
27 साल बाद, दिल्ली में बीजेपी के पास बड़ा मौका आया है. दिल्ली में अपना मुख्यमंत्री चुनने का. जब इतना बड़ा मौका आया है तो देर तो होगी ही, और ये देर ही है जो आम आदमी पार्टी नेता आतिशी को बीजेपी पर हमले का भी मौका दे रही है. आतिशी कह रही हैं, दस दिन हो गये, दिल्ली में काम नहीं शुरू हो सके, क्योंकि बीजेपी मुख्यमंत्री को लेकर फैसला नहीं ले पा रही है.
बहरहाल, सूत्रों के हवाले से, शपथग्रहण की जगह और एक तारीख और समय जरूर सामने आ चुके हैं - रामलीला मैदान, 20 फरवरी, 2025… शाम 4.30 बजे.
तारीख तो नहीं, लेकिन जगह जरूर खास है और उसके जरिये बीजेपी दिल्ली वालों को नये तरीके से वही मैसेज देने की कोशिश कर रही है, जो चुनाव कैंपेन के दौरान मोदी-शाह सहित तमाम बीजेपी नेता कह चुके हैं - गरीबों के लिए चल रही कोई भी कल्याणकारी योजना बंद नहीं की जाएगी.
जाहिर है शपथ से पहले विधायकों की भी बैठक होगी, जिसमें विधायक दल का नेता यानी मुख्यमंत्री चुने जाने की रस्म निभाई जाएगी.
आतिशी को बीजेपी पर हमला बोलने का मौका भले मिल गया हो, लेकिन शपथग्रहण की तारीख तय करने में देर की एक वजह भी खास लगती है. बीजेपी के दिल्ली फतह में एक बड़ी भूमिका संघ की भी रही है, और उसी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नये मुख्यालय का दिल्ली के झंडेवालान में 19 फरवरी को उद्घाटन होना है. अब उसके लिए शपथग्रहण एक दिन बढ़ा देना तो बनता ही है.
तमाम बातों के बीच सबसे महत्वपूर्ण चीज है, दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने वाले शख्स पर पड़ने वाला दारोमदार - जो भी मुख्यमंत्री बने, उसे हर हाल में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से बड़ी लकीर खींचनी होगी.
1. रामलीला मैदान में शपथ का संदेश
अरविंद केजरीवाल दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री हैं, जिनका शपथग्रहण समारोह रामलीला मैदान में हुआ. वही रामलीला मैदान जहां 2011 में अरविंद केजरीवाल ने अन्ना हजारे को आगे रख कर भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा किया था.
और उसी रामलीला मैदान में अरविंद केजरीवाल ने 2013, 2015 और 2020 में लगातार तीन बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है.
जैसे बीजेपी दिल्ली में कल्याणकारी योजनाएं नहीं बंद करने की बात कर रही है, लगता है अरविंद केजरीवाल की तरफ से स्थापित परंपराओं को भी तोड़ना नहीं चाहती है, ताकि दिल्ली के लोगों में कोई गलत मैसेज जाये.
केजरीवाल से पहले बीजेपी के दिल्ली में तीन मुख्यमंत्री हुए हैं, मदनलाल खुराना, साहिब सिंह वर्मा और कुछ दिनों के लिए सुषमा स्वराज - और तीनो ही ने राज निवास में शपथग्रहण किया था.
2. केजरीवाल की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है
ये ठीक है कि बीजेपी से चुनावी शिकस्त मिली है, लेकिन न तो आम आदमी पार्टी खत्म नहीं हुई है, न अरविंद केजरीवाल की राजनीति. आम आदमी पार्टी को भी 22 विधानसभा सीटें मिली हैं, और निचले तबके के वोट भी.
मतलब, बीजेपी के लिए दिल्ली में केजरीवाल-चैलेंज पहले की ही तरह बरकरार है - और दिल्ली के मैदान में मजबूती से पैर जमाने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है.
3. बीजेपी के मुख्यमंत्री के लिए कांटों पर ताज तैयार है
प्रवेश वर्मा, आशीष सूद और शिखा रॉय सहित करीब आधा दर्जन नाम मार्केट में चल रहे हैं, मुख्यमंत्री पद के लिए. और वैसे ही, मंत्री पद के लिए संभावितों की सूची में कम से कम 15 विधायकों के नाम की चर्चा है.
अब मुख्यमंत्री कोई भी बने, अरविंद केजरीवाल की टक्कर का तो अभी कोई भी नेता दिल्ली बीजेपी में नहीं है. लेकिन ये भी सही है कि अगर मुख्यमंत्री चुने गये नेता में टैलेंट रहा, और अच्छी टीम मिली तो वो अरविंद केजरीवाल के मुकाबले में खड़ा भी हो सकता है.
एक बात और जो भी मुख्यमंत्री बनेगा, उसे पद के साथ कांटों भरा ताज भी विरासत में मिलने वाला है. भावी मुख्यमंत्री को बीजेपी के चुनावी वादों को पूरा तो करना ही होगा, साबित भी करना होगा कि डबल इंजन की सरकार की दिल्लीवालों को जरूरत क्यों थी?
अगर बीजेपी सरकार भी दिल्लीवालों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरी तो उसके साथ भी लोग आम आदमी पार्टी की ही तरह पेश आएंगे - क्योंकि, आने वाले चुनाव में बीजेपी के अलावा दो विकल्प तो होंगे ही. आम आदमी पार्टी और दर्जन भर सीटों पर हार जीत में निर्णायक भूमिका निभाने वाली कांग्रेस.
4. दिल्लीवालों ने मजबूत विपक्ष भी दिया है
10 साल से विपक्ष का नंबर दहाई तक भी नहीं पहुंच पा रहा था, लेकिन दिल्ली के लोगों ने इस बार विपक्ष में भी ठीक संख्या दे डाली है - और उस छोर से आवाज भी गूंजने लगी है.
आम आदमी पार्टी की तरफ से विधानसभा में विपक्ष का नेता कौन होगा अभी ये तो नहीं मालूम, लेकिन आतिशी ने सड़क पर मोर्चा तो संभाल ही लिया है.
प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर कह रही हैं, 10 दिन हो गये बीजेपी मुख्यमंत्री पद पर कोई फैसला नहीं ले पाई… प्रधानमंत्री जी को अपने 48 विधायकों में किसी पर भी भरोसा नहीं है… उन्हें पता है इन विधायकों में से एक भी विधायक सरकार चलाने की योग्यता नहीं रखता… अगर मुख्यमंत्री बनने लायक कोई नहीं है तो दिल्ली की सरकार कैसे चलाएंगे… उनके पास दिल्ली वालों के लिए कोई विजन नहीं है.
चुनाव कैंपेन के दौरान अरविंद केजरीवाल भी घूम घूम कर पूछ रहे थे, बीजेपी का दूल्हा कौन है? वैसे अब तो वो घड़ी भी आ चुकी है, जब दूल्हा के नाम का ऐलान होगा ही.
आतिशी का आरोप है, 48 विधायकों का एक ही काम है लूट-खसोट करना दिल्ली की जनता को लूटने दिल्ली के पैसे की बंदरबांट करना.
कहती हैं, दिल्ली वालों को उम्मीद थी की 9 तारीख को भारतीय जनता पार्टी अपना मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करेगी, और 10 तारीख को शपथ ग्रहण होगा… उसके बाद दिल्ली वालों का काम शुरू होगा, लेकिन दिल्ली की जनता इंतजार करती रह गई.
ये सारी चुनौतियां है, जिनमें तपकर बीजेपी के मुख्यमंत्री को खरा सोना बनना होगा - वरना, पब्लिक का क्या, कभी भी ‘खेला’ कर सकती है.