
दिल्ली के मोर्चे पर अरविंद केजरीवाल की टीम तैनात है. टीम केजरीवाल मुस्तैदी से डटी हुई है, लेकिन वो अरविंद केजरीवाल की जगह तो नहीं ही ले सकती. टीम केजरीवाल का तेवर आक्रामक जरूर नजर आ रहा है, लेकिन असर अरविंद केजरीवाल जैसा तो होने से रहा.
दिल्ली में वक्फ संशोधन बिल पर संजय सिंह मोर्चा संभाल रहे हैं. दिल्ली में पॉवर कट को लेकर आतिशी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को कठघरे में खड़ा कर रही हैं. कपिल मिश्रा के मामले में सौरभ भारद्वाज और AAP के प्रवक्ता हमला बोल रहे हैं - लेकिन उसमें अरविंद केजरीवाल वाली बात नहीं देखने को मिल रही है.
जब देश भर में सारे राजनीतिक दल वक्फ बिल के सपोर्ट या विरोध में खड़े और सक्रिय नजर आ रहे हैं, अरविंद केजरीवाल पंजाब में नशे के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं. बेशक नशे की समस्या पंजाब में बेहद गंभीर है, लेकिन अभी ऐसा क्या है जो अरविंद केजरीवाल नशे के खिलाफ अभियान छेड़ चुके हैं.
और वैसे भी, नशे के तस्करों के खिलाफ पंजाब पुलिस ऑपरेशन चला रही है. प्रशासन बुलडोजर एक्शन ले रहा है - ऐसा क्या है कि अरविंद केजरीवाल अपने तो अपने, साथ में मनीष सिसोदिया को भी पंजाब लेते गये हैं.
दिल्ली से ज्यादा केजरीवाल का पंजाब पर जोर क्यों?
क्या दिल्ली की हार ने अरविंद केजरीवाल पर इतना असर डाला है कि वो राहुल गांधी की तरह अमेठी जैसा व्यवहार करने लगे हैं. अमेठी में राहुल गांधी की 2019 की हार के बाद स्थानीय कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता तो मोर्चे पर डटे ही हुए थे, और अमेठी लोकसभा सीट पर 2024 में किशोरी लाल शर्मा की जीत इस बात का सबूत भी है.
निश्चित तौर पर पंजाब राजनीतिक हिसाब से आम आदमी पार्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण हो गया है. मानते हैं कि लुधियाना वेस्ट सीट पर उपचुनाव होना है, और वो इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा को उम्मीदवार बनाया है, लेकिन चुनाव कब होगा ये तो अभी पता भी नहीं है. वैसे उपचुनाव तो गुजरात में भी होना है. पंजाब में विधानसभा चुनाव में काफी वक्त है, 2027 तक. हो सकता है, अरविंद केजरीवाल को बीच में ही सरकार गिर जाने का खतरा महसूस हो रहा हो - लेकिन पंजाब के चक्कर में दिल्ली से दूर होने का जोखिम उठाने का क्या मतलब है?
पंजाब में आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल कहते हैं, यहां पर हमारी पूरी पंजाब सरकार बैठी हुई है और पंजाब के सारे वरिष्ठ नेता भी आए हुए हैं… मीटिंग का एक ही मकसद है, मीटिंग पंजाब के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है… हम सब पंजाब के नशा दूर करने के मकसद से एकत्रित हुए हैं… और ये मेरा दिल कहता हैं कि इस हॉल के अंदर बैठे एक-एक नेता ने अगर ठान लिया कि पंजाब से नशा दूर करना है तो पंजाब में नशा खत्म होने से कोई नहीं रोक सकता.
अरविंद केजरीवाल दावा करते हैं, पिछले एक महीने के अंदर हजारों तस्कर गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनके नाम से पंजाब के लोग कांपते थे… और अब बुलडोजर से उनके घर तोड़े जा रहे हैं.
और फिर, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाले अंदाज में कहते हैं, अगर कोई बदमाश पुलिस से मुठभेड़ करता है तो पुलिसकर्मी उसे गोली मारने में हिचकते नहीं है… नशा तस्करों को हमारा साफ संदेश है… या तो पंजाब में नशा बेचना बंद कर दो, या फिर पंजाब छोड़ दो.
अरविंद केजरीवाल भले ही पंजाब में डेरा डाले हुए हों, लेकिन दिल्ली में टार्गेट पर अब भी वही हैं. दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा कह रहे हैं, अरविंद केजरीवाल जी इतने डिप्रेशन में आ गये हैं कि उनको पंजाब में ले जाया जाता है… और बड़ी-बड़ी गाड़ी में बैठाकर आगे पीछे पुलिस की गाड़ियां चलाई जाती हैं, ताकि लगे कि वो सत्ता में हैं… जैसे स्कूल का बच्चा जब रोता है तो उसके लिए खिलौना लाते हैं, केजरीवाल जी को पंजाब सरकार के हेलिकॉप्टर में बैठाकर लेकर गए हैं.
दिल्ली विधानसभा में अब तक CAG की 6 रिपोर्ट पेश की जा चुकी है. छठी रिपोर्ट पेश किये जाने के वक्त सिरसा कह रहे थे, विपक्ष इसलिए नहीं आया, क्योंकि अरविंद केजरीवाल जी का फोन आता है… वो कहते हैं, वे मेरे कच्चे चिट्ठे खोल रहे हैं और तुम लोग आराम से सुन रहे हो… मुझे अरविंद केजरीवाल के एक साथी ने बताया कि वो तो डिप्रेशन से ही बाहर नहीं आ पा रहे हैं.
केजरीवाल के पास कपिल मिश्रा को घेरने का बेहतरीन मौका
ये कपिल मिश्रा ही हैं, जो एक बार अरविंद केजरीवाल पर दो करोड़ रुपये रिश्वत लेने का आरोप भी लगा चुके हैं. बीजेपी के हो जाने के बाद से 'घूंघरू सेठ' बोलकर सोशल मीडिया पर लगातार हमला बोलते रहे हैं - और दिल्ली सरकार के मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने से पहले ही कपिल मिश्रा ने की अरविंद केजरीवाल के करप्शन की जांच कराने का ऐलान किया था.
ऐसे में जबकि दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में उनकी कथित भूमिका को लेकर FIR दर्ज करके जांच किये जाने के निर्देश दिए हैं, अरविंद केजरीवाल सीन से गायब क्यों नजर आ रहे हैं. कपिल मिश्रा के खिलाफ याचिका की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया का कहना था, प्रथम दृष्टया ये संज्ञेय अपराध का मामला पाया गया है... कपिल मिश्रा और अन्य के खिलाफ जांच की आवश्यकता है.
आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ का कहना है, सभी ने देखा कि कपिल मिश्रा ने दिल्ली में कैसे दंगे भड़काये... अदालत ने पाया कि कपिल मिश्रा दंगों के दौरान मौजूद थे और उन पर आगे की जांच की जानी चाहिये... क्या वो कैबिनेट मंत्री बनने के लायक हैं? रेखा गुप्ता जी क्या ऐसे व्यक्ति को अपनी कैबिनेट में बनाए रखेंगी?
AAP विधायक जरनैल सिंह कहते हैं, बीजेपी को भी अपना रुख साफ करना चाहिये कि वो कब तक नफरत फैलाने वालों को बढ़ावा देगी?
क्या ऐसे मामलों में अरविंद केजरीवाल की दिलचस्पी खत्म हो गई है? क्या ये सब अरविंद केजरीवाल को दिल्ली की राजनीति से दूर नहीं कर रहा है?