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महात्मा गांधी, नेहरू और सावरकर की आलोचना हो सकती है लेकिन आंबेडकर की नहीं, क्यों? | Opinion

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आज संसद में डॉक्टर आंबेडकर के अपमान पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही ने प्रदर्शन किया. आज संसद में डॉक्टर आंबेडकर के अपमान पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही ने प्रदर्शन किया.
संयम श्रीवास्तव
  • नई दिल्ली,
  • 19 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 3:57 PM IST

संविधान निर्माता बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान को लेकर संसद के भीतर और बाहर हुआ घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है. आज तीसरे दिन कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने डॉ. आंबेडकर के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी पर चर्चा के लिए नियम 267 के तहत राज्यसभा में बिजनेस सस्पेंशन नोटिस दिया है. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी नीली टीशर्ट पहनकर पहुंचे और प्रियंका गांधी भी नीली साड़ी में नजर आईं. इस बीच दोनों ही ओर से हो रहे प्रदर्शनों के बीच कहा जा रहा है कि राहुल गांधी के धक्के से बीजेपी के 2 सांसद घायल हो गए.  मतलब साफ है कि डॉ. आंबेडकर के मुद्दे को किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं है. 

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सवाल उठता है कि संसद में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के बारे में इतना कुछ कहा गया पर कांग्रेस को उनके अपमान की परवाह नहीं है. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर भी चर्चाओं का बाजार गर्म रहता है, जिसके मन में जो आता है राष्ट्रपिता के लिए वो बोल देता है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी जब जी चाहे वीर सावरकर के बारे में जो मन में आता है बोलते रहते हैं. गोलवलकर के कार्यों का भी अकसर मूल्यांकन होता है और उन्हें भला बुरा कहती रही है कांग्रेस. पर डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के बारे में किसी को एक शब्द भी नहीं बर्दाश्त है. नेहरू और गांधी के अपमान पर न कांग्रेस इतनी फिक्र करती है और सावरकर-गोलवलकर के लिए भला बुरा सुनने पर बीजेपी ने कभी तूफान खड़ा किया. पर गृहमंत्री अमित शाह जैसी शख्सियत को भी आंबेडकर के बारे में अपनी न कही बातों के लिए भी देश के सामने आकर सफाई देनी पड़ती है. जबकि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, यहां हर किसी की आलोचना करने और तारीफ करने का अधिकार सबको मिला हुआ है. 

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1-नेहरू और गांधी के अपमान पर इतनी नाराज कब हुई थी कांग्रेस

अमित शाह ने राज्यसभा में कुछ ऐसा नहीं कहा था जिसके नाम पर कांग्रेस ने पहाड़ उठा लिया है. पहली बात तो ये कि उनके बयान के आधे हिस्से को काट कर दिखाया जा रहा है. पर मान लीजिए कि यदि बाद का हिस्सा नहीं भी दिखाते हैं तो भी उस वाक्‍य में ऐसा क्या है कि कांग्रेस सहित विपक्ष ने बवाल खड़ा कर दिया है. दरअसल मंगलवार शाम राज्यसभा में संविधान पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा था कि आज कल बाबा साहब आंबेडकर का नाम लेना एक फैशन बन गया है. हर बात में बाबा साहब का नाम आंबेडकर-आंबेडकर-आंबेडकर-आंबेडकर लिया जाने लगा है. इतना ही नाम अगर भगवान का लेते तो स्वर्ग मिल जाता. इसके बाद अमित शाह कहते हैं कि जिन्होंने जीवन भर बाबा साहेब का अपमान किया, उनके सिद्धांतों को दरकिनार किया, सत्ता में रहते हुए बाबा साहेब को भारत रत्न नहीं मिलने दिया, आरक्षण के सिद्धांतों की धज्जियां उड़ाईं, वे लोग आज बाबा साहेब के नाम पर भ्रांति फैलाना चाहते हैं.

दरअसल दूसरे हिस्से को कांग्रेस दिखा नहीं रही है. पहले हिस्से के नाम पर गृहमंत्री अमित शाह को घेरा जा रहा है. सवाल उठता है कि जिस देश में राजनीति का स्तर इतना गिर चुका हो कि देश के प्रधामनमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्रियों, राष्ट्रपिता, स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जो मन में आए लोग बोल रहे हैं, तो फिर अमित शाह ने क्या बुरा बोल दिया? 'हर बात में बाबा साहब का नाम आंबेडकर-आंबेडकर-आंबेडकर-आंबेडकर लिया जाने लगा है इतना ही नाम अगर भगवान का लेते तो स्वर्ग मिल जाता... इस वाक्‍य में कौन सी ऐसी बात है जिस पर देश का पूरा विपक्ष उबाल खा रहा है. 

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क्या कभी गांधी और नेहरू के लिए कांग्रेस ने इस तरह की नाराजगी दिखाई है? जबकि गांधी और नेहरू के बारे में तो ऐसी बातें हो रही हैं जिन्हें कई बार लिखना भी शर्मिंदगी से भरा होता है. इस पूरे शीतकालीन सत्र के दौरान जितनी बार नेहरू का नाम लिया गया है उतना  आज तक किसी भी सत्र में किसी नेता का नहीं लिया गया होगा. यही कारण है कि कांग्रेस के आंबेडकर प्रेम पर लोगों को भरोसा नहीं हो रहा है.

2-नेहरू के जीवन के पन्ने तो बीजेपी खोलती है, डॉ आंबेडकर की क्यों नहीं?

कांग्रेस ही नहीं भारतीय जनता पार्टी भी डॉक्टर आंबेडकर को लेकर को विवाद नहीं मोल लेना चाहती है. देश के पहले पीएम नेहरू के जीवन का एक-एक चैप्टर खोलने वाली भारतीय जनता पार्टी कभी आंबेडकर के बारे में बोल सकती है. नेहरू के तो व्यक्तिगत जीवन तक पर हमले किए जाते हैं. हिंदू धर्म और हिंदू देवी देवताओं का ठेकेदार बन चुकी भारतीय जनता पार्टी ने कभी राम और कृष्ण के बारे में डॉक्टर आंबेडकर के विचारों को सामने लाने का काम करेगी? शायद कभी नहीं क्योंकि डॉक्टर आंबेडकर ही आज की तारीख में एक शख्सियत हैं जिनके नाम पर एक ठोस वोट बैंक है. ये बात हर पार्टी समझती है. 

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3-सावरकर के बारे में कितनी अपमानजनक बातें हुईं, कभी बवाल नहीं मचा

प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के बारे में राहुल गांधी आए दिन कुछ भी बोल देते रहे हैं. राहुल गांधी ने लगातार सावरकर को माफीवीर कहके उनका मजाक उड़ाया. जबकि वीर सावरकर एक मात्र ऐसे स्वतंत्रता सेनानी रहे जिन्हें आजादी के संघर्ष के लिए अंग्रेजी सरकार ने दो बार आजीवन कारावास की सजा दी. सावरकर के भाई को भी काला पानी भेजा गया था. सावरकर के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता पर राहुल गांधी के आक्षेप पर कभी भी बीजेपी या किसी अन्य पार्टी ने इसे इतना बड़ा अपमान नहीं माना जितना बड़ा अपमान कांग्रेस अमित शाह के बयान को मान रही है.

4- क्या आंबेडकर भगवान से भी ऊपर हैं?

दरअसल जिस परिवेश में राम और कृष्ण के बारे में कुछ भी कहा जा रहा है. किसी भी देवी देवता को नेता टार्गेट पर ले लेते हैं. उस परिवेश में जन नेता कहां बचने वाले हैं. डॉक्टर भीमराव आंबेडकर भी देश के बहुत से लोगों के लिए भगवान ही हैं. देश के सबसे पिछड़े, शोषित और उत्पीड़ित लोगों के उत्थान के लिए उनके संघर्ष को भुलाया नहीं जा सकता. इसलिए ही ये तबका उन्हें भगवान से ऊपर का दर्जा देता है. कुछ दलित समुदाय तो अपने परिवार में शादी-ब्‍याह की रस्‍म भी भगवान बुद्ध के साथ डॉ. आंबेडकर की तस्‍वीर को रखकर संपन्‍न कराते हैं. जाहिर है कि यही कारण है कि देश में किसी भी पार्टी की स्थिति ऐसी नहीं है जो आंबेडकर का अपमान कर सके. यही कारण आज नेता हिंदू देवी देवताओं तक के बारे में अपशब्द बोलने से नेता बाज नहीं आते हैं. लेकिन, डॉ आंबेडकर के मामले में ऐसा नहीं है. अपवाद स्‍वरूप भी कोई ऐसा उदाहरण नहीं मिलता, जहां किसी पार्टी के किसी नेता आंबेडकर का अनादर किया हो.

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