
इंडिया गठबंधन की चौथी बैठक में विपक्षी दलों के बीच राम मंदिर का मुद्दा छाया रहा. अधिकांश विपक्षी दलों को इस बात की चिंता थी कि बीजेपी इस मुद्दे का फायदा उठाने की तैयारी में है. बीजेपी को राम मंदिर का श्रेय लेने से कैसे रोका जाए. दरअसल अयोध्या में 22 जनवरी को नव निर्मित राममंदिर में राम लला के मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होनी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस समारोह में शामिल होंगे. देश भर की तमाम नामचीन हस्तियों को इस अवसर का साक्षात गवाह बनने के लिए आमंत्रित किया गया है. जाहिर है कि बीजेपी इसे सदी का सबसे बड़ा इवेंट बनाने की तैयारी में है. बीजेपी देश की जनता के बीच यह साबित करना चाहती है कि 500 वर्षों के सपने को पार्टी ने किस तरह पूरा किया है.
अब ठीक इस समारोह के समानांतर राहुल गांधी की न्याय यात्रा शुरू करने से ये संदेश जा रहा है कि राहुल गांधी राम मंदिर समारोह के बिग इवेंट के प्रभाव को कमतर बनाने के इरादे से ठीक उसी समय अपनी यात्रा शुरू करके खुद लाइम लाइट में आना चाहते हैं. तो क्या इसे कांग्रेस 2024 लोकसभा चुनावों से पहले नरेंद्र मोदी वर्सेस राहुल गांधी शो के कॉम्पटिशन में बदलना चाहती है. आइये देखते हैं कि राम मंदिर समारोह के समय ही न्याय यात्रा को शुरू करके कांग्रेस क्या हासिल कर सकती है?
1- न्याय यात्रा को क्या राम मंदिर समारोह जैसा बड़ा बना पाएगी कांग्रेस?
22 जनवरी को देश राम मंदिर के उल्लास में डूबा होगा. जाहिर है कि सभी धार्मिक कार्यक्रम एक हफ्ते पहले यानि सूर्य के उत्तरायण होते ही शुरू जाएंगे. देश ही नहीं विदेश की मीडिया भी दिन रात अयोध्या का कवरेज करने की तैयारी में है. इस बीच अगर राहुल गांधी की भारत न्याय यात्रा भी शुरू करने की तैयारी है तो इसका सीधा मतलब है कि कांग्रेस राम मंदिर समारोह को काउंटर करने की तैयारी में है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि राहुल गांधी की यात्रा को लेकर भी आम जनता में कौतूहल रहेगा. मीडिया को समय निकालकर राहुल की यात्रा को भी कवरेज देनी होगी. इसके साथ ही अगर राहुल कुछ अलग कर देते हैं तो यह भी हो सकता है कि मीडिया की मजबूरी हो जाए कि वो राहुल गांधी की यात्रा को राम मंदिर के समारोह से अधिक तवज्जो दे.
राहुल गांधी की 'मणिपुर से मुंबई' भारत न्याय यात्रा 14 जनवरी से शुरू होकर असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात सहित 14 राज्यों और 85 जिलों से होकर 6,200 किलोमीटर की यात्रा 20 मार्च 2024 को मुंबई में समाप्त होगी.
इससे पहले, भारत जोड़ो यात्रा, जो 7 सितंबर 2022 को कन्याकुमारी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में शुरू हुई थी, 3,970 किमी, 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करने और 130 दिनों से अधिक चलने के बाद 30 जनवरी 2023 को श्रीनगर में समाप्त हुई थी.
2- राम मंदिर समारोह से अलग थलग रहकर कांग्रेस अपना अस्तित्व बचा लेगी?
अभी तक की जो तस्वीर बन रही है उससे तो यही लगता है कि कांग्रेस पार्टी से कोई भी नेता अयोध्या में शामिल होने नहीं जा रहा है. मंदिर समिति की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी , पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आदि को निमंत्रण पत्र भेजा गया है. पर अभी किसी नेता की ओर से यह बयान नहीं आया है कि 22 जनवरी को अयोध्या में राम लला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लेने के लिए वह अयोध्या पहुंच रहे हैं. विपक्ष की ओर से करीब करीब यही दिख रहा है. पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी अयोध्या नहीं जाने की घोषणा कर दी है.कम्युनिस्ट पार्टियों ने भी ऐलान कर दिया है कि वे समारोह में भाग नहीं ले रहे हैं. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने जरूर यह कहा है कि अगर उन्हें न्योता मिलता है तो वो जरूर जाएंगे. पर ऐसा लगता है कि विपक्ष करीब करीब बहिष्कार करने के मूड में है.
जाहिर है कि राहुल गांधी जब उसी समय अपनी बहुप्रतिक्षित न्याय यात्रा में होंगे तो कांग्रेस भी पूरी जोर शोर से यात्रा में लगी रहेगी. राहुल अपनी यात्रा में अगर नहीं भी चाहेंगे तो राम मंदिर से संबंधित सवाल उनसे पूछे जाएंगे. हो सकता है कि राहुल गांधी ने कुछ ऐसी तैयारी की हो कि देश मंदिर समारोह को छोड़कर उन्हें ही देखने लगे. या राहुल गांधी मंदिर से संबंधित ऐसे सवाल देश के सामने उठाएं जिससे जनता का हृदय परिवर्तन हो जाए.
3- राम मंदिर समारोह से किनारा करके सॉफ्ट हिंदुत्व से छुटकारा पाने का है प्लान?
कांग्रेस भी राम मंदिर निर्माण का श्रेय लेने की कोशिश में इतिहास के पन्ने पलटती रहती है. मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस के सीएम उम्मीदवार कमलनाथ ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए इंटरव्यू में एक बार कहा था कि हमें इतिहास नहीं भूलना चाहिए. राजीव गांधी ने पहली बार राम मंदिर का ताला खुलवाया था. साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि राम मंदिर एक पार्टी और एक व्यक्ति का नहीं है. यह भारत के हर नागरिक का है. राम मंदिर को बनाने में किसी के घर का पैसा तो नहीं लगा है. यह सरकार के पैसे से बन रहा है.
हालांकि मध्यप्रदेश में कमलनाथ और कांग्रेस की सॉफ्ट हिंदुत्व पॉलिसी काम नहीं आई पर इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि कांग्रेस कभी कभी राम मंदिर और हिंदुत्व को लेकर भ्रम की स्थिति में पहुंच जाती है.राम मंदिर को लेकर प्रधानमंत्री रहते राजीव गांधी ने भी काफी कुछ किया था. 1986 में पहली बार राम मंदिर का ताला खुलवाने का श्रेय भी राजीव गांधी को ही हासिल है. राजीव गांधी ने सिर्फ ताला ही नहीं खुलवाया था, बल्कि विश्व हिंदू परिषद को शिलान्यास की अनुमति भी दी थी, और कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अपने मंत्री बूटा सिंह को भी भेजा था. हालांकि राजीव गांधी भी हिंदुत्व को लेकर हमेशा दुविधा में रहे. शाहबानो केस में उनकी गलती उस भ्रम का ही कारण थी. ये राजीव गांधी ही रहे हैं जिनके कार्यकाल में दूरदर्शन पर रामानंद सागर के रामायण सीरियल को प्रसारित कराया गया. 1989 का चुनाव करीब आने तक राजीव गांधी के भाषणों में राम राज्य लाने का वादा सुनाई देने लगा था. लेकिन जो कमलनाथ के साथ हुआ वही राजीव गांधी के साथ भी हुआ था. सॉफ्च हिंदुत्व राजीव गांधी को भी रास नहीं आया. 1989 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा. तो क्या ये माना जाए कि न्याय यात्रा के जरिए मंदिर समारोह का एनकाउंटर करके राहुल गांधी कांग्रेस को सॉफ्ट हिंदुत्व से छुटकारा दिलाने के मूड में हैं.
4- क्या हिंदुत्व को लेकर अपनी दुविधा खत्म करना चाहते हैं राहुल?
कुछ दिनों पहले यह खबर आई थी कि राहुल गांधी भी अयोध्या जाने के मूड में हैं. राहुल गांधी के अयोध्या दौरे की चर्चा शुरू हुई है राजीव गांधी फाउंडेशन के सीईओ विजय महाजन की गुपचुप यात्रा को लेकर. विजय महाजन के रामलला के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास से मुलाकात भी हो चुकी है. हालांकि इस संबंध में न तो राहुल गांधी के ऑफिस की तरफ से न ही कांग्रेस किसी ने औपचारिक तौर पर कुछ बताया है, लेकिन अयोध्या में इस बात की काफी चर्चा है.
माना जा रहा है कि 2024 के आम चुनाव से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी राम मंदिर दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं. राजीव गांधी फाउंडेशन के सीईओ विजय महाजन की अयोध्या यात्रा को लेकर 'आज तक' के सवाल पर राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास कहते हैं, 'चार पांच लोग आये थे... हम नहीं जानते कि उनके नाम क्या थे... उन्होंने पूछा था कि राहुल जी अगर दर्शन करने आते हैं तो कैसे क्या होगा.' तो क्या न्याय यात्रा राम मंदिर समारोह के समानांतर करके राहुल अब पूरी तरह अपनी दुविधा को खत्म करना चाहते हैं.
5-किसान, अडानी (भ्रष्टाचार), महिला पहलवान (महिला सुरक्षा) और मणिपुर हिंसा (कुशासन) पर है फोकस?
राहुल गांधी की यात्रा मणिपुर से शुरू हो रही है जाहिर है कि मणिपुर हिंसा को कांग्रेस बीजेपी सरकार की सबसे बड़ी असफलता के रूप में बताती रही है. मणिपुर से यात्रा शुरू करने के बारे में कांग्रेस नेता वेणुगोपाल कहते हैं कि मणिपुर के बिना हम यात्रा कैसे कर सकते हैं? हमें मणिपुर के लोगों के दर्द पर मरहम लगाने का प्रयास करना होगा.
वेणुगोपाल कहते हैं कि भारत न्याय यात्रा, नाम ही यात्रा के उद्देश्य को दर्शाता है, 'सबके लिए न्याय चाहिए. यह यात्रा युवाओं, महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले लोगों के साथ बातचीत करने जा रही है.जाहिर है कि न्याय यात्रा के दौरान राहुल गांधी अपने प्रिय विषयों जैसे अडानी और सरकार, किसानों की समस्याएं, महिला सुरक्षा जैसे विषयों पर खूब बोलेंगे. काफी कुछ हद तक अपनी भारत जोड़ो यात्रा के समय भी राहुल गांधी यही सब बोल रहे थे. तो क्या ऐसा हो सकता है कि राम मंदिर समारोह के समय ये मुद्दे उठाकर राहुल गांधी बीजेपी पर बढत हासिल कर लें ? पिछली बार की भारत जोड़ो यात्रा से राहुल गांधी के साथ साथ कांग्रेस नेताओं का आत्मविश्वास निश्चित रूप से बढ़ा था. अगर इस बार की यात्रा में भी राहुल गांधी वही कॉन्फिडेंस दिखाते हैं तो राम मंदिर समारोह को भले ही फीका न कर सकें पर अपनी यात्रा को मोदी बनाम राहुल के शो में जरूर बदल सकेंगे.