
कुछ भी बचा न कहने को हर बात हो गई
आओ कहीं शराब पियें, रात हो गई...
ये शेर मशहूर शायर निदा फाजली का है. इसमें इन्होंने लिखा है 'आओ कहीं शराब पियें...' लेकिन मध्य प्रदेश में अब शराब पीने के लिए आपको अपनी ही जगह तलाशनी होगी. यहां अब 'बैठकर पीने की उत्तम व्यवस्था' नहीं मिलेगी. शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने नई एक्साइज पॉलिसी को मंजूरी दे दी है. इसके बाद अब शराब की दुकानों पर बैठकर पीने की अनुमति नहीं होगी.
राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने रविवार को कैबिनेट मीटिंग में लिए गए फैसलों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने नई एक्साइज पॉलिसी को मंजूरी दी है, ताकि लोग कम से कम शराब पियें.
शिवराज सरकार ने ये फैसला ऐसे समय लिया है, जब इस साल के आखिर में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. बीजेपी नेता और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती लगातार एमपी में शराबबंदी की मांग भी उठाती रहीं हैं.
पर इस नई एक्साइज पॉलिसी से क्या बदलेगा? पीने वालों से लेकर बेचने वालों तक के लिए क्या-क्या चीजें बदल जाएंगी? जानिए...
1. नई एक्साइज पॉलिसी क्यों?
- मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि नई एक्साइज पॉलिसी को इसलिए मंजूरी दी गई है, ताकि लोग कम से कम शराब पियें.
- उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शराब पीने वालों को हतोत्साहित करते रहे हैं, इसलिए 2010 से नई दुकान नहीं खुली है. इसके उलट कई दुकानें बंद हो चुकीं हैं.
2. शराब पीने वालों के लिए क्या बदलेगा?
- शराब पीने वालों को अब दुकानों पर 'बैठकर पीने की उत्तम व्यवस्था' नहीं मिलेगी. पीने वाले दुकान से शराब तो खरीद सकते हैं, लेकिन वहां बैठकर पी नहीं सकते.
- सरकार ने सभी अहातों और शॉप बार को बंद करने का फैसला लिया है. अब तक शराब की दुकानों के बगल में अहाते बने होते थे, जहां लोग बैठकर पी सकते थे.
- नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि सभी अहाते और शॉप बार अब राज्य में बंद होंगे. दुकानों से शराब खरीदी जा सकती है, लेकिन वहां बैठकर पीने की अनुमति नहीं होगी.
3. शराब बेचने वालों के लिए क्या बदलेगा?
- नई एक्साइज पॉलिसी में शराब बेचने वालों को लेकर भी सख्ती की गई है. शराब की दुकानें धार्मिक, गर्ल्स हॉस्टल और स्कूल-कॉलेज जैसे शैक्षणिक संस्थानों के 100 मीटर के दायरे से बाहर ही होंगी. अब तक ये सीमा 50 मीटर थी.
4. और क्या बदलेगा?
- सरकार की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि नई एक्साइज पॉलिसी में शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के लाइसेंस निलंबित कर दिए जाएंगे, साथ ही सजा के भी कड़े प्रावधान किए जाएंगे.
- शराब पीकर गाड़ी चलाना गैर-कानूनी है. मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के तहत अगर कोई व्यक्ति शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए पकड़ा जाता है तो पहली बार ऐसा करने पर 6 महीने की जेल या दो हजार रुपये जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.
- जबकि, दूसरी बार ऐसा करते हुए पकड़े जाने पर दो साल की जेल या तीन हजार रुपये जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.
- हालांकि, मध्य प्रदेश में अब शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के लाइसेंस को सस्पेंड कर दिया जाएगा और उन्हें और सख्त सजा दी जाएगी.
- मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पहली बार शराब के नशे में गाड़ी चलाते हुए पकड़े जाने पर 6 महीने के लिए लाइसेंस कैंसिल कर दिया जाएगा. दूसरी बार में दो साल के लिए और तीसरी बार जीवनभर के लिए लाइसेंस कैंसिल कर दिया जाएगा.
5. क्या इससे चुनाव पर कोई असर पड़ेगा?
- शिवराज सरकार के इस फैसले से भले ही शराब पीने वाले थोड़े नाराज हों, लेकिन इससे महिलाओं के वोट हासिल करने में मदद मिलती है.
- इसे बिहार के उदाहरण से समझ सकते हैं. 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने शराबबंदी करने का वादा किया था. इसका असर ये हुआ कि महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत 60 फीसदी के करीब हो गया. कुछ इलाकों में तो 70 फीसदी से ज्यादा महिलाओं ने वोट दिया.
- सरकार बनने के बाद अप्रैल 2016 में बिहार में शराबबंदी का कानून आया. 1 अप्रैल 2016 को बिहार देश का पांचवां राज्य बन गया, जहां शराब पीने और जमा करने पर प्रतिबंध लग गया.
6. तो फिर शराबबंदी क्यों नहीं कर देते?
- बिहार, गुजरात जैसे कुछ राज्यों में पूरी तरह से शराबबंदी हैं. कुछ राज्य ऐसे भी हैं, जहां पहले शराबबंदी थी, लेकिन बाद में इसे हटा लिया गया. इसकी वजह है सरकार की कमाई.
- हरियाणा में 1996 में शराबबंदी लागू की गई थी, लेकिन 1998 में इसे हटा लिया गया. आंध्र प्रदेश में भी 1995 में शराब पर प्रतिबंध लगा, जिसे 1997 में हटा दिया गया. मणिपुर में भी 1991 से शराबबंदी थी, लेकिन पिछले साल ही सरकार ने इसके नियमों में थोड़ी ढील दी है ताकि सरकारी खजाना भरा जा सके.
- रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि देश के ज्यादातर राज्यों के टैक्स रेवेन्यू में 10 से 15 फीसदी हिस्सेदारी शराब से मिलने वाली टैक्स की होती है. उत्तर प्रदेश और कर्नाटक के टैक्स रेवेन्यू में तो 20 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी शराब की है.
- शराब की बिक्री से सरकारी खजाना किस तरह बढ़ता है? इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि जब मार्च 2020 में कोविड की वजह से लॉकडाउन लगा तो शराब की दुकानें भी बंद हो गईं और इससे सरकार को बहुत नुकसान हुआ. लेकिन जब शराब की दुकानें फिर खुलीं तो जमकर बिक्री हुई. अकेले यूपी में एक दिन में 100 करोड़ की शराब बिकी थी. दिल्ली में हफ्तेभर में 235 करोड़ की शराब बिक गई थी.
- आरबीआई के मुताबिक, मध्य प्रदेश के टैक्स रेवेन्यू में भी 10 फीसदी हिस्सेदारी शराब की है. 2022-23 में सरकार ने 1.36 लाख करोड़ रुपये का टैक्स रेवेन्यू मिलने का अनुमान लगाया था, जिसमें से 13 हजार करोड़ से ज्यादा रेवेन्यू एक्साइज ड्यूटी यानी शराब से मिलने वाले टैक्स से आने की उम्मीद थी.
7. एमपी में कितनी है शराब की खपत?
- सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में हर 100 में से 17 पुरुष ऐसे हैं जो शराब पीते हैं. ये राष्ट्रीय औसत के लगभग बराबर ही है.
- नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के आंकड़ों के मुताबिक, एमपी में 15 साल की उम्र से ज्यादा 17.1% पुरुष शराब पीते हैं. वहीं, 1% महिलाएं ही शराब का सेवन करतीं हैं.
- इस सर्वे के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में शराब की खपत ज्यादा है. ग्रामीण इलाकों में करीब 19 फीसदी और शहरी इलाकों में 13 फीसदी पुरुष शराब पीते हैं.