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तलाक या संबंध विच्छेद को शालीनता से संभालना

शरीर में एक चीज ऋणानुबंध होती है, एक खास तरह की भौतिक स्मृति. अस्तित्व में सारे पदार्थों में स्मृति होती है. आनुवंशिकता बस एक याद्दाश्त है; आपका शरीर अभी भी सक्रियता से याद रखता है कि लाखों साल पहले क्या हुआ था. आपके मन की याद्दाश्त आपके शरीर की याद्दाश्त की तुलना में जरा सी है. अगर आप किसी को या किसी चीज को बस एक बार छूते हैं, मन उसे भूल सकता है, लेकिन शरीर में, यह हमेशा के लिए दर्ज हो जाती है.

सद्गुरु का कॉलम. सद्गुरु का कॉलम.
सद्गुरु
  • नई दिल्ली,
  • 21 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 9:07 AM IST

आप अपने जीवन में कई तरह के रिश्ते रखते हैं. पड़ोसी, मित्र, पत्नी, पति, बच्चे, माता-पिता, भाई-बहन, प्रेमी, और एक-दूसरे से घृणा करने वाले लोग - हर चीज एक रिश्ता है. इंसान को आखिरकार किसी रिश्ते की जरूरत ही क्यों है? रिश्ते की प्रकृति चाहे जो भी हो, उसका बुनियादी पहलू यह है कि आपकी एक जरूरत है जिसे पूरा या तृप्त करना होता है. जरूरत किसी भी तरह की हो सकती है - शारीरिक, मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, या कोई दूसरी.

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हमारे जीवन में जो विभिन्न प्रकार के रिश्ते हैं उनमें कुछ खास रिश्ते दूसरे रिश्तों की अपेक्षा हमें ज्यादा गहराई से बांधते हैं, क्योंकि वो बस भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सहारे से आगे तक जाते हैं.

शरीर में एक चीज ऋणानुबंध होती है, एक खास तरह की भौतिक स्मृति. अस्तित्व में सारे पदार्थों में स्मृति होती है. आनुवंशिकता बस एक याद्दाश्त है; आपका शरीर अभी भी सक्रियता से याद रखता है कि लाखों साल पहले क्या हुआ था. आपके मन की याद्दाश्त आपके शरीर की याद्दाश्त की तुलना में जरा सी है. अगर आप किसी को या किसी चीज को बस एक बार छूते हैं, मन उसे भूल सकता है, लेकिन शरीर में, यह हमेशा के लिए दर्ज हो जाती है. योग संस्कृति में, इस भौतिक याद्दाश्त को ऋणानुबंध कहते हैं.

आपको कई तरीकों से ऋणानुबंध मिल जाता है, लेकिन याद्दाश्त की मात्रा के संदर्भ में, यौन संबंधों का सबसे ज्यादा असर होता है. जब आप जीवनसाथी या साथी कहते हैं, तो आपके बीच एक खास मात्रा में शारीरिक स्मृति बन चुकी होती है. जब दो लोग अपनी भावनाएं, शरीर, संवेदनाएं, और रहने की जगह साझा करते हैं, तो दो स्मृतियां कई तरीकों से घुलमिल जाती हैं तो जब आप उनसे अलग होते हैं, तो इस स्मृति को चीरकर अलग करना लगभग खुद को चीरकर अलग करना है. हालांकि आप ऐसे मुकाम पर पहुंचे हो सकते हों, जहां आप उस इंसान को और नहीं झेल सकते, फिर भी यह तकलीफ देता है क्योंकि आप स्मृति को चीरने की कोशिश कर रहे हैं.

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'प्राथमिकता बदलकर स्मृति से बना सकते हैं दूरी'

अगर स्मृति बस आपके मन में ही बनी हुई है, तो आप कुछ दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं को बदलकर इससे दूरी बना सकते हैं. लेकिन अगर यह आपके शरीर में बरकरार रहती है तो आपके भीतर एक खास उथल-पुथल मच जाती है जो आपसे परे होती है. भले ही आप ऐसा करने के लिए मानसिक और मनोवैज्ञानिक रूप से लैस हों, फिर भी आप देखेंगे कि पूरा सिस्टम निश्चित रूप से एक खास स्तर की पीड़ा से गुजरेगा.

अधिकांश लोग सोचते हैं कि इस तरह के अलगाव को संभालने का सबसे अच्छा तरीका तुरंत उसी तरह के दूसरे रिश्ते में कूदना है. नहीं, ऐसा करके आप सिस्टम के भीतर और ज्यादा संघर्ष और उथल-पुथल पैदा करेंगे. यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि शरीर के पास स्मृति को क्षय करने और उसे एक निश्चित दूरी पर रखने के लिए पर्याप्त समय हो. वरना, आप खुद को एक ऐसे स्थान पर पहुंचा देंगे जहां खुद को शांतिपूर्ण और आनंदमय बनाना आपके जीवन में एक बेहद कठिन काम बन जाएगा तो इस प्रक्रिया को शालीनतापूर्वक संचालित करना महत्वपूर्ण है.

'उस रास्ते पर मत जाइए'

ऐसे समय में प्रतिशोध लेना या किसी को दंडित करने के बारे में सोचना आपके जीवन को रूपांतरित करने वाला नहीं है. शुरुआत में, इससे आपको थोड़ी संतुष्टि मिलती है, लेकिन कुछ समय बाद जब आप पीछे मुड़कर देखेंगे तो आपको खुद पर शर्मिंदगी महसूस होगी तो उस रास्ते पर मत जाइए. यह आपके लिए यह देखने का अवसर है, "मेरे जीवन की प्रकृति क्या है? यह इतना अधूरा क्यों लगता है कि इसे भरने के लिए किसी दूसरे इंसान की जरूरत होती है?"

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कोई आपको धोखा दे सकता है, भाग सकता है, तलाक दे सकता है या मर सकता है. वे इसे कैसे करते हैं वह समस्या नहीं है, लेकिन मुख्य रूप से, आपको लगता है कि आपको किसी चीज से वंचित कर दिया गया है. आपको वंचित सिर्फ इसलिए किया जा सकता है क्योंकि आप यह विश्वास करने की एक खास भ्रामक स्थिति में हैं कि यह जीवन आधा है और इसे कहीं से एक दूसरे आधे जीवन की जरूरत है. योग का एक पहलू अपनी ऊर्जा को इस तरह स्थापित करना है कि अगर आप यहां बैठते हैं, तो आप अपनी ही प्रकृति से पूर्ण हों - आपको पूर्ण बनाने के लिए किसी की या किसी चीज की जरूरत ना हो. अगर आप मिलते-जुलते हैं तो वह एक योगदान हो, ना कि खुद को तृप्त करने की चाहत. अगर आप एक संपूर्ण जीवन के रूप में खिलते हैं तो रिश्ते पूरी तरह से अलग प्रकृति के होंगे.

 

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