनिर्वाचित विधायक की पार्टी है- BAP यानी भारत आदिवासी पार्टी.
राजस्थान में जन्मी नई नवेली भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के उम्मीदवार कमलेश्वर डोडियार ने मध्य प्रदेश के रतलाम जिले की सैलाना सीट से कांग्रेस के विधायक हर्ष विजय गेहलोत को 4 हजार 618 वोटों से हराकर अपनी पार्टी की झोली में जीत डाल दी. जबकि BAP ने मप्र में आठ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे.
कमलेश्वर डोडियार की चर्चा इसलिए भी है, क्योंकि उन्होंने करीब 12 लाख का कर्ज लेकर चुनाव लड़ा था. अब जब विधायक बन गए तो वह बाइक पर बैठकर सैलाना (रतलाम) से चलकर राजधानी भोपाल पहुंच गए. ठंड के मौसम में करीब 350 किमी की दूरी को कमलेश्वर डोडियार ने दो पहिया वाहन से 8-9 घंटे में तय किया. भोपाल में BAP के जीते प्रत्याशी को विधानसभा सचिवालय में कागजात जमा करने के लिए बुलाया गया है. देखें एक VIdeo:-
aajtak.in को बातचीत में कमलेश्वर डोडियार इसकी वजह बताते हैं, कार्यकर्ताओं ने मेरी चुनाव में भरसक मदद की. दो पहिया, तीन पहिया और चार पहिया वाहनों तक को झोंका. लेकिन अब चुनाव प्रचार के बाद सब थक चुके हैं. मैं नहीं चाहता था कि उनकी कारों का इस्तेमाल करूं. साथ ही विधानसभा सचिवालय की ओर से भी कागजात जमा करने के लिए बुलाया भेजा जा रहा था. बुधवार को घर से निकलने से पहले मैंने एक गाड़ी का इंतजार भी किया, लेकिन समय का पाबंद होने कारण मैं अपनी पत्नी के भाई की बाइक पर बैठकर ही भोपाल के लिए चला आया. देखें एक VIdeo:-
आपने और न ही बाइक चलाने वाले ने सिर पर हेलमेट क्यों नहीं लगाया था? इस पर कमलेश्वर बोले- देखिए, अभी अभी काफी खर्चा हुआ है. अच्छा हेलमेट खरीदने के लिए सच में हमारे पास इतने रुपए नहीं थे. अब जल्द ही नया हेलमेट खरीद लेंगे.
राजनीति में आने का कैसे सोचा?
कमलेश्वर कहते हैं, मैं साल 2008-09 में अमेरिकी राष्ट्रपति बने बराक ओबामा की खबरें पढ़कर अचंभित हुआ कि कैसे एक संघर्षशील आदमी अमेरिका जैसे देश का राष्ट्रपति बन सकता है. वह भी तब, जब ओबामा का परिवार केन्या से छोड़कर अमेरिका में बसा हो. बस ओबामा से ही मुझे प्रेरणा मिली. क्योंकि राघकुआं गांव से पहले कमलेश्वर के पिता रतलाम जिले के ही 25 किमी दूसरे गांव में रहते थे. लेकिन मुफलिसी के चलते परिवार को अपनी जगह छोड़ी पड़ी. परिवार आज भी झोपड़ी में ही रहता है. पिता के दोनों हाथ खराब हैं. जबकि मां दिहाड़ी मजदूर हैं.
उज्जैन से ग्रेजुएशन करने के दौरान कमलेश्वर डौडियार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संपर्क में आ गए थे. उनके दावे के मुताबिक वह आरएसएस के प्रथम वर्ष शिक्षित स्वयंसेवक हो गए थे. संघ के प्रचारकों की मदद की कामना लेकर वह दिल्ली में आगे की पढ़ाई करने पहुंचे. लेकिन उनको वहां RSS की तरफ से कोई मदद नहीं मिल पाई. इसके बाद कमलेश्वर अन्य संगठनों के संपर्क में आए और धरना-प्रदर्शन में शामिल होने लगे.
2017 में एमपी वापसी और जयस का साथ
दिल्ली से लौटकर साल 2017 में जय युवा आदिवासी शक्ति संगठन यानी जयस से कमलेश्वर जुड़े. संगठन के आंदोलनों और प्रदर्शनों में जमकर भाग लिया. और फिर जयस समर्थिr निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर साल 2018 का एमपी में विधानसभा चुनाव लड़ा. पहले चुनाव में उनका टारगेट सिर्फ 10 हजार वोट हासिल करना था. हालांकि, निर्दलीय आदिवासी युवा को 18 हजार 800 वोट मिले. इससे हिम्मत बढ़ी और फिर राजस्थान में गठित हुई भारत ट्राइबल पार्टी (BTP) के टिकट पर रतलाम सीट से 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उतरे.
BTP की जगह BAP को चुना
इसी साल विधानसभा चुनावों से पहले भारत ट्राइबल पार्टी का विभाजन हो गया और एक नए दल भारत आदिवासी पार्टी (BAP) का उदय हुआ. कमलेश्वर ने BAP का साथ लिया और 2023 के विधानसभा चुनाव में कूदकर रतलाम की सैलाना सीट से फतह हासिल कर ली. कमलेश्वर को 71 हजार 219 लोगों के वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंदी कांग्रेस प्रत्याशी हर्ष विजय गेहलोत को 66 हजार 601 मत ही हासिल हुए. इस सीट से बीजेपी की संगीता विजय चारेल 41 हजार 584 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहीं.
दुष्कर्म, रासुका और जिलाबदर जैसे मामलों से घिरे
BAP के इकलौते विधायक कमलेश्वर डोडियार का एक स्याह पक्ष भी है. 33 साल के इस नेता के खिलाफ दुष्कर्म का केस तक दर्ज हो चुका है. इसको लेकर अपनी सफाई में कमलेश्वर का कहना था, पिछले साल 2022 में उस लड़की ने उनके खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज कराया, जिससे उनकी सगाई होनी थी. लेकिन विरोधियों के कहने पर यह सब हुआ. साथ ही लड़की के भाई ने भी धमकी देने की शिकायत थाने में की थी. कोर्ट ने कमलेश्वर को जेल भेजा था. हालांकि, चुनावी नामांकन जमा करने से चंद दिन पहले उनको जमानत मिल गई थी.
यही नहीं, कमलेश्वर के खिलाफ मालावा-निमाड़ के अलग अलग थानों में एक दर्ज से अधिक केस दर्ज हैं. अधिकतर मामले धरना प्रदर्शन और चक्काजाम के दौरान कानून तोड़ने को लेकर हैं. इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और जिलाबदर जैसे एक्शन भी शामिल हैं.
'नोतरा' को लेकर भी विवाद
आरोप लगाया गया कि BAP कैंडिडेट ने चुनाव लड़ने के लिए करीब 12 लाख रुपए का कर्ज ले लिया था. अब उसे चुकाने के लिए वह 'नोतरा' पर उतर आए हैं. इस पर कमलेश्वर ने कहा, चुनाव प्रचार में काफी खर्चा हुआ. इस कर्ज को उतारने के लिए 'नोतरा' आयोजित किया गया. 'नोतरा' का मतलब ही है कि न्योता देकर बुलाना. किसी को जबरन नहीं बुलाया गया. समाज के लोग स्वेच्छा से मदद करने आगे आए. मदद के चलते अब उनके ऊपर 5 लाख का ही कर्ज बकाया है. बता दें कि 'नोतरा' समाजिक प्रथा के तहत भील समुदाय अपने किसी जरूरतमंद की मदद करता है.
BJP सरकार में शामिल होना चाहते हैं BAP MLA
मध्य प्रदेश में तीसरे दल के इकलौते विधायक बनकर कमलेश्वर डोडियार अब बीजेपी सरकार में शामिल होना चाहते हैं. डोडियार का कहना है कि जिस प्रकार मोदी जी और शिवराज ती गरीबी से उठकर लोगों की मदद करते हुए ऊपर उठे, ठीक उसी तरह उनका लक्ष्य भी है. नवगठित भारत आदिवासी पार्टी भी यही चाहती है कि विचारधारा से इतर सत्तारूढ़ दल से मिलकर ही आगे बढ़ा जाए. BAP को मध्यप्रदेश में 1 जबकि राजस्थान में 3 सीटें मिली हैं.