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MoTN survey: राजस्थान, MP और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के मुकाबले BJP का 'क्लीन स्वीप'

राजस्थान-मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में कम से कम कांग्रेस का स्थानीय नेतृत्व और संगठन मजबूत है. हर बूथ पर बीजेपी को टक्कर देने के लिए नेता और कार्यकर्ता हैं. इन तीनों राज्यों में से 2 राज्यों में पिछले 5 साल से कांग्रेस की सरकार थी इसके बावजूद भी अगर इन राज्यों में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो रहा है तो इसका सीधा मतलब है कि वोट लेने की कोशिश नहीं हो रही है.

अशोक गहलोत-कमलनाथ-भूपेश बघेल, कांग्रेस के ये क्षत्रप लोकसभा चुनावों में क्या कमाल दिखाएंगे? अशोक गहलोत-कमलनाथ-भूपेश बघेल, कांग्रेस के ये क्षत्रप लोकसभा चुनावों में क्या कमाल दिखाएंगे?
संयम श्रीवास्तव
  • नई दिल्ली,
  • 08 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 6:35 PM IST

इंडिया टुडे-सी वोटर के मूड ऑफ द नेशन सर्वे के मुताबिक, बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनावों में राजस्थान-मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में क्वलीन स्वीप करती दिख रही है. अभी हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के पहले तक इन तीनों में से 2 राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी. फिर भी राजस्थान में बीजेपी सभी सीट जीतते हुए दिख रही है.मतलब सभी 25 सीटों पर बीजेपी कब्जा जमाते हुए दिख रही है.जबकि मध्यप्रदेश में लोकसभा कुल 29 सीटों में 27 सीट मिलती दिख रही है .छत्तीसगढ़ में बीजेपी पिछले चुनावों के मुकाबले इस बार बढ़त की स्थिति में है. यहां पर बीजेपी 10 सीटें जीतती हुईं नजर आ रही है.

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आखिर ऐसा क्या हुआ कि कांग्रेस यहां पर हार के गम को भुला नहीं पा रही है.देश के इन तीनों स्टेट में कांग्रेस की स्थित अन्य हिस्सों से बेहतर स्थिति में हैं. कम से कम इन राज्यों में कांग्रेस का स्थानीय नेतृत्व और संगठन मजबूत है. हर बूथ पर बीजेपी को टक्कर देने के लिए नेता और कार्यकर्ता हैं. इन तीनों राज्यों में से 2 राज्यों में पिछले 5 साल से कांग्रेस की सरकार थी और मध्यप्रदेश में 2018 का चुनाव कांग्रेस ने ही जीता था. इसके बावजूद भी अगर तीन राज्यों में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो रहा है तो इसका सीधा मतलब है कि वोट लेने की कोशिश ही नहीं हुई है. विधानसभा चुनावों में जो पार्टी करीब 40 परसेंट वोट हासिल की हो उसे लोकसभा चुनावों में एक भी सीट मिलती न दिख रही हो तो दूसरे राज्यों में कांग्रेस के बारे में क्या कहा जा सकता है?

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पिछले महीने कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने एक अख़बार में एक लेख लिखकर यह बताने की कोशिश की थी कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना कांग्रेस लोकसभा चुनावों तक अपनी स्थिति इतनी मजबूत कर सकती है कि उसे विधानसभा चुनावों की हार का गम नहीं होगा. उनका कहना था कि इन राज्यों में कांग्रेस का वोट शेयर 40 फ़ीसदी रहा है. ये लगभग उतना ही है जितना 2018 में था.मध्य प्रदेश को छोड़ दिया जाए तो बाकी दो हिंदी भाषी राज्यों राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी और कांग्रेस के बीच वोट शेयर में फर्क कम है, जिसे पार्टी कोशिश करके भर सकती है.पर लगता है कि कांग्रेस ने चिदंबरम की सलाह पर गौर नहीं किया है. फिलहाल इंडिया टुडे-आज तक का सर्वे तो यही कहता है.

मध्य प्रदेश : पार्टी की हार के कारणों पर चर्चा यहां महंगी पड़ जाती है

मूड ऑफ द नेशन सर्वे में मध्य प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को 58 फीसदी से ज्यादा वोट मिलता दिख रहा है, जबकि कांग्रेस को 38.2 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है. मतलब साफ है कि पिछले लोकसभा चुनावों यानि कि 2019 में मिले वोट से बीजेपी आगे नहीं बढ़ रही है पर कांग्रेस के 4 परसेंट वोट बढ़ रहे हैं. पिछली बार कांग्रेस को 34.5 परसेंट वोट ही मिले थे.वहीं बीजेपी को 58 परसेंट वोट पाने में कामयाब हुई थी.

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मध्य प्रदेश में लोकसभा की 29 सीटें हैं. पिछले चुनाव में 29 में से बीजेपी को 28 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस को सिर्फ एक सीट से संतुष्ट होना पड़ा था. छिंदवाड़ा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ ने जीत दर्ज की थी. पर इस बीच ऐसी खबरें चल रहीं हैं कि कमलनाथ या उनके बेटे नकुलनाथ भी बीजेपी की शरण में जा सकते हैं . अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस मध्यप्रदेश में और कमजोर हो सकती है. विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने के अलावा कोई भी ऐसा उल्लेखनीय कार्य नहीं किया है जिससे ऐसा लगे कि पार्टी लोकसभा चुनावों को लेकर गंभीर है. विधानसभा चुनावों की हार का विश्वेषण करने वालों को पार्टी से निकाल दिया जाता है. मध्यप्रदेश में हार के लिए कमलनाथ को जिम्मेदार बताने वाले एक प्रवक्ता को पार्टी के कोप का भाजन बनना पड़ा. 

विधानसभा चुनावों में वोट शेयर के मामले में बीजेपी 2018 में 41.02 फ़ीसदी से बढ़कर 2023 में 48.55 फ़ीसदी तक पहुंची जबकि कांग्रेस के वोट शेयर में मामूली गिरावट 2018 में 40.89 फ़ीसदी और 2023 में 40.40 फ़ीसदी देखने को मिली.सीधा मतलब है कि कांग्रेस मध्य प्रदेश में कमजोर नहीं है. थोड़ी मेहनत करके कांग्रेस चाहती तो मध्य प्रदेश में कुछ और लोकसभा सीटों लायक स्थिति तो बना ही सकती थी.

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राजस्थान में क्यों खड़ी नहीं हो पा रही है कांग्रेस

राजस्थान से कांग्रेस को काफी उम्मीदें थीं पर आंतरिक कलह ने सब चौपट कर दिया. राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने मिलकर पार्टी को गर्त में धकेल दिया. अभी तक दोनों को एक साथ लाने का कोई प्रयास नहीं हुआ है. न ही दोनों में से किसी एक को राज्य की राजनीति से हटाने में ही पार्टी सफल हो सकी है. इसी का नतीजा है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए एक भी सीट जीतने का अनुमान नहीं दिख रहा है. इंडिया टुडे और आजतक के संयुक्त सर्वे में  राजस्थान में बीजेपी का वोट शेयर 58.6 शेयर मिलता दिख रहा है. जबकि कांग्रेस के खाते में करीब 35 फीसदी वोट जा रहा है. इस बार भी लोकसभा चुनावों में बीजेपी 25 में से 25 सीटों पर परचम लहरा रही है. पिछले चुनावों में एनडीए में शामिल हनुमान बेनीवाल ने हनुमानगढ़ सीट से जीत हासिल की थी, लेकिन बाद में वो किसानों के मुद्दों पर एनडीए को छोड़ दिया था.

राजस्थान में बीजेपी को पिछले साल हुई विधानसभा चुनावों में 199 में से 115 सीटें मिलीं. कांग्रेस जो 2018 के विधानसभा चुनावों में 100 सीटें ला सकी थी, उसे 69 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा. विधानसभा चुनावों में बीजेपी के वोट शेयर में अच्छी बढ़त देखी जा सकती है, 2018 में 38.77 फ़ीसदी से इस साल 41.69 फ़ीसदी़. कांग्रेस की बात करें तो ये बढ़त मामूली दिखती है 2018 में 39.30 फ़ीसदी से 2023 में 39.53 फ़ीसदी.जाहिर है कि लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी ने बिल्कुल भी मेहनत नहीं की है. अशोक गहलोत सरकार के लोककल्याणकारी कार्यों की लोकप्रियता के बावजूद उन्हें वोट में बदलने का प्रयास नहीं हुआ है.

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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन

विधानसभा चुनावों का रिजल्ट आने तक यही कहा जा रहा था कि छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल मुख्यमंत्री के रूप में बढ़िया काम कर रहे हैं. यहां पर विधानसभा चुनावों में कौन जीत रहा है इसे लेकर पोल और सर्वे भी फेल हो गए.करीब हर एग्जिट पोल में भूपेश बघेल कांग्रेस की सरकार बनाते नजर आ रहे थे. पर कांग्रेस की इतनी बुरी हार हुई कि जो किसी ने सोचा भी नहीं था. लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस का डब्बा गोल ही है.छत्तीसगढ़ में बीजेपी का वोट शेयर बढ़कर 53.9 फीसदी पहुंच गया है, जबकि कांग्रेस के खाते में 38.2 फीसदी वोट ही मिल रहे हैं. वहीं अन्य के खाते में 7-8 फीसदी वोट जा रहे हैं.

इंडिया टुडे और सी वोटर के सर्वे 'मूड ऑफ द नेशन'  में छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी को बंपर फायदा होता दिखाई दे रहा है. यहां बीजेपी को 10 सीट मिल रही हैं, जबकि कांग्रेस सिर्फ एक सीट पर सिमटती दिख रही है.छत्तीसगढ़ में पिछले चुनाव के आंकड़ों की बात करें तो राज्य में बीजेपी ने 11 में से 9 सीटें जीतीं थीं. जबकि कांग्रेस के खातों में दो सीटें आई थीं. हालांकि सर्वे के मुताबिक, अब कांग्रेस को एक सीट का नुकसान होता हुआ दिख रहा है.

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अभी हाल ही हुए विधानसभा चुनावों में  छत्तीसगढ़ में कुल 90 विधानसभा सीटों में बीजेपी को 54 और कांग्रेस को 35 सीटों पर जीत मिली. बीते चुनावों के मुक़ाबले बीजेपी का प्रदर्शन यहां बेहतर रहा क्योंकि उसके वोट शेयर में भी 33.0 फ़ीसदी से 46.27 फ़ीसदी तक की बढ़ोतरी हुई.हालांकि सीटों के मुकाबले कांग्रेस का वोट शेयर बहुत थोड़ा घटा. जहां 2018 में उसका वोट प्रतिशत 43.0 फ़ीसदी था, 2023 में 42.23 फ़ीसदी तक आ गया. चूंकि लोकसभा चुनावों में पहले भी बीजेपी को यहां से कांग्रेस के मुकाबले बेहतर वोट मिलता रहा है. उम्मीद की जाती है कि यही ट्रेंड इस बार भी होगा.

छत्तीसगढ़ में हार के कारणों का विश्वेषण करके उसे खत्म करने की कोई कोशिश नहीं हुई. छत्तीसगढ में लोकसभा चुनावों के लिए बस राहुल गांधी की न्याय यात्रा का इंतजार किया जा रहा है.
 

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