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कोलकाता रेप-मर्डर केस: सीपी को हटाकर 'आयरन लेडी' ममता बनर्जी ने क्या सारे दाग धो लिए हैं?

कोलकाता रेप-मर्डर केस में पुलिस कमिश्नर को हटाने के बावजूद ममता बनर्जी पर यह आरोप लगते रहेंगे कि उन्होंने सीपी विनीत गोयल को बचाने के लिए एड़ी चोटी की जोर लगा दी थी. इसके साथ ही पार्टी में उनकी छवि को लेकर जो नुकसान हुआ है उसे कैसे कंट्रोल करेंगी?

कोलकाता रेप-मर्डर केस के विरोध में प्रदर्शन (फाइल फोटो) कोलकाता रेप-मर्डर केस के विरोध में प्रदर्शन (फाइल फोटो)
संयम श्रीवास्तव
  • नई दिल्ली,
  • 17 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 12:21 PM IST

कोलकाता रेप और मर्डर कांड के विरोध में लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने खुद को आयरल लेडी समझने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को फाइनली झुकने पर मजबूर कर दिया. सीएम ने रेप और मर्डर केस में लीपापोती करने वाले कोलकाता के पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल और डिप्टी कमिश्नर (नॉर्थ) समेत चार अफसरों को हटा दिया है. एक्शन के दायरे वालों में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े दो अफसर भी शामिल हैं. सीएम के इस फैसले का प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों ने स्वागत किया है. हालांकि, उन्होंने धरना वापस नहीं लिया है. जूनियर डॉक्टर्स का कहना है कि जब तक वादे पूरे नहीं किए जाते, हम यहां स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय पर हड़ताल और प्रदर्शन जारी रखेंगे. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब भी उनकी कई महत्वपूर्ण मांगें नहीं मानी गईं हैं. दूसरी ओर ममता बनर्जी समझती हैं कि उन्होंने हड़ताली डॉक्टर्स की बातें मानकर पश्चिम बंगाल की जनता का दिल जीत लिया है.

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सवाल यह उठता है कि क्या कोलकाता पुलिस कमिश्नर पर कार्रवाई करके सीएम बनर्जी ने इस मामले में अपने दामन पर लगे सभी छींटों को धो लिया है? आइये इस सवाल का जवाब ढूढने की कोशिश करते हैं.

1-पहले आरजी कर के प्रिंसिपल को हटाने में देर, अब सीपी के मामले में भी 

कोलकाता रेप केस में सीपी को हटाने के बावजूद ममता बनर्जी का ऐसे आरोपों से पीछा नहीं छूटेगा कि उन्होंने सीपी विनीत गोयल को बचाने के लिए एड़ी चोटी की जोर लगा दी, पर हड़ताली डॉक्टर्स अड़े रहे. यही नहीं इसके पहले आरजी कर के प्रिंसिपल को भी बचाने की कोशिश सीएम की ओर से हुई. घटना के तुरंत बाद उन्हें दूसरे कॉलेज की जिम्मेदारी देकर उन्हें बचने के लिए सेफ पैसेज दिया गया. जबकि सीबीआई ने अब उन पर भ्रष्टाचार के साथ रेप और हत्याकांड के सुबूत मिटाने का भी मामला भी दर्ज किया है. जाहिर है कि सीपी को भी बचाने की कोशिश हुई है. सरकार को उन पर भी सबूत मिटाने का मामला दर्ज करना चाहिए था.
 

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2-टीएमसी नेताओं का जो भरोसा खो दिया उसे कैसे वापस पाएंगी ममता

आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ जो हुआ उसका गुस्सा तो लोगों में है ही पर जो सरकार ने किया उसका गुस्सा आम लोगों के साथ पार्टी के लोगों में भी हैं. हो सकता है कि बहुत से लोग पार्टी के खिलाफ खुलकर मुखर नहीं हो पाए हैं. पर ममता बनर्जी के खिलाफ पार्टी के अंदर उबाल तो है ही. हालांकि कुछ नेताओं ने खुलकर ममता को आईना दिखाने की कोशिश की पर ऐसे लोग बहुत कम हैं. यही नहीं भतीजे अभिषेक बनर्जी भी सरकार से इस मुद्दे पर खफा बताये जा रहे थे.

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद जवाहर सरकार ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भेजे इस्तीफे में कोलकाता रेप-मर्डर केस को हैंडल करने में उनके स्टैंड को गलत बताया था. ध्यान देने वाली बात ये है कि ममता बनर्जी ने खुद फोन करके जवाहर सरकार को मनाने की कोशिश की है, लेकिन वो टीएमसी छोड़ देने के अपने फैसले पर अडिग थे. जवाहर सरकार को लग रहा था कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री 'पुरानी ममता बनर्जी' की तरह ही कोलकाता रेप-मर्डर केस में एक्शन लेंगी, लेकिन एक तो कोई ठोस कदम उठाया भी नहीं, दूसरे जो भी कदम उठाये बहुत देर से उठाये गये. 

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कोलकाता रेप-मर्डर केस को लेकर जवाहर सरकार से पहले भी टीएमसी के कई नेता आवाज उठा चुके हैं. ऐसे पहले नेता तो अभिषेक बनर्जी ही थे हालांकि वो सुखेंदु शेखर रॉय, शांतनु सेन या जवाहर सरकार की तरह सामने नहीं आये थे. सुखेंदु शेखर रॉय को तो सरकार की आलोचना करने पर पुलिस का नोटिस भी आ गया. शांतनु सेन को प्रवक्ता पद खोना पड़ा. 

3-टीएमसी की महिला विधायकों में भी इस केस को लेकर है सरकार के प्रति रोष

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कोलकाता रेप और मर्डर केस में आम लोगों से माफ़ी मांगने और डॉक्टरों से संपर्क करने के बाद इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने पार्टी की सभी 35 महिला विधायकों से संपर्क किया. अखबार ने इस मुद्दे पर सरकार की लापरवाही के बारे में बात की. अखबार का मकसद था कि इस बात का पता लगाया जा सके कि टीएमसी के भीतर क्या चल रहा है. खासकर 8 सितंबर को सांसद जवाहर सरकार के इस्तीफे के बाद पार्टी में माहौल क्या है?

इस बातचीत में जो बात सामने आई वो यह थी कि पार्टी की सभी महिला विधायक मुख्यमंत्री बनर्जी के पीछे उनके समर्थन में खड़ीं हैं. पर सभी इस बात पर एकमत थीं कि जनता का गुस्सा जायज है. इसका साफ मतलब है कि ये विधायक सरकार को कटघरे में खड़ी कर रही हैं. हालांकि इस बातचीत में कुल 35 विधायकों में केवल 17 ने ही अपने विचार साझा किए, कम से कम 10 ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. दीदी के कानों तक हर बात नहीं पहुंच रही है. इन सभी विधायकों ने एक मत में कहा कि

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-सड़क पर गुस्सा है.

-पुलिस को ड्यूटी करनी चाहिए थी.

-जाहिर तौर पर कुछ गलत हो गया है.

-हमें बहुत पहले ही सड़कों पर उतरना चाहिए था.

4-बंगाल पुलिस ने जो गलतियां की हैं उसके लिए गोयल को जेल भेजना चाहिए था

कोलकाता रेप और मर्डर केस में पुलिस पहले दिन से येन केन प्रकारेण मामले को दबाने में लगी हुई है. लड़की की डेडबॉडी जिस हालत में मिली थी उसे देखकर पुलिस में पहले दिन भर्ती हुआ कोई शख्स भी बता देता कि पीड़िता के साथ दरिंदगी हुई थी. पर कोलकाता पुलिस अपने खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखने वालों को नोटिस भेजने में व्यस्त रही.

कोलकाता पुलिस ने जो हलफनामा पेश किया है उससे लगता है कि पुलिस बहुत कुछ छुपाने की कोशिश कर रही है. यही कारण है कि लोग पुलिस की बातों पर शुरू से ही भरोसा नहीं कर रहे थे. मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि पुलिस को पीड़िता के बेहोश होने की जानकारी 10 बजे दिन में पता चली थी. मगर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेनी डॉक्टर की मौत 3 से 4 बजे सुबह के बीच हो चुकी थी. सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट में कोलकाता पुलिस का ये हलफनामा भी शामिल है. डॉक्टर के साथ रेप हुआ और उसकी मौत हो गई और पुलिस पहले दिन यह कहती रही कि यह आत्महत्या है. मृत लड़की के घर वालों को सुइसाइड ही बताया गया. क्या जनता और ममता सरकार से इस तरह का झूठ बोलने के दोषी नहीं है सीपी? क्या सीपी पर इसके लिए मुकदमा नहीं चलाना चाहिए? अब भी लगता है कि कोलकाता के सीपी रहे विनीत गोयल को सरकार ने सेफ पैसेज मुहैया कराया है.

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5- स्वास्थ्य सचिव को हटाने में संकोच से संदेह का बढ़ा रहा

सीएम ममता ने चिकित्सा शिक्षा निदेशक (DME) और स्वास्थ्य सेवा निदेशक (DHS) के अलावा डिप्टी कमिश्नर (उत्तरी डिवीजन) को भी हटाने का ऐलान किया है. सीएम ने कहा, हम सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद मंगलवार शाम 4 बजे के बाद नए पुलिस कमिश्नर के नाम की घोषणा करेंगे. जब इतने लोगों को हटा दिया तो स्वास्थ्य सचिव को भी हटाने में क्यों कमजोर पड़ गईं ममता? डॉक्टर्स की मांग रही है कि स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार के मामले का समाधान किया जाए और स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को भी हटाया जाए. जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में प्रिंसिपल सेक्रेटरी के संरक्षण में भ्रष्टाचार होता है. मेडिकल स्टूडेंट्स प्रिंसिपल सेक्रेटरी को हटाने की लंबे समय से मांग कर रहे हैं. 

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