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केजरीवाल का 55 सीटें जीतने का दावा, बात में कोई दम है या मामला यूं ही हवा हवाई है?

अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी की कम सीटें आने की बात बहुत पहले से ही कर रहे हैं. दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपनी आखिरी रैली आते आते सीटों का वो नंबर भी बता दिया है, जिसमें कुछ ग्रेस मार्क्स भी जुड़ सकते हैं - बशर्ते, दिल्लीवालों को महिला सम्मान निधि की पक्की उम्मीद हो.

दिल्ली चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने बताया आम आदमी पार्टी स्कोर, 55 नॉट आउट. दिल्ली चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने बताया आम आदमी पार्टी स्कोर, 55 नॉट आउट.
मृगांक शेखर
  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 12:45 PM IST

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में चुनाव प्रचार खत्म होते होते सीटों के नंबर पर सस्पेंस खत्म कर दिया है. आम आदमी पार्टी के हिस्से में इस बार कम सीटें आने की आशंका तो वो पहले से ही जता रहे थे, अब तो अपनी समझ से वो जादुई नंबर भी बता दिया है. लगे हाथ ये भी कहा है कि अगर महिला वोटर की कृपा हुई तो नंबर बढ़ भी सकता है.

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आम आदमी पार्टी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर की आशंका तो अरविंद केजरीवाल को पहले ही हो गई थी, और उस हिसाब से जरूरी उपाय भी कर चुके हैं. अब वो ईवीएम में भी गड़बड़ी की आशंका जता रहे हैं. और, ईवीएम के जरिये उनकी नजर में संभावित गड़बड़ी के नुकसान की भरपाई का नुस्खा भी वोटिंग से पहले ही बता दिया है - आम आदमी पार्टी की कम सीटें आने की सूरत में विधायकों के तोड़फोड़ की तोहमत तो बीजेपी पर जड़ चुके हैं ही. 

दिल्ली चुनाव से केजरीवाल की उम्मीदें

अरविंद केजरीवाल ने अब पूरी तरह साफ कर दिया है कि उनके हिसाब से आम आदमी पार्टी को कम सीटें मिलने का मतलब 55 होता है - और ऐन उसी वक्त दावा भी किया है कि अगर दिल्ली की महिलाएं चाहें तो ये नंबर 60 भी हो सकता है. 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल को 62 सीटें मिली थीं. 

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अरविंद केजरीवाल का दावा है कि आम आदमी पार्टी को दिल्ली विधानसभा चुनाव में 55 सीटें मिल रही हैं… अगर माताएं-बहने जोर का धक्का लगाएं तो, आम आदमी पार्टी को 60 सीटें भी मिल सकती हैं.

पहले की एक चुनावी रैली में अरविंद केजरीवाल का कहना था, आज कल कई लोग कह रहे हैं आम आदमी पार्टी की सरकार तो बनेगी, लेकिन कुछ सीटें कम हो सकती हैं… कुछ लोग कह रहे हैं 45-50 सीटें आएंगी… मेरा मानना है कि एक-एक मां-बहनें लग गईं, तो 65 से ज्यादा सीटें आएंगी.

लेकिन, अब वो अधिकतम 60 सीटों का ही दावा कर रहे हैं. दिल्ली में बीजेपी के ‘ऑपरेशन लोटस’ की आशंका जताते हुए अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की महिलाओं से अपील की थी, आप लोगों की जिम्मेदारी है कि सारे लोग लग जाना… और मजबूत सरकार बनाना… ये बहुत बदमाश हैं… कम सीट से जीते तो ये सरकार तोड़ देंगे… विधायक तोड़ लेंगे.

अरविंद केजरीवाल ने EVM पर भी सवाल उठाया है. आप नेता केजरीवाल ने दिल्लीवालों से अपील की है कि 'बीजेपी के ईवीएम के खेल' को हराने के लिए आम आदमी पार्टी को जमकर वोट करें. कहते हैं, ये लोग मशीनों में 10 फीसदी वोट की गड़बड़ी कर सकते हैं, इसलिए झाड़ू को इतना वोट दें कि आम आदमी पार्टी को 10 फीसदी से ज्यादा की लीड मिल जाये.

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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी और मनीष सिसोदिया के चुनाव हार जाने की चर्चाओं पर भी बयान दिया है, बीजेपी दावा कर रही थी कि AAP की तीन सीटें फंस गई हैं. नई दिल्ली, जंगपुरा और कालकाजी. ध्यान रहे, आप इन सीटों पर ऐतिहासिक अंतर से जीतने जा रही है.

आम आदमी पार्टी के नेता जिस नई दिल्ली सीट की बात कर रहे हैं, वहां से वो खुद चुनाव लड़ रहे हैं. अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बीजेपी की तरफ से प्रवेश वर्मा और कांग्रेस की तरफ से संदीप दीक्षित चैलेंज कर रहे हैं. जंगपुरा वो सीट है, जहां से दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया आप के उम्मीदवार हैं. और, कालकाजी से दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी चुनाव लड़ रही हैं, जिनका मुकाबल बीजेपी के रमेश बिधूड़ी, और कांग्रेस की अलका लांबा से है. 

दिल्ली चुनाव पर सी-वोटर का सर्वे

दिल्ली में वोटिंग से पहले सी-वोटर का सर्वे भी सामने आया है. सी-वोटर ने दिल्ली के लोगों से पूछा था कि क्या वे सरकार बदलना चाहते हैं? रिपोर्ट के मुताबिक, 1 फरवरी तक के ट्रैकर के हिसाब से मिले जवाब में 43.9 फीसदी लोग दिल्ली की मौजूदा सरकार के कामकाज से नाराज हैं, और अब बदलाव चाहते हैं. 

ऐसे ही 10.9 फीसदी लोग कामकाज से नाराज तो हैं, लेकिन सरकार बदलना नहीं चाहते. हां, 38.3 फीसदी लोगों की न तो सरकार से कोई नाराजगी है,  और न ही कोई बदलाव ही चाहते हैं.

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आम आदमी पार्टी के लिए फिक्र वाली बात बस ये है कि सी वोटर के मौजूदा ट्रैकर के हिसाब से 38.3 फीसदी लोग सरकार के कामकाज पर असंतोष जाहिर कर रहे हैं, और दिल्ली में बीजेपी और कांग्रेस की ऐसे ही वोटर पर नजर है - अगर ये एकजुट होकर नाराजगी जता दिये तो आम आदमी पार्टी के लिए ठीक नहीं होगा. 

सी-वोटर ने 6 जनवरी को भी ट्रैकर के नतीजे बताये थे. करीब महीने भर के अंतर पर हुए दोनो सर्वे के नतीजों की तुलना करें, तो लोगों की नाराजगी में कमी पाई गई है. पहले 46.2 फीसदी लोग सरकार के नाराजगी के चलते दिल्ली में सत्ता परिवर्तन चाहते थे, लेकिन अब ऐसे 43.2 फीसदी लोग ही हैं.

आम आदमी पार्टी को 2013 के पहले चुनाव में विधानसभा की 28 सीटें मिली थीं. तब बीजेपी को 32 सीटें मिली थीं. बहुमत के आंकड़े 36 से चार कदम पीछे रह जाने के बावजूद बीजेपी ने विपक्ष में बैठने का फैसला किया था. 2015 और 2020 के विधानसभा चुनावों में अरविंद केजरीवाल की पार्टी को 70 में से क्रमशः 67 और 62 सीटें मिली थीं. 

दिल्ली में चुनाव प्रचार 3 फरवरी को शाम 5 बजे खत्म हो चुका है. 5 फरवरी को दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे - और 8 फरवरी को वोटों की गिनती होनी है, नतीजे भी उसी दिन आने की अपेक्षा है. 

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