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फडणवीस-शिंदे में तालमेल, महिला वोटर्स का विश्वास... अंजना ओम कश्यप से जानिए महाराष्ट्र में महायुति की जीत के फैक्टर्स

महाराष्ट्र में बीजेपी ने देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के साथ मिलकर अपनी हिंदुत्व स्थिति को मजबूत किया है. ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि महाराष्ट्र के लोगों को लगता है कि फडणवीस और शिंदे मिलकर एक स्थिर सरकार राज्य को दे सकते हैं और दोनों साथ मिलकर बिना किसी मनमुटाव के काम करेंगे. यही कारण है कि लोगों ने महयुति पर एक बार फिर विश्वास जताया है.

देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे की जोड़ी पर लोगों ने विश्वास जताया है (फाइल फोटो) देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे की जोड़ी पर लोगों ने विश्वास जताया है (फाइल फोटो)
अंजना ओम कश्यप
  • नई दिल्ली,
  • 23 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 5:45 PM IST

महाराष्ट्र में महायुति ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है. बीजेपी सबसे मजबूत पार्टी बनकर उभरी है, जिसने अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ स्ट्राइक रेट हासिल किया है. ये 2014 की 122 सीटों से भी बेहतर है. सबसे बड़ी बात यह है कि बीजेपी ने देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के साथ मिलकर अपनी हिंदुत्व स्थिति को मजबूत किया है. ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि महाराष्ट्र के लोगों को लगता है कि फडणवीस और शिंदे मिलकर एक स्थिर सरकार राज्य को दे सकते हैं और दोनों साथ मिलकर बिना किसी मनमुटाव के काम करेंगे. यही कारण है कि लोगों ने महयुति पर एक बार फिर विश्वास जताया है.

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लोग बीजेपी के बारे में बिल्कुल स्पष्ट थे

दूसरी सबसे बड़ी बात यह है कि जहां तक ​​राज्य का सवाल है, लोग बिल्कुल स्पष्ट हैं. वे बालासाहब ठाकरे की विरासत को एकनाथ शिंदे को सौंपना चाहते हैं क्योंकि उनका स्ट्राइक रेट भी बहुत अच्छा रहा है. जो परिणाम आए उनमें से लगभग 70 प्रतिशत यह दर्शाता है कि एकनाथ शिंदे एक ठोस नेता साबित हुए हैं और अपनी 'लाडकी बहिण' योजना के साथ वे महिलाओं को अपने पक्ष में लाने में सफल रहे हैं. महिलाओं ने महायुति को जमकर वोट दिया.

महिलाओं की पसंद बने फडणवीस और शिंदे

देवेंद्र फडणवीस और शिंदे महाराष्ट्र में महिलाओं के बीच बहुत ही पसंदीदा नेता के रूप में उभरे हैं. विदर्भ में भी दोनों नेताओं ने कमाल करके दिखाया है. बीजेपी ने यहां अच्छा प्रदर्शन किया है. इसमें महत्वपूर्ण बात ये भी कि चुनाव से पहले एक अधिसूचना जारी की गई थी कि 15% नमी होने पर भी सोयाबीन की खरीद मतदान से 3 से 4 दिन पहले की गई थी और इससे किसानों का भी विश्वास बढ़ा. इसके साथ ही लोगों को यह विश्वास हुआ कि सरकार महिलाओं, किसानों को कुछ दे रही है.

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शरद पवार का सबसे खराब प्रदर्शन

और एक आखिरी बात यह है कि पवार बनाम पवार की इस लड़ाई में शरद पवार ने महाराष्ट्र में अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया है. उनका स्ट्राइक रेट 10 से 11% से भी कम रहा है. यह दर्शाता है कि वे जिन 80 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ रहे थे, उनमें से अगर उनकी पार्टी का ग्राफ इतना नचीके आया है तो यह एक समय के महान नेता के लिए बहुत बड़ी गिरावट है. अब शरद पवार का जादू खत्म हो चुका है. भले ही लोकसभा चुनाव में शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले को लोगों ने चुना हो लेकिन इस विधानसभा चुनाव में लोग अजित पवार के साथ नजर आए.

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