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चंडीगढ़ में BJP की हार से केजरीवाल और कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में क्‍या हासिल होगा?

चंडीगढ़ मेयर चुनाव में AAP की जीत से अरविंद केजरीवाल का जोश हाई होना स्वाभाविक है. अच्छी बात ये है कि जोश में होश गंवा बैठने जैसे लक्षण अभी नहीं दिखे हैं, और कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन के फाइनल स्टेज में होने की बात कह रहे हैं - कांग्रेस के लिए भी हाल फिलहाल ये बड़ी राहत है.

अरविंद केजरीवाल ने बोल दिया है कांग्रेस के साथ गठबंधन हो कर रहेगा अरविंद केजरीवाल ने बोल दिया है कांग्रेस के साथ गठबंधन हो कर रहेगा
मृगांक शेखर
  • नई दिल्ली,
  • 21 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 4:41 PM IST

दिल्ली की तरह ही चंडीगढ़ में भी अब आम आदमी पार्टी का मेयर हो गया है. मुद्दे की कॉमन बात ये है कि दोनों ही शहरों में अरविंद केजरीवाल के नेताओं ने बीजेपी को शिकस्त दी है. मुश्किल तो आम आदमी पार्टी के लिए दिल्ली के मेयर की कुर्सी हासिल करना भी रही, लेकिन चंडीगढ़ में सुप्रीम कोर्ट से मदद नहीं मिलती तो माथा पीटते रहने के अलावा कोई उपाय नहीं बचा था. 

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अव्वल तो ऐसी चीजें नेतृत्व का हौसला बढ़ा देती हैं, ऐसा कई बार देखा गया है. अच्छी बात है कि अरविंद केजरीवाल की तरफ से ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया है. बल्कि, कांग्रेस के साथ गठबंधन के मामले में अरविंद केजरीवाल ने साथी नेताओं से बड़ा दिल दिखाया है. हौसला बढ़ते ही होश गंवाने जैसे लक्षण तो कांग्रेस नेतृत्व में अक्सर देखी गई हैं. 2019 के लोक सभा चुनाव से पहले भी राहुल गांधी ऐसे ही संघर्ष कर रहे थे, लेकिन तब इतने आग बबूला नहीं हुआ करते थे - लेकिन 2018 के विधानसभा चुनावों के बाद राहुल गांधी तीन राज्यों में सरकार बन गई तो जैसे विपक्षी दलों के नेताओं को भाव ही नहीं दे रहे थे. 

2019 में भी अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन की काफी कोशिशें की थी, लेकिन बात नहीं बन सकी. राहुल गांधी का रवैया तो तब भी ऐसा ही था, जैसा अभी है लेकिन गठबंधन न होने के पीछे बड़ी वजह दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित रहीं.

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अब अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी के गठबंधन के मुद्दे पर आगे बढ़ने के कई कारण लगते हैं. पहला कारण तो विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ही है - गौर करने वाली बात ये है कि चंडीगढ़ चुनाव में सिर्फ अरविंद केजरीवाल नहीं बल्कि INDIA ब्लॉक की जीत हुई है. 

ये बात अरविंद केजरीवाल ने भी कही है कि चंडीगढ़ की जीत INDIA ब्लॉक की जीत है, और शुरू में AAP नेता राघव चड्ढा ने भी कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर ऐसी ही बात कही थी - और थोड़े कानूनी संघर्ष के बाद जीत की वो बात हकीकत भी बन गई है. 

लिहाजा अरविंद केजरीवाल बगैर किसी हीलाहवाली के कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग पर सहमति बनाकर गठबंधन फाइनल करने में जुट गये हैं - अब तो राहुल गांधी ही नहीं, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव जैसे नेताओं को भी INDIA ब्लॉक की अहमियत समझ में आने लगी होगी. 

केजरीवाल पक्का करेंगे कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन

कांग्रेस के साथ अरविंद केजरीवाल के गठबंधन के लिए तैयार होने की बड़ी वजह तो चंडीगढ़ मेयर चुनाव का नतीजा ही है, लेकिन ये पहल थोड़ा पहले ही शुरू हो चुकी थी, जब दिल्ली के मुख्यमंत्री कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी के आवास पर लंच कार्यक्रम में पहुंचे थे. वहां अभिषेक मनु सिंघवी को अरविंद केजरीवाल ने संकटमोचन भी बताया था. 

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लंच के बाद ही खबर आई थी कि अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत अभी बंद नहीं हुई है, और गठबंधन फाइनल करने की कोशिशें सही दिशा में चल रही हैं. चंडीगढ़ मेयर चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद तो अरविंद केजरीवाल उसी बात को दोहरा रहे थे, लेकिन गठबंधन को लेकर ज्यादा गंभीरता नजर आ रही थी.

असल में कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर संदेह तब होने लगा था जब AAP नेता संदीप पाठक ने अचानक एक दिन कांग्रेस के लिए सिर्फ एक सीट छोड़ने की घोषणा कर दी, और शर्त ये कि अगर कांग्रेस ने देर की तो उनकी पार्टी दिल्ली की सभी सात सीटों पर अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर देगी. 

लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि AAP और कांग्रेस के बीच ये गठबंधन सिर्फ दिल्ली में हो रहा है, पंजाब में नहीं. जैसे 2019 में राहुल गांधी राज्यों के नेताओं पर गठबंधन के लिए तैयार नहीं होने का बहाना बना लेते थे, लगता है इस बार केजरीवाल भी इस मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का नाम लेकर अपनी चाल चल रहे हैं. 

प्रेस कांफ्रेंस में जब अरविंद केजरीवाल से पूछा गया - क्या लोकसभा चुनाव के लिए पंजाब में सीट शेयरिंग को लेकर दोबारा विचार करेंगे?

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अरविंद केजरीवाल ने सीधे सीधे ना ही कर दिया, चुनाव जीतने की एक स्ट्रेटजी है... चिंता मत करो, जीतेंगे.

बीजेपी के लिए कैसा रहेगा केजरीवाल और कांग्रेस का साथ होना

आम आदमी पार्टी के एक विधायक ने अभिषेक मनु सिंघवी के लंच का एक वीडियो सोशल साइट एक्स पर पोस्ट किया है, जिसमें अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे साथ साथ बैठे हैं. और अरविंद केजरीवाल मनी लॉन्ड्रिंग कानून के बहाने बीजेपी पर निशाना साध रहे हैं. कह रहे हैं कि अगर PMLA का सेक्शन 45 उड़ा दें तो देख लीजिएगा शाम तक शायद शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे अलग पार्टी बना लेंगे. 

अरविंद केजरीवाल कांग्रेस नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी के आवास पर आयोजित लंच कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे. आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली से विधायक संजीव झा ने इसी लंच कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया X पर पोस्ट किया है. इस वीडियो में अरविंद केजरीवाल के बगल में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी बैठे नजर आ रहे हैं. वीडियो में बातचीत करते हुए अरविंद केजरीवाल पीएमएलए एक्ट पर सवाल खड़े करते हुए भाजपा पर निशाना साध रहे हैं.
वीडियो में केजरीवाल कह रहे हैं, 'PMLA की धारा 45 को हटा दीजिये तो जो तांता बीजेपी की तरफ लगा हुआ है, खत्म हो जाएगा... कोई बीजेपी ज्वाइन नहीं करेगा.' और, 'आज बीजेपी के जो अपने नेता हैं, देख लीजिएगा शाम तक शायद शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे अपनी अलग पार्टी बना लेंगे.' सेक्शन 45 के तहत ईडी को अधिकार है कि वो बिना किसी वारंट के किसी भी आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है.

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चंडीगढ़ मेयर चुनाव में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रेस कांफ्रेंस में अरविंद केजरीवाल कह रहे थे, INDIA ब्लॉक की ये बहुत बड़ी, और पहली जीत है... ये बहुत बड़े मायने रखती है... एक तरह से उन लोगों से हम ये जीत छीनकर लाए हैं.

साथ ही अरविंद केजरीवाल ने चंडीगढ़ की जीत का मैसेज भी शेयर किया, चंडीगढ़ में INDIA ब्लॉक के चुनाव ने बड़ा संदेश दिया है... अगर स्ट्रैटेजी से काम करें... और संगठित हो जायें तो बीजेपी को हराया जा सकता है.

असल में यही वो कॉज है जिसके बिनाह पर INDIA ब्लॉक की नींव पड़ी, हालांकि इमारत खड़ी न हो पाने के बहुतेरे कारण हैं. फिलहाल तो ऐसा लग रहा है जैसे चंडीगढ़ का मैसेज यूपी तक पहुंच रहा है, और वहां भी अखिलेश यादव कांग्रेस के साथ गठबंधन की बातें अरविंद केजरीवाल की तरह ही करने लगे हैं.

ये तो है ही की ताली एक हाथ से नहीं बजती. अगर अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव बड़ा दिल दिखा रहे हैं तो राहुल गांधी भी थोड़े नरम पड़े होंगे, लेकिन फील्ड में राहुल गांधी के तेवर अभी आसमान छू रहे हैं. जिस किसी का भी ख्याल आ रहा है, खूब खरी खोटी सुना रहे हैं. खूब जोर जोर से मन की बात कर रहे हैं - पूरी न्याय यात्रा में तो ऐसा ही देखने को मिल रहा है. 

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अरविंद केजरीवाल से प्रेस कांफ्रेंस में एक सवाल ये भी पूछा गया कि INDIA ब्लॉक छोड़कर जा चुके नेताओं की क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वापस आने की उम्मीद है? 

अरविंद केजरीवाल ने थोड़े गंभीर अंदाज मेंकहा, जो लोग देश को बचाना चाहते हैं, उनका INDIA ब्लॉक में स्वागत है - क्या संदेशखाली विवाद के बाद ममता बनर्जी की तरफ से भी कोई संदेश आने वाला है?

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