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मध्यप्रदेश में अखिलेश यादव ने कांग्रेस से ले लिया अपना बदला, जानिये कहां-कहां सपा ने पहुंचाया नुकसान

मध्यप्रदेश में समाजवादी पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली है फिर भी कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव हारकर भी जीत गए. कांग्रेस की हार में समाजवादी पार्टी की बहुत बड़ी भूमिका भले ही न हो पर समाजवादी पार्टी के लिए फायदेमंद जरूर रहा यह चुनाव.

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव एमपी के निवाड़ी में अपनी पार्टी के लिए प्रचार करते हुए समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव एमपी के निवाड़ी में अपनी पार्टी के लिए प्रचार करते हुए
संयम श्रीवास्तव
  • नई दिल्ली,
  • 04 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 1:48 PM IST

उत्तर प्रदेश के पूर्व चीफ मिनिस्टर और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को हालांकि राजस्थान में कोई सीट नहीं मिली है जबकि करीब 72 प्रत्याशी उन्होंने खड़े किए थे.समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी तो नहीं जीत सके पर उन प्रत्य़ाशियों के चलते कांग्रेस ने कई सीटें  जरूर गंवाई हैं. कांग्रेस ने अगर अखिलेश यादव को महत्व दिया होता तो हो सकता है कि उनकी स्थित इतनी दयनीय नहीं होती. साथ लेना तो दूर कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के इस कद्दावर नेता के साथ जो बिहेव किया वो कहीं से भी एक बड़ी पार्टी को शोभा नहीं देता था. मगर अहंकार में चूर कांग्रेस के नेताओं ने अखिलेश यादव से अधिक अपना नुकसान करा लिया.

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हालांकि अखिलेश यादव ने अपने साथ हुए दुर्व्यवहार का बदला ले लिया. उनकी पार्टी को कोई सीट तो नहीं मिली और न ही अखिलेश अपनी पार्टी के वोटिंग परसेंटेज ही सुधार कर पाए पर वो हारकर भी जीत गए. क्योंकि उन्हें इस हार से कई फायदे होने वाले हैं. इसमें अतिशयोक्ति नहीं है. अखिलेश ने न केवल कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया बल्कि अपने लिए इंडिया गठबंधन में मजबूत जमीन भी तैयार कर ली है.

क्या हुआ था एमपी में

अखिलेश यादव चाहते थे कि एमपी में वे सीट जिन पर पिछले विधानसभा चुनावों में पार्टी कैंडिडेट जीते थे या दूसरे स्थान पर रहे थे वहां उनकी पार्टी के साथ कांग्रेस का समझौता हो जाए. पर कांग्रेस के इनकार के बाद समाजवादी पार्टी ने करीब 72 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का घोषणा कर दी. 2018 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी बिजावर सीट जीतने में कामयाब हुई थी. 6 सीटों पर वह दूसरे नंबर पर रही. समाजवादी पार्टी चाहती थी कि इन 7 सीटों पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी चुनाव लड़े. अखिलेश यादव और कमलनाथ के बीच फोन पर कई राउंड की बातचीत हुई. फिर तय हुआ था कि कम से कम 5 सीटें समाजवादी पार्टी को मिल सकती हैं. लेकिन बाद में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को अंगूठा दिखा दिया. इतना ही नहीं कांग्रेस नेताओं कमलनाथ और टीएस सिंह देव ने कहा कौन अखिलेश? कुछ ने अखिलेश को छुटभैया भी बोला. बाद में समाजवादी पार्टी ने भी कांग्रेस को खूब खरी खोटी सुनाया था.

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कांग्रेस की करा दी दुर्गति

हालांकि कांग्रेस और बीजेपी के बीच मध्यप्रदेश में वोटिंग परसेंटेज में इतना बड़ा अंतर है कि अगर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का साथ मिल भी जाते तो कोई फर्क नहीं पड़ता. मध्यप्रदेश में बीजेपी को 48.55 परसेंट और कांग्रेस को 40.40 परसेंट वोट मिले हैं. जबकि समाजवादी पार्टी 46 परसेंट ही वोट मिल सके हैं. लेकिन समाजवादी पार्टी ने केवल 72 सीटों पर ही चुनाव लड़ा था. इसलिए इतना कम वोट परसेंटेज भी ठीक ठाक ही माना जाएगा है. वह भी ऐसे समय में जब आधे परसेंट वोट से पार्टी दर्जनों सीट हार जाती है. दूसरी बात साथ चुनाव लड़ने पर कई परसेंट वोट बढ़ भी जाते हैं. अलग-अलग चुनाव लड़ने पर बहुत से वोटर्स दोनों पार्टियों को वोट नहीं देते हैं, वे किसी तीसरे को अपना वोट देने को मजबूर होते हैं. अखिलेश ने इन चुनावों में करीब 24 रैलियां की थी. उनकी पत्नी सांसद डिंपल यादव ने भी कई जगह रैलियां कीं. इसका फायदा यह हुआ कि कांग्रेस की मिट्टी पलीद होने में एक प्रमुख कारण समाजवादी पार्टी भी बना.

कहां-कहां हारी कांग्रेस समाजवादी पार्टी के चलते

मध्य प्रदेश की निवाड़ी विधान सभा में भाजपा ने कांग्रेस को 17,157 मतों से हरा दिया. यहां पर सपा कैंडिडेट को 32,670 वोट मिले हैं. इसीतरह चांदला विधान सभा में भाजपा ने कांग्रेस को 15,491 मतों से हराया है जबकि यहां भी सपा को 24,977 वोट मिले हैं. इसी प्रकार राजनगर विधान सभा में भाजपा ने कांग्रेस को 5,867 वोटों से हराया, यहां भी साइकिल को 6,353 वोट मिले हैं. BJP ओरछा(डिंडोरी)सीट भी जीत गई है.यहां समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को 20 हज़ार वोट मिले हैं. यहां बीजेपी 18 हज़ार से अधिक मतों से चुनाव जीती है.अगर इन चारों सीटों पर अगर समाजवादी पार्टी चुनाव न लड़ी होती तो संभावना है कि कांग्रेस का उम्मीदवार विजयी होता. ये तो कुछ चंद उदाहरण हैं . 

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अब यूपी में सीट शेयरिंग होगी तो अखिलेश यादव की मर्जी से ही

एमपी-राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का जबरदस्त तरीके से डब्बा गोल हुआ है. इंडिया गठबंधन के लिए सीट बंटवारे के फॉर्मूले पर अपनी सहमति देने के लिए कांग्रेस जानबूझकर देरी कर रही थी. कांग्रेस चाहती थी कि इन तीनों स्टेट के रिजल्ट आ जाएं फिर वो अपने पत्ते खोले. कांग्रेस को उम्मीद थी कि इन तीनों राज्यों मे उसकी सरकार बन रही है. सरकार बनने के बाद कांग्रेस अपनी शर्तों पर सीट शेयरिंग की बात करने वाली थी . पर अब उल्टा हो गया है. कांगेस या इंडिया ब्लॉक को कम से कम यूपी में अधिक सीटें नहीं मिलने वाली हैं. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव अब यूपी में अपनी शर्तों पर सीटों की हिस्सेदारी तय कर सकेंगे. अब अखिलेश को कांग्रेस के लिए अधिक सीट छोडने इसके साथ ही मध्यप्रदेश और राजस्थान आदि में अपने लिए सीट की मांग कर सकेंगे.

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