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प्रियंका गांधी पर सिंधिया की टिप्पणी तो आ गयी - राहुल गांधी के बारे में क्या ख्याल है?

प्रियंका गांधी के बयान के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी प्रतिक्रिया में कांग्रेस महासचिव को पार्ट टाइम नेता बताया है. राहुल गांधी के बारे में अब तक बीजेपी की यही राय रही है, क्या सिंधिया BJP के नजरिये में किसी तरह के बदलाव का संकेत दे रहे हैं?

ज्योतिरादित्य सिंधिया की नजर में अगर प्रियंका गांधी पार्ट टाइम नेता हैं, तो राहुल गांधी क्या हैं? ज्योतिरादित्य सिंधिया की नजर में अगर प्रियंका गांधी पार्ट टाइम नेता हैं, तो राहुल गांधी क्या हैं?
मृगांक शेखर
  • नई दिल्ली,
  • 16 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 7:30 PM IST

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने राजनीतिक जीवन का लंबा हिस्सा कांग्रेस में बिताया है. बीजेपी में आये तो अभी महज तीन साल ही हुए हैं. उनके पिता माधव राव सिंधिया जरूर कांग्रेसी रहे, लेकिन दादी विजयराजे सिंधिया भाजपाई रहीं, और दोनों बुआ भी बीजेपी में ही हैं. यशोधरा राजे ने तो मध्य प्रदेश की चुनावी राजनीति को करीब करीब अलविदा भी कह दिया है, लेकिन वसुंधरा राजे अब भी राजस्थान में मुख्यमंत्री पद की दावेदार बनी हुई हैं.

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सिंधिया, राहुल गांधी के कॉलेज के दोस्त रहे हैं, और 2019 के लोक सभा चुनाव में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ काम भी किया है. वो कांग्रेस की अगुवाई वाली मनमोहन सिंह सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं. 2020 में मध्य प्रदेश में बगावत कर सिंधिया ने कमलनाथ की सरकार गिरा दी थी, लेकिन काफी दिनों तक वो कांग्रेस नेताओं के खिलाफ सीधे सीधे कुछ बोलने से परहेज करते देखे जाते रहे. 

कांग्रेस के खिलाफ जब सिंधिया ने बोलना शुरू किया तो कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पर सिर्फ हल्के फुल्के हमले बोल कर चुप हो जाते रहे. धीरे धीरे वो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को भी कठघरे में खड़ा करने लगे, लेकिन मध्य प्रदेश के चुनावी माहौल में प्रियंका गांधी की टिप्पणी के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया खुल कर मैदान में कूद पड़े हैं - क्योंकि बाद परिवार की प्रतिष्ठा पर आ गयी है. 

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एक चुनावी रैली में प्रियंका गांधी ने सिंधिया के परिवार के साथ साथ उनकी हाइट का जिक्र कर कुछ ज्यादा ही पर्सनल अटैक कर दिया है, ऐसे में सिंधिया का तिलमिला उठना स्वाभाविक है - अपने रिएक्शन में सिंधिया ने प्रियंका गांधी को पार्ट टाइम नेता बताया है.

बीजेपी की तरफ से ऐसा तमगा राहुल गांधी को ही मिलता रहा है. बीजेपी नेता हमेशा ही राहुल गांधी को पार्ट टाइम पॉलिटिशियन बताते रहे हैं, लेकिन सिंधिया ने अब ये खिताब प्रियंका गांधी वाड्रा को दे डाला है.

ऐसे में क्या माना जाये कि सिंधिया, राहुल गांधी को फुल टाइम नेता मान चुके हैं? और ऐसा क्या वो राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बाद मानने लगे हैं? क्योंकि जब यात्रा शुरू हुई तो किसी को यकीन नहीं था कि राहुल गांधी कब तक यात्रा में बने रहेंगे, लेकिन वो तो सबको गलत साबित करने के लिए पूर्णाहूति तक मैदान में डटे रहे. 

अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल में खुद को क्रिकेट एन्थूजीयास्ट बताने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया अब भी गांधी परिवार के खिलाफ संभल कर बैटिंग करते लगते हैं. सिंधिया की प्रतिक्रिया से ऐसा नहीं लगता कि वो भी प्रियंका गांधी को उनके ही लहजे में जवाब देना चाहते हैं. वैसे भी गांधी परिवार और सिंधिया का लंबा साथ रहा है, फिर तो बहुत सारी बातें उनको भी मालूम होंगी - अगर वो चाहते तो क्या प्रियंका गांधी की तरह निजी हमले नहीं कर सकते थे?

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जहां ज्योतिरादित्य सिंधिया पर टिप्पणी के लिए प्रियंका गांधी के साथ साथ कांग्रेस पर हमला बोला है, कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत की तरफ से बीजेपी नेता पर पलटवार हुआ है. 

सिंधिया के मामले में पर्सनल क्यों हुईं प्रियंका गांधी

मध्य प्रदेश चुनाव में अब तक नेताओं के मुंह से मूर्खों के सरदार, पांडव और कौरव, धृतराष्ट्र, कंस मामा जैसी बातें सुनने को मिली हैं. मूर्खों का सरदार तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी को ही कहा है - और जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी-शाह, ED, CBI, IT को लेकर पांडव कहा, तो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस को कौरव करार दिया. 

प्रियंका गांधी वाड्रा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को अगर गद्दार और कायर बोल कर छोड़ दिया होता तो भी चल जाता. चुनावों के दौरान अब सारे ही नेता एक दूसरे के खिलाफ निचले स्तर के बयान देने लगे हैं, लेकिन प्रियंका गांधी का गुस्सा लगता है फूट पड़ा और वो सिंधिया पर व्यक्तिगत हमले करने लगीं. 

सिंधिया का जिक्र करते हुए प्रियंका गांधी ने दतिया में कांग्रेस की रैली में कहा, 'क्या है कि वो कद में थोड़े छोटे पड़ गए... लेकिन अहंकार में तो भई, वाह भई वाह.'
 
साथ ही, प्रियंका गांधी ने सिंधिया के परिवार पर भी हमला बोल दिया, 'अपने परिवार की परंपरा अच्छे से निभाई है... विश्वासघात तो बहुतों ने किया है लेकिन इन्होंने ग्वालियर और चंबल की जनता के साथ विश्वासघात किया है. आपकी पीठ में छुरा घोंपा है.'

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प्रियंका गांधी लोगों को ये समझाने की कोशिश कर रही थीं कैसे उनके वोट से बनी कमलनाथ सरकार को ज्योतिरादित्य सिंधिया ने धोखा देते हुए गिरा दिया. प्रियंका गांधी ने लोक सभा चुनाव के दौरान यूपी में सिंधिया के साथ काम करने के अनुभव का हवाला दिया, और दावा किया कि उनको महाराज कर संबोधित न किया जाये तो वो सुनते ही नहीं, और न ही किसी का काम ही करते हैं.

और फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहाने बची खुची वो बातें भी कह डालीं जो सिंधिया को लेकर मन में भरी हुई थीं, 'एक बात है... मोदी जी लोगों को पहचानने में माहिर हैं... दुनिया भर से गद्दारों और कायरों को इकट्ठा किया और उन्हें अपनी पार्टी में ले लिया.'

निजी हमले के बावजूद सिंधिया की प्रतिक्रिया संजीदगी भरी है

प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोशल साइट X पर एक लंबी पोस्ट लिखी है - और उसमें प्रियंका गांधी को 'पार्ट टाइम नेत्री' बताया है. 

सिंधिया परिवार पर कांग्रेस महासचिव के हमले की प्रतिक्रिया में ज्योतिरादित्य ने नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक सभी को बारी बारी खरी खोटी सुनायी है. अफगान, मुगलों से लेकर अंग्रेजों की हुकूमत के दौरान कुर्बानियों का हवाला देते हुए सिंधिया ने अपने परिवार का बचाव किया है, और लिखते हैं, 'किसने चीन से भारत की रक्षा करना तो दूर, उन्हें भारतीय जमीन ही भेंट के रूप में दे दी थी? किस परिवार की दूसरी पीढ़ी ने सत्ता के लोभ में इमरजेंसी लगायी थी? और आज भी किस परिवार की वर्तमान पीढ़ी स्वयं विदेशी मंचों पर जाकर देश को बदनाम कर रही है?' 

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और इसके साथ ही सिंधिया ने ग्वालियर-चंबल के लोगों से एक अपील भी की है, 'मेरी जनता से अनुरोध है कि इस अपमान और निम्न स्तर के भाषण का उत्तर जरूर 17 नवंबर को अपना मतदान करके दें... और कांग्रेस पार्टी को सबक सिखाएं.'

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सिंधिया की ही तरह सोशल मीडिया के जरिये ही जवाब दिया है. कांग्रेस प्रवक्ता ने नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक एक एक करके सबका बचाव किया है. राहुल गांधी के पक्ष में कांग्रेस प्रवक्ता ने उनकी भारत जोड़ो यात्रा का हवाला भी दिया है. 

कांग्रेस प्रवक्ता ने आखिर में लिखा है, 'भाजपा में आपको कितना स्नेह मिल रहा है, वो सबके सामने है... अपनी जगह बनाने की नाकाम कोशिशों और आपसी द्वन्द्व से निपटने के लिए मेरी शुभकामनाए... वैसे सुन नहीं पाएंगे जो भाजपाई आपके बारे में कैमरा बंद होने  के बाद कहते हैं.'

प्रियंका गांधी पार्ट टाइम नेता क्यों हैं?

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी चुनावी रैलियों में बचपन से ही जाते रहे हैं, लेकिन प्रियंका गांधी वाड्रा की राजनीतिक की औपचारिक शुरुआत ज्योतिरादित्य सिंधिया की आंखों के सामने हुई है. और राहुल गांधी का मामला भी करीब करीब वैसा ही है. 

ज्योतिरादित्य सिंधिया, राहुल गांधी से दो साल पहले ही गुना लोक सभा क्षेत्र से संसद पहुंच चुके थे. एक हादसे में पिता माधवराव सिंधिया की मौत के बाद हुआ उपचुनाव लड़कर वो सांसद बने थे. 2004 में जब राहुल गांधी पहली बार अमेठी से संसद पहुंचे तो सिंधिया की दूसरी पारी थी. 

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2019 के आम चुनाव में सिंधिया के साथ प्रियंका गांधी आधे उत्तर प्रदेश की कांग्रेस की प्रभारी महासचिव बनायी गयी थीं, सिंधिया के कांग्रेस छोड़ देने के बाद पूरा यूपी उनके जिम्मे हो गया - और 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी ने कांग्रेस में कई प्रयोग भी किये. 

यूपी में तो प्रियंका गांधी को सफलता नहीं मिली, लेकिन हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की जीत का कुछ हद तक श्रेय तो उनको मिला ही - और कांग्रेस नेतृत्व ने अब मध्य प्रदेश भी करीब करीब उनके ही हवाले छोड़ रखा है. मध्य प्रदेश की असली कमान तो कमलनाथ ने अपने हाथ में ही रखी है, हां - प्रियंका गांधी वाड्रा का 'कद' चुनाव प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला से थोड़ा ऊपर जरूर माना जा सकता है.

ये भी देखा गया है कि कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठकों में बाकी महासचिवों के साथ प्रियंका गांधी को बुलाया जाता तो है, लेकिन राहुल गांधी की तरह कभी भी उनको वीआईपी कुर्सी नहीं मिलती. 

CWC का  मजह सदस्य होकर भी राहुल गांधी सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के पास ही बैठते हैं, लेकिन प्रियंका गांधी बहुत दूर नजर आती हैं. ये ठीक है कि राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं, लेकिन ये भी तो है कि प्रियंका गांधी अभी महासचिव हैं. आखिर दोनों ही गांधी परिवार से ही तो आते हैं - क्या ये बेटे और बेटी होने का फर्क होता है?

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और क्या अब ज्योतिरादित्य सिंधिया के बयान को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर बीजेपी का स्टैंड नहीं समझा जाना चाहिये? क्या राहुल गांधी को फुल टाइम पॉलिटिशियन माना जाने लगा है? आखिर प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्ट टाइम नेता क्यों माना जाना चाहिये, और राहुल गांधी को नहीं!

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