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कांग्रेस के 2 नेता और 2 बयान, इसलिए आतंकवाद के प्रति सॉफ्ट दिखने लगती है पार्टी

कांग्रेस पार्टी शुरू से ही एक राष्ट्रवादी पार्टी रही है. पर इधर चुनावों के दौरान उनके नेताओं के बयान इस तरह के आते हैं जिससे लगता है कि आतंकवाद को लेकर उसका रुख नरम है. इसका नुकसान पार्टी को भुगतना पड़ता है. पार्टी ऐसे लोगों के साथ सख्ती क्यों नहीं करती.

आतंकवाद के प्रति नरम रुख वाली छवि क्यों बन जाती है कांग्रेस की आतंकवाद के प्रति नरम रुख वाली छवि क्यों बन जाती है कांग्रेस की
संयम श्रीवास्तव
  • नई दिल्ली,
  • 07 मई 2024,
  • अपडेटेड 12:33 PM IST

चुनाव के दौरान विरोधी दलों के बीच आपस में जहरीले बयानों का आदान प्रदान होता रहता है. घनघोर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता है. निःसंदेह, इसमें से अधिकांश अपने चुनाव अभियान को जनता तक पहुंचने के लिए होता है. ऐसे समय में जब घनघोर राष्ट्रवाद का दौर चल रहा हो एक राष्ट्रवादी पार्टी जब ऐसी गलती करती है जो उसकी छवि नहीं है तो निश्चित तौर पर उसके चुनावी अभियान के लिए वो नेगेटिव बन जाता है. जी हां हम बात कर रहे हैं पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य चरणजीत सिंह चन्नी के बैक-टू-बैक बयान की और महाराष्ट्र में विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार की.इन दोनों नेताओं ने मिलकर कांग्रेस के लिए जो मुश्किलें खड़ी कर दी है उसका नतीजा है कि पार्टी के बड़े नेताओं को लगातार माफी मांगनी पड़ रही है. 

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चन्नी ने एयर फोर्स पर आतंकवादी हमले के बारे में जो बोला उससे कांग्रेस को कितना फायदा

रविवार को, चन्नी ने पुंछ में आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले - जिसमें भारतीय वायु सेना के एक कॉर्पोरल की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए - को एक फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन बता दिया.  उन्होंने यह भी कह दिया कि यह बीजेपी को जिताने का एक स्टंट है, इसमें कोई सच्चाई नहीं है. लोगों को मरवाना और उनके शवों पर राजनीति करना भाजपा का काम है. चन्नी कुछ और कह रहे हैं, पर उनके सबसे बड़े नेता राहुल गांधी ने हमले को दुखद और शर्मनाक बताया. लेकिन भाजपा को तो कांग्रेस को आतंकवाद के खिलाफ सॉफ्ट एप्रोच का बहाना मिल गया.पार्टी ने चन्नी पर सैन्य कर्मियों के बलिदान का अपमान करने का आरोप लगाया और कांग्रेस नेतृत्व से माफी की मांग की. अब होना ये चाहिए था कि चन्नी को अपने नेता के विचार को देखते हुए अपने टोन डाउन कर लेना चाहिए था पर हुआ उल्टा, चन्नी एक दिन बाद दोगुने वेग से हमलावर हो गए. चन्नी ने सैनिकों की तो प्रशंसा की पर उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर राजनीतिक कारणों से 2019 के पुलवामा हमल जिसमें 40 सैनिक मारे गए - की जांच के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का भी आरोप लगाया.

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एक स्वस्थ लोकतंत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहस होती रहनी चाहिए और राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टियों के बीच विवाद भी होना चाहिए. सैन्य कर्मियों की सुरक्षा और देश की सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बहस सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए. सबसे बड़ी बात यह है कि कांग्रेस ही नहीं जो भी पार्टी इस तरह की बहसबाजी करती है उसका नुकसान हमेशा तय होता है. हालांकि इसके लिए सत्तारूढ़ एनडीए भी जिम्मेदार है. जो अक्सर अपने सैन्य अभियानों को राजनीतिक मंच पर चुनावी लाभ हासिल करने के लिए इस्तेमाल करती रही है. यह एक स्वस्थ परंपरा नहीं है.इस तरह के दावे ही विपक्ष को मौका देते हैं कि वह छिद्रान्वेषण करें . जो आगे चलकर देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा होने का काम करता है.

अब देखते हैं कि चन्नी के इस तरह के बयान से कांग्रेस को कितना फायदा हो सकता है. अगर फायदा नहीं होगा तो फिर चन्नी ने ये बयान ही क्यों दिया ? क्या कांग्रेस इस बयान के लिए चन्नी को दंडित करेगी? जाहिर है कि जब बीजेपी चन्नी के इस बयान को मुद्दा बनाएगी. पंजाब और हरियाणा में बहुतायत लोग सेना में हैं, उनकी भावनाओं को आहत करके क्या कांग्रेस आम चुनावों में पार्टी के हित में काम कर रही है?

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'हेमंत करकरे को कसाब ने नहीं मारा'

महाराष्ट्र विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता पूर्व मंत्री और ब्रह्मपुरी विधायक वडेट्टीवार ने  शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा, हेमंत करकरे की मौत अजमल कसाब जैसे आतंकवादियों की गोलियों से नहीं, बल्कि आरएसएस के करीबी पुलिसकर्मी द्वारा की गई थी. उज्ज्वल निकम, जो विशेष सरकारी वकील के रूप में पेश हुए थे, वह गद्दार है जिसने इस बात को छुपाया और बीजेपी ने उसके जैसे गद्दार को चुनाव का टिकट दिया है.

उज्जवल निकम मुंबई को उत्तर मध्य सीट से भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है. हालांकि, रविवार को जब वडेट्टीवार से कोल्हापुर में उनके बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'मैंने जो कहा है वह पूर्व पुलिस अधिकारी एस एम मुशरिफ की किताब में लिखा है'

बाद में पुणे में, वडेट्टीवार ने निकम पर अपना हमला जारी रखा और पूर्व पुलिस अधिकारी मीरान बोरवंकर की एक किताब के अंशों पर प्रकाश डाला. इस किताब में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कसाब को कभी भी बिरयानी की पेशकश नहीं की गई थी. इसका मतलब यह भी है कि सरकारी वकील होने के बावजूद निकम ने जानबूझकर कांग्रेस और राकांपा की राज्य सरकार को बदनाम करने के लिए झूठ बोला.

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हालांकि कांग्रेस नेता को यह बात पता थी कि उनकी इन बातों को उनकी सहयोगी पार्टी उद्धव शिव सेना और खुद कांग्रेस पार्टी की उम्मीदवार सहमत नहीं है पर वडेट्टीवार ने अपना हमला जारी रखा. बीजेपी को यहां भी मौका मिला. भाजपा ने कांग्रेस पर हमला करते हुए दावा किया कि वह पाकिस्तान की भाषा का उपयोग कर रही है. पाकिस्तान का कहना है कि कसाब ने भारतीय पुलिस अधिकारियों की हत्या नहीं की थी. क्या कांग्रेस इस पर पाकिस्तान का समर्थन कर रही है? मुंबई भाजपा प्रमुख आशीष शेलार ने पूछा. बीजेपी ने सीईसी को दी अपनी शिकायत में कहा कि वडेट्टीवार को माफी मांगनी चाहिए और उन्हें चुनाव प्रचार करने से रोका जाना चाहिए. उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और इस मनगढंत कहानी के प्रचार में कांग्रेस की भूमिका की जांच करने की भी मांग की गई.

महाराष्ट्र विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार के हेमंत करकरे को लेकर किए गए दावे पर विवाद जारी है.बीजेपी हर हाल में इस मुद्दे को जीवित रखना चाहेगी.पर सवाल ये उठता है कि कांग्रेस में लगातार इस तरह के मुद्दे को हवा ही क्यों दी जाती है. कांग्रेस के बहुत से नेताओं ने इस मुद्दे को दबाना चाहा और इस तरह के विवाद से बचने की कोशिश की पर पार्टी को लगता है इसकी चिंता ही नहीं. जब उज्जवल निकम के खिलाफ कांग्रेस का कैंडिडेट खुद इस विवाद में नहीं पड़ना चाहता तो कांग्रेस के बड़े नेता क्यों इस विवाद को बनाए रखना चाहते हैं. महाराष्ट्र में कांग्रेस की सहयोगी पार्टी उद्धव ठाकरे की शिवसेना को बात समझ में आ रही है पर कांग्रेस के बड़े नेता शशि थरूर को नहीं.शिवसेना (यूबी) के नेता संजय राउत ने कहा कि हेमंत करकरे हमारे लिए शहीद ही रहेंगे तो कांग्रेस नेता शशि थरुर ने कहा कि अगर किसी भी तरह का संदेह है तो जांच होनी चाहिए. 

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बीजेपी को इन दोनों घटनाओं के बहाने पुरानी बातें दुहराने का मौका मिल गया

जब देश में पिछले कई चुनावों में मंहगाई-बेरोजगारी आदि मुद्दे गायब हैं और पूरा चुनाव राष्ट्रवाद के मुद्दे पर लडा जा रहा तो कांग्रेस नेता ऐसी गलतियां क्यों करते हैं यह समझ में नहीं आता है. दिग्विजय सिंह आतंकवादियों के प्रति अपने रुख को लेकर पार्टी में बदनाम रहे हैं. फिर भी पार्टी ने उनको टिकट दिया है. दिग्विजय के नाम दुनिया के कुख्यात आतंकवादियों के नाम के आगे जी लगाकर सम्मान देने का आरोप लगता रहा है. दिग्विजय सिंह ने बाटला हाउस एनकाउंटर पर सवाल उठाए थे. बाद में एक कांग्रेस नेता ने कहा था कि इस एनकाउंटर के बाद सोनिया गांधी रो पड़ी थीं.पीएफआई पर उनके रुख से लोग वाकिफ हैं हालांकि वो आजकल इसके लिए माफी मांगते फिर रहे हैं.मनमोहन सिंह के घर कश्मीरी आतंकवादी की दावत और अफजल गुरु के ल़ड़ाई लडने वाले कांग्रेसी नेता ने पार्टी की खूब भद पिटाई है. बीजेपी हर चुनावों में इन गड़े मुर्दों को उखाड़ती रही है. पार्टी को चन्नी और वडेट्टीवार के बयानों से एक बढिया मौक मिल गया है.

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