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मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जिला एवं सत्र न्यायालय ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पीए रह चुके शर्मा बंधुओं की सजा बरकरार रखी है. साल 2018 में निचली अदालत ने दोनों को चेक बाउंस के मामले में दोषी पाया था. कोर्ट ने दोनों को एक साल की जेल और पीड़ित को 1 करोड़ 65 लाख देने का आदेश दिए थे.
ग्वालियर के जिला एवं सत्र न्यायालय के शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि जिला एवं सत्र न्यायालय ने रमेश शर्मा और भूपेंद्र शर्मा को चेक बाउंस मामले में दोषी पाया है. दोनों शर्मा बंधु केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पूर्व पीए रहे चुके हैं. कोर्ट ने दोनों को एक साल की सजा और पीड़ित को 1 करोड़ 65 लाख देने का आदेश को भी बरकरार रखा.
पांच साल पुराना है मामला
दरअसल, मामला पांच साल पुराना साल 2018 का है. शहर के जाने-माने नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एएस भल्ला के साथ पार्टनरशिप में एक डायग्नोस्टिक सेंटर खोलने के लिए रमेश शर्मा और भूपेंद्र शर्मा ने अनुबंध किया था. मगर, उनको मशीन पुरानी दे दी गई थी. इसे लेकर डॉक्टर और शर्मा बंधुओं के बीच काफी विवाद हुआ था.
इसके बाद रमेश शर्मा और भूपेंद्र शर्मा की ओर से डॉ. भल्ला को चेक दिया गया था. मगर, चेक बैंक में लगाने के बाद बाउंस हो गया था. इसके खिलाफ डॉक्टर भल्ला ने रमेश शर्मा और भूपेंद्र शर्मा के खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया था. इस पर निचली अदालत ने अक्टूबर 2018 में फैसला सुनाते हुए दोनों को दोषी ठहराया था.
शर्मा भाईयों ने फैसले के खिलाफ की थी अपील
इस आदेश के खिलाफ शर्मा भाईयों की तरफ से जिला एवं सत्र न्यायालय में अपील दायर की गई थी. इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया और उनकी एक साल का सजा को बरकरार रखा.
इसके साथ ही कोर्ट ने दोनों को 1 करोड़ 65 लाख रुपए दो किस्तों में देने के आदेश दिए हैं. अब इस सजा से बचने के लिए सिंधिया के पूर्व निजी सचिव रमेश शर्मा और भूपेंद्र शर्मा को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं.