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राम मंदिर को लेकर मल्लिकार्जुन खरगे का दलित कार्ड क्या कांग्रेस का भी स्टैंड है?

कांग्रेस ने राम मंदिर उद्घाटन समारोह से ये कहते हुए दूरी बनाई थी कि वो बीजेपी का पॉलिटिकल इवेंट था. अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कह रहे हैं कि अगर वो अयोध्या जाते तो बीजेपी के लोग उनको बर्दाश्त नहीं कर पाते, क्योंकि वो दलित समुदाय से आते हैं.

राम मंदिर के बहाने मल्लिकार्जुन खरगे का दलित कार्ड पेश करना निजी राय है, या कांग्रेस का ही स्टैंड है? राम मंदिर के बहाने मल्लिकार्जुन खरगे का दलित कार्ड पेश करना निजी राय है, या कांग्रेस का ही स्टैंड है?
मृगांक शेखर
  • नई दिल्ली,
  • 19 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 2:59 PM IST

राम मंदिर के मुद्दे पर कांग्रेस के स्टैंड को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने खारिज किया है - और अयोध्या समारोह के बहाने देश भर में दलितों के साथ होने वाले भेदभाव को भी राम मंदिर से भी जोड़ दिया है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक मजबूरियों की वजह से राम मंदिर उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं हुई. मोदी ने जिन राजनीतिक मजबूरियों की बात की है, वो कांग्रेस पर बीजेपी की तरफ से लगाये जाने वाले मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों से जुड़ा हुआ है. मोदी और बाकी बीजेपी नेता कांग्रेस नेताओं पर राम मंदिर निर्माण में बाधा पहुंचाने का भी आरोप लगाते रहे हैं. 

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भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में दलितों और आदिवासियों के अपपान का आरोप लगाया था. अयोध्या में राम मंदिर उद्घाटन समारोह 22 जनवरी को हुआ था, और उससे पहले ही राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर निकल गये थे. 

मणिपुर से मुंबई तक की न्याय यात्रा के दौरान राहुल गांधी जब उत्तर प्रदेश पहुंचे तो कहा कि राम मंदिर उद्घाटन समारोह में गौतम अडाणी, मुकेश अंबानी और अमिताभ बच्चन को बुलाकर प्रधानमंत्री मोदी ने ये संदेश दिया है कि देश की बड़ी आबादी की कोई अहमियत नहीं है. 

एक बार फिर कांग्रेस की तरफ से दलितों के मुद्दे पर बीजेपी को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई है. राहुल गांधी की ही तरह मल्लिकार्जुन खरगे ने भी दलितों के साथ भेदभाव का मुद्दा उठाया है, और राम मंदिर उद्घाटन समारोह की भी मिसाल दी है. 

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मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को अपमानित करने का भी आरोप लगाया है. कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप है कि दोनों को इसलिए अपमानित किया गया क्योंकि वे आदिवासी और दलित समुदाय से आते हैं. मल्लिकार्जुन खरगे का कहना है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को श्रीराम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह और संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया, और वैसे ही पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भी संसद भवन का शिलान्यास नहीं करने दिया गया.

अयोध्या समारोह का पूरे इंडिया गठबंधन ने बहिष्कार किया था, हालांकि, सभी दलों के नेताओं ने अपने अपने तरीके से रिएक्ट किया था. सबसे पहले ममता बनर्जी ने अयोध्या समारोह का बहिष्कार किया, और उसके बाद कांग्रेस का बयान आया. पहले तो कांग्रेस ने किसी भी नेता के अयोध्या न जाने की बात कही थी, लेकिन जब कुछ कांग्रेस नेता खुद अयोध्या जाने की बात करने लगे तो राहुल गांधी को सामने आना पड़ा. बाद में राहुल गांधी ने कहा था कि कोई कांग्रेस नेता अयोध्या जाना चाहता है तो वो निजी तौर पर जा सकता है, उस पर कोई पाबंदी नहीं है. 

अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अयोध्या समारोह से दूरी बनाने की खास वजह खुद का दलित होना बताया है - ये निजी वजह है, या कांग्रेस का भी राम मंदिर को लेकर बिलकुल यही स्टैंड है?

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क्या वाकई खरगे को बीजेपी बर्दाश्त नहीं कर पाती?

दलितों के साथ भेदभाव का मामला उठाते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने जो बात कही है, वो बहुत बड़ा सवाल है - 'अगर मैं अयोध्या जाता तो क्या उन्हें बर्दाश्त होता?'

अयोध्या समारोह के लिए मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी को भी न्योता मिला था. न्योता मिलने की बात कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कंफर्म भी की थी, और पहली प्रतिक्रिया में यही कहा था कि सही वक्त पर पार्टी का फैसला बताया जाएगा. 

अब दलित कार्ड पेश करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राम मंदिर उद्घाटन समारोह के बहाने देश भर में दलितों के साथ होने वाले भेदभाव की तरफ ध्यान दिलाने की कोशिश की है.

इंडियन एक्सप्रेस के कार्यक्रम 'आइडिया एक्सचेंज' में मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, मेरे लोगों को आज भी सभी मंदिरों में जाने की अनुमति नहीं है... राम मंदिर छोड़िये... आप कहीं भी जाइये... गांव के छोटे-छोटे मंदिरों में भी जाने की अनुमति नहीं है.

मंदिरों के साथ साथ मल्लिकार्जुन खरगे दलितो के साथ होने वाले भेदभाव के कई उदाहरण पेश करते हैं, आप पानी नहीं पीने देते... एक दूल्हे को भी बर्दाश्त नहीं करते जब वो घोड़े पर बारात लेकर जाता है.

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और फिर सवाल उठाते हैं, तो आप मुझसे कैसे उम्मीद कर सकते हैं... मैं जाता तो क्या वे इसे बर्दाश्त करते?

राम मंदिर को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के कांग्रेस पर आरोपों की बात करें तो मल्लिकार्जुन खरगे की प्रतिक्रिया बिलकुल ठीक है. अगर मोदी राजनीतिक तौर पर मंदिर मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हैं, तो मल्लिकार्जुन खरगे भी उसी भाषा में जवाब दे रहे हैं - और इस मामले में वो राजनीतिक रूप से बिलकुल सही हैं. मल्लिकार्जुन खरगे का बयान राजनीतिक तौर पर बिलकुल दुरूस्त है. 

लेकिन क्या वास्तविकता भी यही है? 

सवाल है कि क्या न्योता मिलने के बाद मल्लिकार्जुन खरगे अयोध्या जाते तो वाकई बीजेपी नेता उनको बर्दाश्त नहीं कर पाते? 

अगर वास्तव में मल्लिकार्जुन खरगे को ऐसा लगता है, तब तो निश्चित रूप से उनको अयोध्या जाना चाहिये था - और बीजेपी के साथ साथ अयोध्या समारोह से जुड़े लोगों के इरादे का पर्दाफाश करना चाहिये था. 

अगर मल्लिकार्जुन खरगे के साथ अयोध्या में दुर्व्यवहार होता तो पूरा देश लाइव देखता - ये तो ऐसा लगता है, जैसे कांग्रेस नेता ने बीजेपी के खिलाफ बहुत बड़ा मौका गंवा दिया है.

हिंदुत्व और राम मंदिर के मुद्दे पर कांग्रेस के स्टैंड में भटकाव क्यों है

अयोध्या और राम मंदिर के मुद्दे पर जितना ढुलमुल रवैया कांग्रेस की तरफ से देखने को मिला है, उतना तो किसी भी नेता के स्टैंड में देखने को नहीं मिला - आखिर कांग्रेस भी वैसा ही स्टैंड क्यों नहीं ले पाती, जैसा ममता बनर्जी और सीताराम येचुरी सहित लेफ्ट नेताओं ने लिया था. 

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ममता बनर्जी और लेफ्ट नेताओं ने भी राम मंदिर उद्घाटन समारोह को बीजेपी का इवेंट ही बताया था, लेकिन कांग्रेस की तरह उनकी तरफ से बारी बारी और अलग अलग बयानबाजी नहीं हुई. कांग्रेस की तरह ही अखिलेश यादव भी काफी कन्फ्यूज्ड नजर आये थे, लेकिन अरविंद केजरीवाल जैसे नेता बहुत अच्छा राजनीतिक बयान दिया था. और बाद में पूरे परिवार के साथ वो भगवंत मान के साथ अयोध्या गये भी थे. 

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए पहले चरण की वोटिंग के प्रचार के आखिरी दिन राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने गाजियाबाद में प्रेस कांफ्रेंस की थी - संयोग से उस दिन राम नवमी का मौका था, और इसे दोनों नेताओं का प्रयोग भी समझा जा सकता है. 

ममता बनर्जी भी रामनवमी के मौके पर पश्चिम बंगाल में छुट्टी दे देती हैं, लेकिन बीजेपी पर दंगे कराने की तोहमत जड़ देती हैं. संयोग से वहां राम नवमी के मौके पर दंगे भी होते हैं - राजनीति ऐसे ही चलती रहती है. 

ऐसे में जबकि लोकसभा चुनाव पर साफ साफ राम मंदिर मुद्दे का प्रभाव महसूस किया जा रहा है, कांग्रेस नेता को कुछ भी बोलने से पहले अच्छी तरह सोच समझ लेना चाहिये - और हां, वो बयान राजनीतिक रूप से दुरूस्त होने के साथ साथ आम लोगों को भी समझ में आना चाहिये, ताकि लोग ऐसी बातों पर सहज तौर पर यकीन कर सकें. 
 

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