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महाकौशल पर कांग्रेस का फोकस क्यों? 2018 के नतीजे और आदिवासी ही बनाते-बिगाड़ते सत्ता का गेम

मध्य प्रदेश में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. अभी तारीखों का ऐलान होना बाकी है. उससे पहले कांग्रेस ने चुनाव अभियान का शुरुआत कर दी है. महाकौशल इलाका हमेशा से ही बीजेपी-कांग्रेस के लिए खास रहा है. इस इलाके में 38 सीटें आती हैं. 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने 24 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को 13 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था. दोनों ही दल महाकौशल के जरिए विंध्य और बुंदेलखंड को भी साधने की कोशिश में हैं.

मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने जबलपुर से प्रचार अभियान की शुरुआत कर दी. मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने जबलपुर से प्रचार अभियान की शुरुआत कर दी.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 12 जून 2023,
  • अपडेटेड 2:57 PM IST

मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव प्रचार का आगाज कर दिया है. पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने सोमवार को जबलपुर में नर्मदा नदी के तट पर पूजा-अर्चना के बाद विजय संकल्प अभियान की शुरुआत की. कांग्रेस ने 2018 की तरह इस बार भी चुनावी अभियान के श्रीगणेश के लिए महाकौशल इलाके को ही चुना. इस क्षेत्र में आदिवासी मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है. पिछले चुनाव में आदिवासी समुदाय ने कांग्रेस पर भरोसा जताया था और सरकार बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी. तब चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत करने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी जबलपुर आए थे.

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दरअसल, मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी वोट बैंक की खासी अहमियत मानी जाती है. यहां आदिवासी वोट बैंक को सत्ता की चाबी माना जाता है. यानी जिस पार्टी को आदिवासी समुदाय का समर्थन मिलता है, उसे सत्ता मिलना भी तय माना जाता है. इसकी वजह भी है. चूंकि, राज्य की 47 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं. 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने जबलपुर संभाग के आठ जिलों में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 13 सीटों में से 11 पर जीत हासिल की थी. जबकि शेष दो सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी.

क्या है महाकौशल का गणित?

महाकौशल में विधानसभा की 38 सीटें हैं. 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 24 सीटें पर जीत मिली थी. बीजेपी को सिर्फ 13 सीटों पर जीत मिली थी. एक सीट पर कांग्रेसी विचारधारा से जुड़े निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती थी. महाकौशल में 13 जनजाति आरक्षित सीट हैं, जिसमें से 11 सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. दो सीटों पर बीजेपी जीती थी. यही वजह है कि कांग्रेस 2018 के परिणामों को महाकौशल में फिर दोहराना चाहती है.

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महाकौशल में 2013 में बीजेपी ने 24 सीटें जीतीं

2013 के चुनाव में बीजेपी ने महाकौशल में शानदार प्रदर्शन किया था. 38 में से बीजेपी ने 24 और कांग्रेस ने 13 सीटें जीती थीं. एक सीट पर निर्दलीय को जीत मिली थी. महाकौशल की 38 सीटों में 13 सीटें आदिवासियों और 3 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. 2018 में कांग्रेस ने छिंदवाड़ा की सभी 7 सीटें जीत ली थीं. जबलपुर में 8 में 4 पर कांग्रेस जीती थी.

महाकौशल में प्रियंका की रैली क्यों?

कांग्रेस के लिए जबलपुर से चुनावी आगाज लकी रहा है. 2018 में भी राहुल गांधी ने मां नर्मदा की पूजा कर प्रचार अभियान शुरू किया था. कांग्रेस और बीजेपी के टारगेट पर आदिवासी बहुल सीटें हैं. इन पार्टियों की कोशिश है कि जीत का आंकड़ा बढ़ाया जाए. यही वजह है कि कमलनाथ लगातार महाकौशल पर फोकस किए हैं तो बीजेपी भी यहां आदिवासियों को साधने के लिए रैली और अन्य कार्यक्रम आयोजित कर रही है. हालांकि, प्रियंका की रैली को लेकर राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा कहते हैं कि चूंकि मालवा और मध्य भारत के इलाकों में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा निकल चुकी है. इस वजह से प्रियंका की रैली के लिए महाकौशल के एपीसेंटर जबलपुर को चुना गया है. 

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विंध्य और बुंदेलखंड भी साधने का प्लान

इसके अलावा, बीजेपी सरकार की उपेक्षा के कारण एंटी इन्कम्बेंसी है. दूसरा, महाकौशल में आदिवासी वोटर्स की संख्या ज्यादा है. ये कांग्रेस का वोर वोटर कहलाता है. यह इलाका विंध्य और बुंदेलखंड से भी सटा है. ऐसे में प्रियंका की रैली से महाकौशल के साथ विंध्य और बुंदेलखंड को भी साधा जा सकता है. विंध्य क्षेत्र में 7 जिले आते हैं. यहां 2018 में बीजेपी ने 30 में से 24 सीट पर जीत दर्ज की थी. यहां पर भाजपा लगातार फोकस कर रही है.

'रानी दुर्गावती को माल्यार्पण, नर्मदा तट पर पूजा'

प्रियंका की जबलपुर रैली में सॉफ्ट हिंदुत्व भी देखने को मिला. कर्नाटक और हिमाचल की तरह उन्होंने पूजा-अर्चना को भी प्रचार अभियान में शामिल किया. यहां ग्वारीघाट पर नर्मदा पूजन-आरती, गोंड रानी दुर्गावती की प्रतिमा का माल्यार्पण और बाद में जनसभा को संबोधित किया. प्रियंका रैली स्थल से आठ किलोमीटर दूर रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने पहुंचीं थी. रानी दुर्गावती ने मुगलों से लड़ते हुए शहादत प्राप्त की थी. बता दें कि गोंड साम्राज्य की वीरांगना रानी दुर्गावती से महाकौशल इलाके की कई यादें जुड़ी हैं. जबलपुर में रानी दुर्गावती का समाधि स्थल है और आजादी की लड़ाई के वक्त की कई यादें जुड़ी हैं. शहर में मदनमहल स्टेशन भी है, जिसका नाम मदनमहल किले की वजह से रखा गया था, जिसे गोंड शासक राजा मदन शाह ने बनवाया था. 

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सत्ता की चाबी पांच इलाकों में बंटी

मध्य प्रदेश में सत्ता की चाबी पांच इलाकों में बंटी है. महाकौशल यानी जबलपुर संभाग, ग्वालियर-चंबल, मध्य भारत, निमाड़-मालवा, विंध्य और बुंदेलखंड. इन इलाकों में जातीय और सामाजिक समीकरण भी अलग-अलग हैं. महाकौशल के आठ में से पांच जिले आदिवासी बहुल हैं. 2018 के चुनाव में बीजेपी को महाकौशल इलाके से बड़ा नुकसान झेलना पड़ा था. 

महाकौशल में किसकी-कितनी सीटें

- जबलपुर में 8 सीट हैं. पाटन, बरगी, जबलपुर पूर्व, जबलपुर उत्तर, जबलपुर कैंट, जबलपुर पश्चिम, पनागर, सीहोरा. यहां चार सीट पर कांग्रेस और चार पर बीजेपी का कब्जा है.
- छिंदवाड़ा में 7 सीट हैं. जुनारदेव, अमरवाड़ा, चौरई, सौंसर, छिंदवाड़ा, परासिया, पांढुर्णा. कांग्रेस ने सभी सीटें जीती थीं. 
- डिंडौरी में 2 सीट हैं. डिंडौरी, शाहपुरा. दोनों सीटें कांग्रेस ने जीती. 
- बालाघाट में 6 सीट हैं. बैहर, बालाघाट, परसवाड़ा, लांजी, बारासिवनी, कटंगी. पांच सीटें कांग्रेस और बारासिवनी में निर्दलीय प्रदीप जायसवाल जीते. 
- कटनी में 4 सीट हैं. बड़वारा, विजयराघवगढ़, मुड़वारा, बहोरीबंद. यहां पर तीन सीटें बीजेपी और एक पर कांग्रेस का कब्जा है.
- नरसिंहपुर में 4 सीट हैं. गोटेगांव, नरसिंहपुर, तेंदूखेड़ा, गाडरवाड़ा. तीन कांग्रेस और एक पर बीजेपी का कब्जा है. 
- सिवनी में 4 सीट हैं. बरघाट, सिवनी, केवलारी, लखनादौन. बीजेपी और कांग्रेस ने दो-दो सीटों पर जीत दर्ज की. 
- मंडला में 3 सीट हैं. बिछिया, निवास, मंडला. दो सीट कांग्रेस और एक भाजपा के पास है.

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2018 में किसे कितनी सीटें मिलीं?

मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं. बहुमत के लिए 116 का आंकड़ा जरूरी है. 2018 के चुनावी नतीजे में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा सीटें जीती थीं. कांग्रेस ने 114  सीटों पर जीत हासिल की. जबकि बीजेपी को 109 सीटों पर जीत हासिल हुई. 4 निर्दलीय जीते थे. एक सपा और दो बसपा के विधायक बने थे.

विधानसभा में बीजेपी-कांग्रेस की स्थिति?
कुल विधायक 230
बीजेपी- 127 (एसटी समुदाय से 17)
कांग्रेस- 96 (एसटी समुदाय से 29)

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महाकौशल में कांग्रेस ने जीती थीं 24 सीटें

महाकौशल में 2018 के चुनाव में बीजेपी को 13 और कांग्रेस को 24 सीटें मिली थीं. एक पर अन्य का कब्जा है. इस जोन में 8 जिले आते हैं. इनमें जबलपुर, कटनी, डिंडौरी, मंडला, नरसिंहपुर, बालाघाट, सिवनी और छिंदवाड़ा का नाम शामिल है.

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महाकौशल में कौन-कौन सीटें...

पाटन, बरगी, जबलपुर ईस्ट, जबलपुर नॉर्थ, जबलपुर कैंट, जबलपुर वेस्ट, पनागर, सिहोरा, शाहपुर, डिंडोरी, बिछिया, निवास, मंडला, केवलारी, लखनादौन, गोटेगांव, बैहर, लांजी, परसवाड़ा, बालाघाट, वारासिवनी, कटंगी, बरघाट, सिवनी, जुन्नारदेव, अमरवाड़ा, चौरई, सौंसर, छिंदवाड़ा, परासिया, पांढुर्ना सीट शामिल है.

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