
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे रायसेन में एक शराब फैक्ट्री में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने छापा मारकर 2 दर्जन से ज्यादा बाल श्रमिकों को मुक्त कराया. इस मामले में अब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाया है और कई अफसरों पर एक्शन लिया है.
दरअसल, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो इन दिनों मध्य प्रदेश के दौरे पर हैं. उन्हें शिकायत मिली थी कि रायसेन स्थित शराब फैक्ट्री में मासूमों से काम कराया जाता है. इसके बाद आयोग की टीम ने छापा मारकर मासूम बाल श्रमिकों को वहां से रेस्क्यू कर प्रशासन की सौंप दिया. टीम न पाया कि रसायनों के सम्पर्क में रहने से कई बच्चों के हाथ की चमड़ी भी जल चुकी है. मामले ने तूल पकड़ा तो बात मुख्यमंत्री मोहन यादव तक पहुंची और उन्होंने इसपर कड़ा एक्शन लिया. सीएम मोहन यादव ने मामले को बेहद गंभीर बताया था और 24 घंटे के अंदर ही कार्रवाई करते हुए प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी कन्हैयालाल अतुलकर, मैसर्स सोम डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड, सेहतगंज को निलंबन कर दिया गया. इसके अलावा रायसेन जिले के तीन आबकारी उप-निरीक्षकों प्रीति शैलेंद्र उईके, शैफाली वर्मा और मुकेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है.
हालांकि अब मामले ने तूल पकड़ लिया है क्योंकि आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने रविवार को आरोप लगाया है कि कार्रवाई के डर से बाल श्रमिकों को गायब करवा दिया गया है.
बच्चे कस्टडी से गायब!
कानूनगो ने रविवार सुबह X पर पोस्ट करते हुए लिखा, ''NCPCR ने प्रशासन को सौंपे, बच्चे कस्टडी से गायब.'' दरअसल, बाल आयोग ने बच्चों को रेस्क्यू कर प्रशासन को सौंप दिया था और एसडीएम को निर्देश दिए कि इन्हें CWC के सामने पेश किया जाए. दोषियों बाल संरक्षण कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए. इतना निर्देश देकर वे वहां से चले गए, अब उन्हें सूचना मिली कि बच्चे प्रशासन की कस्टडी से ही गायब हो गए. इस बात की पुष्टि खुद प्रियंक कानूनगो ने की है.
प्रियंक कानूनगो ने कहा, ''कल दोपहर मध्यप्रदेश के रायसेन ज़िले में निरीक्षण के दौरान हमको सोम डिस्टलरी में शराब बनाने के काम में नियोजित मिले 39 बालक और किशोरों को देर शाम फ़ैक्टरी से ग़ायब कर दिया गया है!
क़ानून के अनुसार बाल/बंधुआ श्रम से रेस्क्यू किए गए बच्चों को SDM के समक्ष प्रस्तुत कर बयान करवाए जाते हैं और CWC की तीन सदस्यीय बेंच उनके पुनर्वास के लिए आदेश करती है. दोपहर 1:30 बजे के आसपास कलेक्टर ने मुझे फ़ोन पर सूचित किया था कि संबंधित SDM व CWC को फ़ैक्टरी पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं. हमने 3:28 PM समस्त जानकारी मौजूदा पुलिस अधिकारियों को प्रदान कर दी थी और DPO व SDO व श्रम विभाग को मामला सौंप कर वहां से रवाना हुए. देर रात तक CWC का कोरम पूरा नहीं हो पाया, जिससे वैधानिक आदेश नहीं हो सके और SDM साहब को हाइवे की चौड़ी सड़क पर ज़िला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर आने में 5 घंटे लग गए. ADM साहिबा को इतनी दूरी तय करने में 7 घंटे लगे. इस कारण देर रात तक इनके न आने से पुलिस FIR नहीं कर सकी और इस बीच वहां से 39 बच्चे ग़ायब कर दिए गए.
सूचना पर हम लोग देर रात वापस पहुंचे. थाने भी गए परंतु रात्रि 12 बजे तक बच्चों का कोई अता पता नहीं लग सका था. अब ये बच्चे कहां हैं? इन्हें प्रशासन की नाक के नीचे से कौन, कैसे ले गया, ये कब तक CWC की पूर्ण कोरम बेंच के सामने प्रस्तुत किए जाएंगे, ये प्रश्न फ़िलहाल अनुत्तरित है. मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश के बाद सरकार के आला अधिकारी भागदौड़ में लगे हैं. देर रात इस नई घटना पर FIR दर्ज किए जाने की तैयारी की सूचना मिली है और अभी कई सरकारी अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी चल रही है.