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केरल में CAA के विरोध पर फंसी कांग्रेस, इसी कानून ने राहुल के लिए वायनाड को बनाया मुश्किल

केरल में कांग्रेस को समझ में नहीं आ रहा कि सीएए का विरोध करें या चुपचाप बैठ जाएं? कांग्रेस के लिए एक तरफ कुंआ है तो दूसरी तरफ खाई. सीएए के विरोध पर चुप बैठती है तो मुस्लिम वोट के वामपंथियों के पास जाने का डर है. खुलकर विरोध करने पर अब तक मिल रहे हिंदू वोटों के बीजेपी के पास जाने का खतरा है.

राहुल गांधी की सीएए पर चुप्पी क्या वायनाड में महंगी पड़ेगी राहुल गांधी की सीएए पर चुप्पी क्या वायनाड में महंगी पड़ेगी
संयम श्रीवास्तव
  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 6:58 PM IST

देश में सीएए का सबसे तीव्र विरोध तो दिल्ली के सीएम और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल कर रहे हैं पर असल विरोध केरल और पश्चिम बंगाल में हो रहा है. बंगाल में तो यह पिछले चुनावों में ही मुद्दा बन गया था. जब बीजेपी ने मतुआ और राजवंशी समुदाय को नागरिकता दिलाने का वादा 2019 लोकसभा चुनाव में कर दिया था. पर केरल में ऐसा कुछ नहीं था. इसके बावजूद केरल की CPI (M) इसे चुनावी मुद्दा बना रही है. मतलब साफ है कि केरल में बीजेपी को माइलेज मिलना तय है. सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) कानून के विरोध में पिछले सप्ताह से रात में मार्च निकाल रही है. केरल में सीएए के दायरे में आने वाले नहीं के बराबर हैं पर वामपंथी इस मुद्दे पर लामबंद हो गए हैं. बीजेपी के लिए यह जहां खुशी की बात है वही कांग्रेस के माथे पर चिंता की लकीरें हैं. कांग्रेस पार्टी को जैसे सांप सूंघ गया है, उसे यह समझ में नहीं आ रहा है कि सीएए का विरोध करें या चुपचाप बैठ जाएं? कांग्रेस के लिए एक तरफ कुंआ है तो दूसरी तरफ खाई. सीएए के विरोध पर चुप बैठती है तो मुस्लिम वोट के वामपंथियों के पास जाने का डर है तो खुलकर विरोध करने पर अब तक मिल रहे हिंदू वोटों के खिसकने का खतरा है. आखिर केरल की राजनीति मे सीएए को लेकर क्या चल रहा है, आइये समझते हैं.

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सीपीआई एम क्यों बना रही सीएए को मुद्दा

केरल की वामपंथी सरकार ने सीएए कानून के अमल को चुनौती देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है. केरल सरकार ने सीएए नियमों को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि धर्म और देश के आधार पर वर्गीकरण भेदभावपूर्ण, मनमाना, अतार्किक और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन है. इतना ही नहीं सीपीआई (एम) ने संविधान संरक्षण समिति के बैनर तले 22 मार्च को कोझिकोड में एक रैली की भी योजना बनाई है. मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन रैली को संबोधित करेंगे और आने वाले हफ्तों में मुस्लिम बहुल उत्तरी केरल के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. यही नहीं केरल सरकार एक कदम और आगे बढ़ते हुए पिछले हफ्ते 2019 के सीएए विरोध प्रदर्शन के संबंध में दर्ज सभी मामलों को वापस लेने के अपने फैसले की घोषणा की है. दर्ज किए गए 835 मामलों में से लगभग 500 मुकदमे सुनवाई की प्रक्रिया में थे. जाहिर है कि सीएए लोकसभा चुनावों में मुद्दा बनाकर सीपीआई एम बड़े लाभ की तैयारी में है. 

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क्या है कांग्रेस की दुविधा

दिलचस्प बात यह है कि सीएए के खिलाफ विरोध का सीधा असर कांग्रेस पर पड़ रहा है, न कि भाजपा पर. कांग्रेस और सीपीआई एम दोनों पार्टियां राष्ट्रीय गठबंधन (इंडिया) का हिस्सा हैं और पश्चिम बंगाल में सीट-बंटवारे की बातचीत में शामिल हैं. लेकिन केरल में, वे एक-दूसरे के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी हैं और कोई रियायत देने को तैयार नहीं है. केरल के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीपीआई (एम) का दांव यह है कि सीएए को सामने रखने से उसे अपने खिलाफ शासन पर कांग्रेस के हमलों को रोकने और सत्ता विरोधी लहर का मुकाबला करने में मदद मिल सकती है. लेकिन कांग्रेस दुविधा में फंस गई है. क्योंकि अब तक केरल में वामपंथियों के बीच में हिंदू पार्टी का तमगा कांग्रेस के नाम रहा है. कांग्रेस को डर है कि सीएए के खिलाफ वामपंथियों के साथ जुड़ने से राज्य में उसके हिंदू वोट बैंक में सेंध लग सकती है. जाहिर है कि इसका सीधा फायदा भाजपा को होगा. कांग्रेस को यह भी डर है कि वामपंथियों की तरह सीएए के खिलाफ मजबूत रुख नहीं अपनाने से मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव सीपीआई एम की ओर हो जाएगा.

राहुल की सीट भी खतरे में

राहुल वायनाड से एक बार फिर से चुनाव लड़ रहे हैं. राहुल गांधी के लिए वायनाड़ केवल इसी लिए सेफ सीट है क्योंकि यहां अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं की संख्या हिंदुओं से अधिक बताई जाती है. वायना़ड में हिंदू और मुस्लिम दोनों ही करीब 40 से 45 प्रतिशत के करीब हैं. इसके साथ ही ईसाई आबादी भी 15 प्रतिशत है. यही कारण है राहुल गांधी के लिए वायनाड देश में सबसे सुरक्षित सीट बन गई है. पर जिस तरह सीपीआई यहां अपना चुनाव अभियान चला रही है उससे तो यही लगता है कि कहीं वायनाड में उल्टी हवा न बहने लगे. इंडियन एक्सप्रेस ने अपने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि सीपीआई (एम) के इस बार शुरुआत से ही पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साध रखा है. सीपीआई एम अपने चुनाव अभियान में लगातार सीएए पर ठंढा रुख अपनाने के लिए कांग्रेस पर निशाना साध रही है. सीपीआई की एनी राजा राहुल वायनाड में राहुल गांधी की मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं . सीपीआई एम की पहले से ही योजना थी कि इस बार राहुल गांधी को सीएए के मुद्दे पर घेरना है. 

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विजयन राहुल और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए वायनाड में कहते हैं कि जब पांच साल पहले संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक पर चर्चा हुई थी तो केरल से असहमति की तेज़ आवाज़ केवल एलडीएफ की थी. बाकी 19 यूडीएफ सदस्य क्यों चुप थे, क्या राहुल ने कुछ कहा? विजयन सवाल उठाते हैं कि इस संबंध में कांग्रेस और भाजपा के रुख में क्या अंतर है? 

विजयन सीएए को लेकर कांग्रेस पर लगातार हमलावर हैं. वो कहते हैं कि विधेयक को संसद की मंजूरी मिलने के कुछ सप्ताह बाद केरल विधानसभा सीएए विरोधी प्रस्ताव पारित करती है.क्या कांग्रेस ने मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों पर शासन करते हुए ऐसा कहा?  सीएम विजयन बैक-टू-बैक आरोप लगाते हैं उन्होंने पूछा, 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा सीएए पर चुप क्यों रही? क्या ये वामपंथी दल नहीं थे जो दिल्ली दंगों के दौरान पीड़ितों के साथ खड़े थे? जाहिर है कि कांग्रेस के पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं है. क्योंकि वो जवाब देना ही नहीं चाहती है.

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