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केजरीवाल का हाल क्‍या ममता बनर्जी के लिए बड़े खतरे का संकेत है?

दिल्ली में फतह के बाद बीजेपी की सीधी नजर पश्चिम बंगाल पर ही है, जहां अगले साल विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं. बंगाल में बीजेपी के एक्टिव होने के साथ ही ममता बनर्जी भी अलर्ट हो गई हैं - वैसे, ममता और केजरीवाल में काफी फर्क भी है.

ममता बनर्जी के खिलाफ भी अब बीजेपी की टीम पश्चिम बंगाल में दिल्ली की ही तरह सक्रिय हो गई है. ममता बनर्जी के खिलाफ भी अब बीजेपी की टीम पश्चिम बंगाल में दिल्ली की ही तरह सक्रिय हो गई है.
मृगांक शेखर
  • नई दिल्ली,
  • 12 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST

दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतकर बीजेपी ने अपनी ताकत का जौहर दिखा दिया है. अब वो मोदी-शाह के नेतृत्व में बीजेपी फिर से चुनावी राजनीति के मोर्चे पर डटकर खड़ी हो गई है. अव्वल तो अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक प्रयोग का फेल होना, बिहार में प्रशांत किशोर के लिए फिक्र की बात हो सकती है, लेकिन बीजेपी की ज्यादा दिलचस्पी पश्चिम बंगाल सत्ता हासिल करने में है. दिल्ली की ही तरह 2014 से ही पश्चिम बंगाल पर भी बीजेपी की नजर टिकी हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर दिल्ली चुनाव में उतरी बीजेपी ने अरविंद केजरीवाल के सवाल का जवाब तो दे ही दिया है, दूल्हा कौन है?

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पश्चिम बंगाल में अगले साल यानी 2026 में विधानसभा के चुनाव कराये जाएंगे, जबकि बिहार में इसी साल के आखिर में - बीजेपी की नजर तो नीतीश कुमार पर भी होगी ही, लेकिन राजनीतिक हिसाब से ममता बनर्जी की अहमियत ज्यादा है. नीतीश कुमार को तो बीजेपी ने विपक्षी खेमे से साथ लाकर एहतियाती इंतजाम तो कर ही लिया है. 

ममता बनर्जी पहले से ही अलर्ट हैं

अपने पुराने सहयोगी शुभेंदु अधिकारी की तरफ से चेतावनी भरी घोषणा के बाद ममता बनर्जी अपने स्तर पर अलर्ट हो गई हैं - तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आगाह करने के साथ ही ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेतृत्व के लिए भी अपना इरादा जाहिर कर दिया है. 

कांग्रेस पर तो टीएमसी नेताओं ने महाराष्ट्र चुनाव का रिजल्ट आने के साथ ही हमला बोल दिया था, अब ममता बनर्जी हरियाणा और दिल्ली का उदाहरण देते हुए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनो को बीजेपी की जीत के लिए जिम्मेदार ठहरा रही हैं. 

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टीएमसी की एक मीटिंग से सूत्रों के हवाले से आई खबर से मालूम होता है कि ममता बनर्जी ने कार्यकर्ताओं भरोसा दिलाया है कि वो चौथी बार भी पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने में सफल रहेंगी. 

ममता बनर्जी का कहना है कि दिल्ली में कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी की मदद नहीं की, और हरियाणा में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के साथ भी वैसा ही व्यवहरा किया - और ममता बनर्जी दोनो राज्यों में बीजेपी की जीत की वजह भी यही मान रही हैं. 

ममता बनर्जी कह रही हैं कि सभी को एक साथ होना चाहिये, लेकिन ऐन उसी वक्त कहती हैं, बंगाल में कांग्रेस का कुछ भी नहीं है… मैं अकेले लड़ूंगी… हम अकेले ही काफी हैं - और इसके साथ ही ममता बनर्जी अगले चुनाव में दो तिहाई से ज्यादा सीटें जीतने का दावा करती हैं. 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने टीएमसी विधायकों से सतर्क रहने की सलाह दी है. कहा है, बीजेपी चुनाव जीतने के लिए वोटर लिस्ट में विदेशियों के नाम शामिल करने की कोशिश कर सकती है.

लेकिन ममता और केजरीवाल काफी फर्क भी है

राजनीति में तो ममता बनर्जी काफी पहले से हैं, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर वो अरविंद केजरीवाल से महज दो साल पहले से ही बैठी थीं. ममता बनर्जी 2011 में पश्चिम बंगाल की और 2013 में अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे - कॉमन बात ये थी कि दोनो ही नेताओं ने लंबे अर्से से जमे जमाये मुख्यमंत्रियों को शिकस्त दी थी. अरविंद केजरीवाल ने तो शीला दीक्षित को भी हराया था. 

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ममता बनर्जी भी खुद को फाइटर बताती रही हैं, और अरविंद केजरीवाल भी सड़क पर बड़ा आंदोलन खड़ा करने के बाद ही राजनीति में आये हैं - लेकिन दोनो नेताओं में कई तरह के फर्क भी हैं, जो उनकी ताकत और कमजोरी का नमूना बन जाते हैं. 

अरविंद केजरीवाल के पास ममता बनर्जी जैसा राजनीतिक अनुभव नहीं है, और ये बात कदम कदम पर नजर भी आती है. 

ममता बनर्जी के पास अपनी एक विचारधारा है, लेकिन अरविंद केजरीवाल की राजनीति में अभाव के साथ साथ विचारधारा का भटकाव भी महसूस होता है. 

ये ठीक है कि अरविंद केजरीवाल को दिल्ली में मुस्लिम वोट भी मिले हैं, लेकिन वो अब भी ममता बनर्जी जैसा भरोसा नहीं दे पाये हैं. राम मंदिर के उद्घाटन समारोह पर अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी बिल्कुल अलग स्टैंड लेते हैं, और ममता बनर्जी के विपरीत अरविंद केजरीवाल को तो जोर जोर से ‘जय श्रीराम’ के नारे भी लगा लेते हैं. 

बेशक अरविंद केजरीवाल ने एमसीडी से बीजेपी को बेदखल कर दिया है, लेकिन दिल्ली में लोकसभा चुनाव में चारों खाने चित्त हो जाते  हैं, कांग्रेस से हाथ मिलाकर भी खुद को आजमा चुके हैं - और दूसरी तरफ, ममता बनर्जी डंके की चोट पर बीजेपी से अपनी ज्यादातर लोकसभा सीट बचाती आ रही हैं. 

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मुश्किल जरूर है, लेकिन बीजेपी के लिए अरविंद केजरीवाल की तरह ममता बनर्जी को बंगाल की सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा पाना उतना आसान भी नहीं है. 

बीजेपी बंगाल में भी एक्टिव हो गई है 

2021 के चुनाव से पहले टीएमसी छोड़कर बीजेपी के लिए मोर्चा संभाल रहे शुभेंदु अधिकारी ने दिल्ली की नतीजे आने के बाद मीडिया से कहा, दिल्ली की जीत हमारी है… 2026 में बंगाल की बारी है.

ममता बनर्जी को सीधे सीधे चेतावनी देते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा है, “देखो, अगली बारी तुम्हारी है.”

बंगाल बीजेपी नेता सुकांत मजूमदार भी आगे बढ़कर दावा करते हैं, बंगाल के लोग भी अगले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को वोट देंगे. 

शुभेंदु अधिकारी और सुकांत मजूमदार दिल्ली में रहने वाले बंगाली समुदाय को शुक्रिया कहा है, वैसे ममता बनर्जी ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी को समर्थन दिया था. 

ध्यान देने वाली बात ये भी है कि उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पश्चिम बंगाल विधानसभा को संबोधित करना चाहते हैं, और इस सिलसिल में उनके सचिव सुनील गुप्ता ने पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी से मुलाकात भी की है. जगदीप धनखड़ उप राष्ट्रपति बनने से पहले पश्चिम बंगाल के ही राज्यपाल हुआ करते थे - ऐसे में ममता बनर्जी का पहले से ही अलर्ट हो जाना तो स्वाभाविक ही है.

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