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Kuno National Park: नामीबिया से आए चीतों के भारत में 24 घंटे पूरे, नए माहौल में दिखे सहमे-सहमे

MP News: नामीबिया से लाए गए चीते कूनो नेशनल पार्क में सहज दिखाई दे रहे हैं. कूनो प्रबंधन ने कहा है कि सब कुछ सामान्य है. चीतों ने गोश्त भी खाया और भरपूर नींद ली है. बाड़े में आराम से घूमते दिखाई दे रहे हैं. चीतों के वाइटल पैरामीटर भी सामान्य हैं. उन पर हर पल हमारी नजर है.

कूनो नेशनल पार्क में मौजूद चीता ( फाइल फोटो ) कूनो नेशनल पार्क में मौजूद चीता ( फाइल फोटो )
रवीश पाल सिंह
  • श्योपुर,
  • 18 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 4:08 PM IST

कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में नामीबिया से लाए गए चीतों को चौबीस घंटे पूरे हो चुके हैं. पार्क प्रबंधन का कहना है कि  रिलीज के बाद  नया परिवेश देखकर चीते थोड़ा सहमे लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने यहां एडजस्ट करना शुरू कर दिया है. नामीबिया से भारत के कूनो पालपुर पहुंचे चीतों को बाड़े में छोड़े हुए 24 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं. 

पहले दिन अपने आप को नए परिवेश में देख कर चीते थोड़े से नर्वस हुए. लेकिन उनका व्यवहार सामान्य और सकारात्मक दिख रहा है. 

चीतों के लिए जो विशेष बाड़ा बनाया गया है वह उसमें घूम रहे हैं और सामान्य हैं.  चीतों के सभी वाइटल पैरामीटर सामान्य हैं, सभी 8 चीतों ने अपनी नींद पूरी की है. चीतों को आज उनके लिए बनाए विशेष बाड़े में ही खाने के लिए गोश्त दिया गया. फिलहाल पार्क प्रबंधन चीतों के आचरण और व्यवहार से पूरी तरह संतुष्ट है

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कूनो प्रबंधन का कहना है कि चीतों के वाइटल पैरामीटर सामान्य हैं, आज चीतों को उनके बाड़े में ही खाने के लिए गोश्त दिया गया है. हमारी नजर लगातार चीतों पर बनी हुई है. फिलहाल सब सामान्य है. 

जानकारी के लिए बता दें कि बीते शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन के मौके पर देशवासियों को चीतों का गिफ्ट दिया था. देश की धरती पर 74 साल बाद एकबार फिर चीते नजर आ रहे हैं. साल 1952 में देश में चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया गया था. लेकिन अब फिर से देश की धरती पर चीते फर्राटा भरते नजर आ रहे हैं.

इन चीतों की रखवाली के लिए 90 गांव के 450 से ज्यादा लोगों को 'चीता मित्र' बनाया गया है. इनका काम शिकारियों से चीतों को बचाने की होगी.

पीएम मोदी ने इन चीता मित्रों से मुलाकात के दौरान कहा था, ''बताया गया होगा कि थोड़े दिनों तक चीता देखने के लिए आना नहीं है, उसे सेटल होने देना है, फिर वो बड़ी जगह पर जाएगा. वहां कुछ दिन सेटल होने देना है..सबसे बड़ी समस्या नेता लोग करेंगे, सब नेता लोग आ जाएंगे. नेता के रिश्तेदार आ जाएंगे. ये टीवी कैमरे वाले आ जाएंगे, वो होता है ना सबसे पहले ब्रेकिंग न्यूज वाले, वो आप पर दबाव डालेंगे, अफसरों पर दबाव डालेंगे.''

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फिलहाल इन चीतों को 12 किमी के क्षेत्र में तैयार किए गए बाड़े में रखा गया है. जब सभी मादा और नर चीता आपस में घुल मिल जाएंगे तब उन्हें बाड़े से बाहर छोड़ा जाएगा. चीते झुंड में रहना पसंद करते हैं. 

चीतों के लिए जगह

कूनो नेशनल पार्क का बफर जोन 1235 वर्ग किलोमीटर है. पार्क के बीच में कूनो नदी बहती है. कम ढाल वाली पहाड़ियां हैं. दक्षिण-पूर्वी इलाके में पन्ना टाइगर रिजर्व और शिवपुरी के जंगल हैं. इस इलाके के पास ही चंबल नदी बहती है. यानी चीतों के पास कुल मिलाकर 6800 वर्ग किलोमीटर का इलाका रहेगा.

चीतों के लिहाज से तापमान सही और पर्याप्त भोजन

कूनो नेशनल पार्क का अधिकतम औसत तापमान 42.3 डिग्री सेल्सियस रहता है. सबसे कम तापमान 6 से 7 डिग्री सेल्सियस रहता है. इलाके में सालभर में 760 मिलिमीटर बारिश होती है जो चीतों के लिए ठीक है. 

कूनो नेशनल पार्क में चीतों के लिए भोजन के लिए बहुत कुछ है. जैसे- चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सुअर, चिंकारा, चौसिंघा, ब्लैक बक, ग्रे लंगूर, लाल मुंह वाले बंदर, शाही, भालू, सियार, लकड़बग्घे, ग्रे भेड़िये, गोल्डेन सियार, बिल्लियां, मंगूज जैसे कई जीव हैं.

 

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