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भारत का मौसम रास नहीं आ रहा या कुछ और वजह? कूनो में नामीबिया से लाए गए 10 चीतों की हो चुकी मौत, अब 17 बचे 

नामीबिया और साउथ अफ्रीका से कूनो नेशनल पार्क में लाए गए चीतों में से अबतक 10 की मौत हो चुकी है. इन चीतों को भारत का मौसम रास नहीं आ रहा या फिर कोई और वजह है, जिनकी वजह से इनकी जान जा रही है, ये साफ नहीं हो पा रहा है.

नामीबिया से लाए गए 10 चीतों की हो चुकी है मौत (फाइल फोटो) नामीबिया से लाए गए 10 चीतों की हो चुकी है मौत (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 17 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 12:56 PM IST

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए गए एक और चीते 'शौर्य' की मौत हो गई. अफ्रीकी देश से जो चीते लाए गए थे, उनमें अब सिर्फ 17 जीवित बचे हैं और 10 चीतों की मौत हो चुकी है. हालांकि इन चीतों का भारत का मौसम रास नहीं आ रहा है या फिर कोई दूसरी वजह है, ये अबतक क्लीयर नहीं हो पाया है.  

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एमपी के वनमंत्री नागर सिंह चौहान ने बताया था कि केएनपी में मंगलवार को नामीबियाई चीता 'शौर्य' की मौत हो गई, सितंबर 2022 के बाद से ये 10वीं मौत है. 'शौर्य' की मौत किन वजहों से हुई, इसको लेकर वन विभाग ने बताया कि इसकी वजह स्पष्ट नहीं है और ये पोस्टमॉर्टम के बाद ही पता चलेगा. 

वन विभाग के बयान के मुताबिक, ट्रैकिंग टीम ने सुबह करीब 11 बजे नर चीता को ठीक से चलते नहीं पाया, जिसके बाद उसे ट्रांसक्युलाइज्ड किया गया और उसको ठीक करने के प्रयास किए गए, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली. 'शौर्य' ने सीपीआर के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया और दोपहर 3.17 बजे उसकी मौत हो गई.  

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मार्च, 2023 से अबतक 7 वयस्क चीतों की मौत

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मार्च 2023 से, कूनो में अलग-अलग वजहों से 'शौर्य' समेत 7 वयस्क चीतों और तीन शावकों की मौत हो गई है, जिससे मरने वालों की संख्या 10 हो गई है. अब तक मरने वाले वयस्क चीतों में तीन मादा और चार नर शामिल हैं. इनमें 27 मार्च को साशा, 23 अप्रैल को उदय, 9 मई को दक्ष, 11 जुलाई को तेजस, 14 जुलाई को सूरज, 2 अगस्त को धात्री और 16 जनवरी को शौर्य की मौत हो गई. 

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अबतक तीन शावकों की हो चुकी मौत

इनके अलावा नामीबिया से लाई गई मादा चीता 'ज्वाला' ने चार शावकों को जन्म दिया था. जिनमें 23 मई को एक और 25 मई को दो शावकों की मौत हो गई. नामीबिया से लाए गए चीतों में से अबतक 10 की मौत हो चुकी है और कूनो नेशनल पार्क में जीवित बचे चीतों की संख्या अब सिर्फ 17 बची रह गई है, जिनमें छह नर, सात मादा और चार शावक शामिल हैं. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया के जरिए बताया था कि नामीबियाई चीता 'आशा' ने तीन शावकों को जन्म दिया है.  

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प्रोजेक्ट चीता के तहत नामीबिया से लाए गए थे

बता दें कि चीता को साल 1952 में देश से विलुप्त प्रजाति घोषित कर दिया गया था. भारत में उनकी आबादी को पुनर्जीवित करने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के हिस्से के रूप में चीतों को साउथ अफ्रीका और नामीबिया से कूनो नेशनल पार्क में ट्रांसफर किया गया था. 

कब लाए गए थे चीते ? 

चीता प्रोजेक्ट के तहत 17 सितंबर, 2022 को नामीबिया से आठ चीते लाए गए थे. इनमें पांच मादा और तीन नर चाते शामिल थे. इसके बाद फरवरी, 2023 में 12 चीतों को साउथ अफ्रीका से लाया गया था. बीते साल दिसंबर में चार चीतों को जंगल में छोड़ दिया गया था, लेकिन उनमें से दो को बाद में पकड़ लिया था.  

चीतों की मौत को लेकर बीते साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई थी. शीर्ष अदालत ने सरकार से इस पर हलफनामा दायर करने को कहा था, जिसमें मौत की वजह और उसके बचाव में क्या कदम उठाए गए, इसकी जानकारी देनी थी. 

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