
उमर अब्दुल्ला जब विधानसभा चुनाव खुद न लड़ने, और नेशनल कांफ्रेंस के चुनाव जीत जाने पर भी मुख्यमंत्री न बनने जैसी बातें कर रहे थे, तो लगता था कहीं न कहीं उनके दिमाग सरकार के कामकाज का दिल्ली मॉडल ही घूम रहा है - लेकिन अब तो बीती बातों का कोई मतलब भी नहीं है. वो तो दो-दो विधानसभा सीटों से चुनाव भी जीत चुके हैं, और सरकार बनाने का दावा भी पेश कर चुके हैं.
और इसी बीच उमर अब्दुल्ला को अरविंद केजरीवाल की तरफ से सपोर्ट और सलाहियत का ऑफर भी मिल गया है. अरविंद केजरीवाल का सपोर्ट भी जम्मू-कश्मीर में चुनाव जीतकर आये निर्दलीयों जैसा ही है, लेकिन थोड़ा अलग है.
बल्कि, कहें तो अरविंद केजरीवाल की तरफ से उमर अब्दुल्ला को एक्सचेंज ऑफर मिला है - मतलब, सपोर्ट के लिए अरविंद केजरीवाल बदले में कुछ चाहते भी हैं.
अरविंद केजरीवाल के उमर अब्दुल्ला को मिले सपोर्ट का एक खास पहलू ऐसा भी है, जो कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लिए अच्छा नहीं लगता - क्योंकि उमर अब्दुल्ला को आम आदमी पार्टी का समर्थन कांग्रेस के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.
उमर अब्दुल्ला को केजरीवाल की सलाहियत
अरविंद केजरीवाल ने नेशनल कांफ्रेंस को वैसे ही सपोर्ट देने का ऐलान किया है, जैसे उमर अब्दुल्ला लोगों को लॉकडाउन में अपने अनुभव का फायदा दिलाने की बात कर रहे थे.
24 मार्च, 2020 को जब कोविड 19 के चलते लॉकडाउन लगा तो उमर अब्दुल्ला ने सोशल साइट X (पहले ट्विटर) पर मीडिया, 'घर में बंद होकर क्या करें, जानना हो तो मुझसे पूछ लीजिए… मुझे महीनों का अनुभव है.'
अरविंद केजरीवाल ने ऑफर किया है कि अगर उमर अब्दुल्ला को सरकार चलाने में कोई दिक्कत आती है तो वो उनसे सलाह ले सकते हैं. अरविंद केजरीवाल ने कहा, दिल्ली को हाफ स्टेट कहते हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री के पावर सीमित हैं… अब नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर को हाफ स्टेट बना दिया है, जहां लेफ्टिनेंट गवर्नर ताकतवर होंगे.
आम आदमी पार्टी के नेता का कहना है कि ऐसे राज्य में 10 साल तक सरकार चलाने का उन्हें अनुभव है. ऐसे में अगर उमर अब्दुल्ला को कोई मुश्किल होती है, वो उनसे सलाह ले सकते हैं.
असल में, उमर अब्दुल्ला ने ऐलान किया है कि अपनी सरकार के कैबिनेट की पहली बैठक में वो जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दिलाएंगे. ऐसा लगता है, अरविंद केजरीवाल ने इसी बात को लेकर सलाह देने की पहल की है, क्योंकि केंद्र शासित प्रदेश की कैबिनेट के प्रस्ताव पास किये जाने से तो कुछ होने से रहा, जब तक केंद्र सरकार भी उसके लिए तैयार न हो. ऐसे प्रस्ताव तो दिल्ली में भी पास किये जा चुके हैं.
देखा जाये तो, अरविंद केजरीवाल ने उमर अब्दुल्ला के सामने निर्दलीय विधायकों की ही तरह आप MLA के लिए भी दावेदारी ठोक दी है - मतलब, वो सरकार में भी शामिल होना चाहते हैं.
केजरीवाल की पहल कांग्रेस के लिए नुकसानदेह क्यों
जम्मू-कश्मीर के नतीजे हरियाणा विधानसभा चुनाव में बुरी तरह झुलस चुकी कांग्रेस के लिए मरहम का काम कर रहे थे. क्योंकि नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन को बहुमत हासिल हो गया था.
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में अपने बूते 42 सीटें हासिल करने वाले उमर अब्दुल्ला ने 4 निर्दलीयों का समर्थन हासिल करके सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत जुटा लिया है. ऐसे में कांग्रेस का समर्थन की बात तो महज औपचारिक ही है.
आम आदमी पार्टी के विधायक के साथ आ जाने से उमर अब्दुल्ला को अपनी पार्टी के अलावा 5 विधायकों का समर्थन मिल रहा है - ऐसे में भला कांग्रेस के 6 विधायक क्या मायने रखते हैं?
कांग्रेस चाहे तो चुनाव पूर्व गठबंधन के तहत समर्थन दे, और न चाहे तो वापस ले ले.
सरकार में शामिल होना चाहते हैं केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल के एक्सचेंज ऑफर में सरकार को सपोर्ट के बदले आप विधायक मेहराज मलिक के लिए भी कोई खास भूमिका देने की मांग की है.
लेकिन क्या अरविंद केजरीवाल महज इतने भर के लिए उमर अब्दुल्ला सरकार को सपोर्ट करना चाहते हैं?
दरअसल, ऐसा वो इसलिए करना चाहते हैं ताकि कह सकें कि दिल्ली और पंजाब में अपनी सरकार होने के अलावा जम्मू-कश्मीर में भी आम आदमी पार्टी की सरकार है.
अरविंद केजरीवाल कहते हैं, 'उम्मीद है कि उमर अब्दुल्ला मेहराज मलिक को अपनी सरकार में जिम्मेदारी देंगे ताकि वह सिर्फ डोडा ही नहीं बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर की सेवा कर सकें.'
साफ है अरविंद केजरीवाल के विधायक का सपोर्ट भी निर्दलीयों जैसा ही है, और कहीं न कहीं उनके मन में भी तो डर होगा ही कि कहीं पार्टी छोड़कर मेहराज मलिक खुद ही उमर अब्दुल्ला के खेमे में न चले जायें.