
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में मंगलवार और शुक्रवार को दो और चीतों की मौत हो गई. इन दोनों चीतों की मौत के साथ ही अब तक कुल 5 चीतों और 3 शावकों की मौत हो चुकी है. ये सभी चीते पिछले साल दक्षिण अफ्रिका से भारत लाए गए थे. विपक्षी नेता चीतों की मौत को लेकर केंद्र सरकार को घेर रहे हैं. मंगलवार को तेजस और शुक्रवार को सूरज चीते की मौत की वजह सामने आ गई है.
न्यूज एजेंसी के मुताबिक चीता एक्सर्ट का कहना है कि दोनों नर चीतों की मौत सेप्टीसीमिया के कारण हुई है. दरअसल, सेप्टीसीमिया एक गंभीर ब्लड इंफेक्शन है और इससे खून में जहर बनने लगता है. दावा है कि चीतों की गर्दन में जो रेडियो कॉलर पहनाया गया है, उसके कारण गर्दन के आसपास नमी बने रहने के कारण ये चीते बैक्टीरिया की चपेट में आ गए.
दक्षिण अफ्रीका के चीता एक्सपर्ट का दावा
दक्षिण अफ्रीकी चीता मेटापॉपुलेशन विशेषज्ञ विंसेंट वान डेर मेरवे ने मंगोलिया से न्यूज एजेंसी को बताया, "अत्यधिक गीली स्थितियों के कारण रेडियो कॉलर संक्रमण पैदा कर रहे हैं. दोनों चीतों की मौत सेप्टिसीमिया से हुई है. चीतों की गर्दन के आसपास अन्य जानवरों द्वारा पहुंचाए गए घाव नहीं थे. वे डर्मेटाइटिस और मायियासिस के बाद सेप्टीसीमिया के मामले थे."
मेरवे ने कहा कि वह द चीता मेटापॉपुलेशन इनिशिएटिव की ओर से दक्षिण अफ्रीका में चीता मेटापॉपुलेशन प्रोजेक्ट का प्रबंधन करते हैं. साथ ही दक्षिण अफ्रीका से भारत में चीतों को लाने वालों में वह भी शामिल थे.
भारत में चीता परियोजना के भाग्य के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "भारत में अभी भी भेजे गए चीतों की आबादी का 75 प्रतिशत जीवित और स्वस्थ हैं. इसलिए जंगली चीता के पुनरुत्पादन के लिए सामान्य मापदंडों के भीतर देखी गई मृत्यु दर के साथ सब कुछ अभी भी ट्रैक पर है."
राज्य वन विभाग ने मृत्यु की बताई थी ये वजह
बता दें कि मंगलवार को जब चीता तेजस की मौत हुई थी तो राज्य वन विभाग के अधिकारियों ने कहा था कि उन्हें संदेह है कि यह जानवरों के बीच आपसी लड़ाई का नतीजा है. उन्होंने बताया कि मृत चीते के गले के आसपास घाव पाए गए हैं. वहीं शुक्रवार को मृत पाए गए चीता सूरज की गर्दन और पीठ पर घाव थे और मक्खियां व कीड़े आसपास मंडरा रहे थे.
इसलिए चीतों की गर्दन पर लगाए गए हैं रेडियो कॉलर
अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा और अन्य मुद्दों के लिए उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए स्थानांतरित चीतों की गर्दन के चारों ओर रेडियो कॉलर लगाए गए हैं. संपर्क करने पर कूनो नेशनल पार्क के डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने बताया कि उन्होंने दोनों चीतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भोपाल में वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी है. हालांकि शर्मा ने रिपोर्ट के बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया.
संक्रमण से हुई दोनों चीतों की मौत- वन अधिकारी
न्यूज एजेंसी के मुताबिक एक अन्य वन अधिकारी ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए कहा कि उन्हें संदेह है कि दोनों चीतों की मौत किसी संक्रमण के कारण हुई है. उन्होंने कहा, "लेकिन इससे पहले कि हम कुछ कर पाते, संक्रमण फैल रहा था और अपना असर दिखा रहा था. यह बहुत तेजी से फैलता है."
मध्य प्रदेश के वन मंत्री ने कही थी ये बात
गौरतलब है कि शुक्रवार को मध्य प्रदेश के वन मंत्री विजय शाह ने कहा था कि (सूरज की) मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलेगा. जब उनसे कई चीतों मौतों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि जो तीन शावक मरे, वे जन्म से ही कुपोषित थे, जबकि अन्य मौतें संभोग या खाने के दौरान झगड़े से हुईं, जो जानवरों में आम है.
मौतों के लिए कुप्रबंधन के किसी भी आरोप को खारिज करते हुए, शाह ने कहा कि भारत, दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया की सरकारें चीतों के प्रबंधन में शामिल थीं और सब कुछ उनके निर्देशों के अनुसार किया जा रहा था. इसलिए, यह कहना उचित नहीं है कि ये (मौतें) लापरवाही के कारण हुईं. पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) हर चीज पर कड़ी नजर रख रहा है. सब कुछ पीएमओ के निर्देश पर किया जा रहा है. हमारी तरफ से कोई लापरवाही नहीं है.
दो खेप में भारत लाए गए थे 20 चीते
उल्लेखनीय है कि पिछले साल 17 सितंबर को पीएम मोदी की मौजूदगी में आठ नामीबियाई चीतों - पांच मादा और तीन नर को कूनो नेशनल पार्क में संगरोध बाड़ों में छोड़ा गया था. इस साल फरवरी में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते कूनो नेशनल पार्क पहुंचे थे. चार शावकों के जन्म के बाद चीतों की कुल संख्या 24 हो गई थी, लेकिन आठ मौतों के बाद यह संख्या घटकर 16 रह गई है. इससे पहले भारत में चीतों को 1952 में विलुप्त घोषित कर दिया गया था.