
मुद्रगदा पद्मनाभम को आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले में बेहद प्रभावशाली कापू नेता माना जाता है. नाराज पूर्व सांसद और उनके बेटे पीथापुरम विधानसभा क्षेत्र में अभिनेता से नेता बने पवन कल्याण को हराने की कसम खाते हुए वाईएसआरसीपी में शामिल हो गए हैं. हालांकि, उनकी अपनी बेटी क्रांति उनसे सहमत नहीं हैं और उन्होंने पवन के साथ हाथ मिला लिया है.
क्रांति ने वाईएस जगनमोहन रेड्डी पर जन सेना प्रमुख को निशाना बनाने के लिए अपने पिता का इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया है. दूसरी तरफ पद्मनाभम ने पवन पर उनके परिवार में फूट डालने, उनकी बेटी को राजनीति में खींचने और उनके खिलाफ बोलने के लिए उकसाने का आरोप लगाया है.
परिवार को तोड़ना नहीं चाहते पवन कल्याण
पद्मनाभम ने पवन की निजी जिंदगी पर तीखा हमला बोला. इसके बाद सियासी जंग और ज्यादा तेज हो गई है. हालांकि, इस जंग में पवन कल्याण ने एक कदम पीछे हटने का फैसला किया. उन्होंने सार्वजनिक तौर पर क्रांति से कहा कि वह परिवारों को तोड़ना नहीं चाहते. हालांकि, उन्होंने क्रांति के समर्थन की सराहना भी की. पवन ने यह कहा कि वह एक दिन क्रांति के पूरे परिवार की मेजबानी करेंगे.
कड़वाहट का पर्याय बन गया है चुनाव
पीठापुरम (शहर) प्रकरण उन कई पारिवारिक लड़ाइयों में से एक है, जो इस चुनावी मौसम में आंध्र के राजनीतिक परिदृश्य में छाई हुई हैं. तेलुगु टीवी सोप ओपेरा की तरह, लिविंग रूम के झगड़े अब खुले में आ चुके हैं. इसे ऑफलाइन और ऑनलाइन उन दर्शकों के लिए प्रसारित किए जा रहा है, जो मनोरंजन की तलाश कर रहे हैं. 2024 का आंध्र प्रदेश चुनाव कड़वाहट का पर्याय बन गया है.
छोड़ी पार्टी और YSRCP में हो गए शामिल
इस जिले के ही एक अन्य हिस्से में सीनियर टीडीपी नेता और पूर्व वित्त मंत्री यानमाला रामकृष्णुडु ने अपनी बेटी दिव्या को तुनी विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा है. उन्होंने दिव्या को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बताया, जिसके बाद उनके भाई यानमाला कृष्णुडु ने गुस्से में पार्टी छोड़ दी और वाईएसआरसीपी में शामिल हो गए. यह एक और केस है, जिसमें ब्लड रिलेशन के अंदर सियासत हावी हो गई.
यहां सौतेले भाई-बहन में छिड़ी जंग
काकीनाडा के उत्तर की ओर बढ़ें तो सियासत और भी भयानक नजर आती है. आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुथयाला नायडू अनाकापल्ली लोकसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी सीएम रमेश के सामने हैं. 2014 और 2019 में मदुगुला विधानसभा क्षेत्र से लगातार दो चुनाव जीतने वाले नायडू को अपनी विधानसभा सीट दूसरी पत्नी से बेटी अनुराधा को सौंपने के लिए कहा गया था. इससे उनकी पहली पत्नी से पैदा हुए बेटे रवि कुमार नाराज हो गए और उन्होंने अनुराधा के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया.
छवि खराब करने का लगाया आरोप
सौतेले भाई-बहनों के बीच लड़ाई ने प्रतिद्वंद्वियों को फायदा उठाने का मौका दे दिया है. रवि कुमार के नाम से सोशल मीडिया पोस्ट सामने आए. इसमें उन्होंने मतदाताओं से वोट देने से पहले सोचने और 'मुथयाला नायडू को हराने' का आह्वान किया. इस पोस्ट में जनता को न्याय दिलाने में डिप्टी सीएम की क्षमता को लेकर भी सवाल उठाया गया. यह भी कहा गया कि नायडू अपने बेटे को न्याय दिलाने में विफल रहे. हालांकि, रवि कुमार ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई. रवि ने कहा कि उन्होंने इस तरह की कोई भी पोस्ट नहीं डाली है. रवि ने पिता की छवि खराब करने की साजिश का आरोप लगाया.
जो भी जीते, शासन तो परिवार का होगा
विजयवाड़ा को आंध्र प्रदेश की राजनीतिक राजधानी माना जाता है और यहां होने वाला मुकाबला इस बात का छोटा रूप है कि राजनीति ने परिवारों को कितना बांट दिया है. केसिनेनी श्रीनिवास उर्फ नानी जो 2014 और 2019 में तेलुगु देशम के टिकट पर जीते थे, चंद्रबाबू नायडू से अलग हो गए. दरअसल, उन्हें लगा कि वह अपने भाई केसिनेनी शिवनाथ उर्फ चिन्ना को बढ़ावा देने के लिए उन्हें दरकिनार कर रहे हैं. नानी वाईएसआरसीपी में चले गए. चिन्ना को टीडीपी का टिकट मिल गया. वहीं, वल्लुरी भार्गव अपने केसिनेनी चाचा को चुनौती देने के लिए कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर गए हैं. इस राजनीतिक पॉटबॉयलर ने मल्टीस्टारर का दर्जा हासिल कर लिया है. जो भी जीतेगा विजयवाड़ा में एक बदलाव के साथ पारिवारिक शासन ही होगा.
रेड्डी भाई बहनों में भी जारी है जंग
बेशक, सबसे कड़ा मुकाबला कडप्पा में हो रहा है, जहां जगन की बहन और आंध्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वाईएस शर्मिला रेड्डी का मुकाबला उनके चचेरे भाई वाईएस अविनाश रेड्डी से है. यह चुनाव 2019 में शर्मिला और जगन के चाचा वाईएस विवेकानंद रेड्डी की हत्या की पृष्ठभूमि में हो रहा है. यह तथ्य कि अविनाश उस हत्या के आरोपियों में से एक है, इस मुकाबले को संदिग्ध बना देता है. हर दिन, शर्मिला जगन पर कटाक्ष करती हैं, सीबीआई द्वारा उन पर उंगली उठाने के बावजूद अविनाश को मैदान में उतारने के लिए उनका मजाक उड़ाती हैं, जबकि वाईएसआरसीपी की जोड़ी बहन पर ताना मारती है, भविष्यवाणी करती है कि वह अपनी जमानत भी नहीं बचा पाएगी.
यहां दो भाई लड़ रहे चुनाव
रायलसीमा के दूसरे हिस्से में 2 भाई दो अलग-अलग पार्टियों से दो अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं. हालांकि, राहत की बात यह है कि भाजपा ने राजमपेट लोकसभा क्षेत्र में आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी को मैदान में उतारा है और टीडीपी ने पिलेरू विधानसभा क्षेत्र में किशोर कुमार रेड्डी को टिकट दिया है. दोनों का सियासी डीएनए एक ही है.
सभी परिवार एक दूसरे के खिलाफ नहीं
लेकिन ऐसा नहीं है कि सभी राजनीतिक परिवारों में कलह है. चित्तूर जिले में वाईएसआरसीपी में पिता और पुत्र की शक्तिशाली पेडिरेड्डी जोड़ी एक ही तरफ है. वाईएसआरसीपी के लिए उत्तरी तटीय आंध्र में शिक्षा मंत्री बोत्सा सत्यनारायण और बोत्सा झांसी की पति-पत्नी की जोड़ी भी ऐसी ही है.
यहां एक ही परिवार के 4 प्रत्याशी मैदान में
कई मायनों में दूसरे राज्यों की तरह आंध्र प्रदेश की राजनीति में भी भाई-भतीजावाद हावी है. टीडीपी के पहले परिवार में चंद्रबाबू नायडू, उनके बेटे नारा लोकेश, बहनोई नंदमुरी बालकृष्ण और एम श्रीभारत (जो बालकृष्ण के दामाद हैं) के रूप में चार प्रत्याशी हैं. संयोग से लोकेश बालकृष्ण के दामाद भी हैं. बालकृष्ण की बहन और एनटी रामा राव की बेटी पुरंदरेश्वरी राजमुंदरी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा की उम्मीदवार हैं.