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केजरीवाल गिरफ्तारी के बाद भी बने रहना चाहेंगे CM, आप को मिलेगा सियासी फायदा या भाजपा के पक्ष में जाएगा माहौल, समझिए

मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी के बाद जनता के जहन में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या सीएम इस्तीफा देंगे या जेल से खुद सरकार चलाएंगे. सीएम को इस बात का डर सता सकता है कि अगर उनके इस्तीफे के बाद किसी और को मुख्यमंत्री बनाया जाता है और पार्टी की कमान किसी और के हाथ में चली जाती है तो उनकी पकड़ पार्टी पर कमजोर हो जाएगी

आम आदमी पार्टी के सामने नई चुनौतियां आ गई हैं आम आदमी पार्टी के सामने नई चुनौतियां आ गई हैं
नितेश कुमार तिवारी
  • नई दिल्ली,
  • 22 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 1:46 PM IST

दिल्ली के कथित शराब नीति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार शाम मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया. ED ने शराब घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत सीएम केजरीवाल को गिरफ्तार किया. जांच एजेंसी ने केजरीवाल को 10 समन भेजे थे, लेकिन सीएम किसी भी समन पर ED के सामने पेश नहीं हुए. इसके बाद उनकी गिरफ्तारी कर ली गई.

हालांकि, आम आदमी पार्टी और खुद सीएम केजरीवाल कई बार ये कहते रहे कि ED उन्हें गिरफ्तार कर सकती है. एक तरफ तो समन पर समन मिलने के बाद भी मुख्यमंत्री ED के सामने पेश नहीं हो रहे थे, दूसरी ओर पार्टी को ये आशंका सता रही थी कि उनके मुखिया को कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है और आखिरकार वैसा ही हुआ. 

केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद सियासी गलियारे में ये चर्चा है कि क्या AAP इसे सियासी तौर पर भुना पाएगी? क्या सीएम इस्तीफा देंगे या जेल से सरकार चलाएंगे? AAP इस गिरफ्तारी का कितना फायदा उठा सकती है? भाजपा को इसका कितना फायदा मिल सकता है? आइए इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश करते हैं.

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अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर ले जाती ED की टीम-फोटो PTI

केजरीवाल बने रहना चाहेंगे सीएम
मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी के बाद जनता के जहन में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या सीएम इस्तीफा देंगे या जेल से खुद सरकार चलाएंगे. सीएम को इस बात का डर सता सकता है कि अगर उनके इस्तीफे के बाद किसी और को मुख्यमंत्री बनाया जाता है और पार्टी की कमान किसी और के हाथ में चली जाती है तो उनकी पकड़ पार्टी पर कमजोर हो जाएगी. क्योंकि सियासत में ऐसा देखा गया है कि कोई किसी पर जल्दी भरोसा नहीं करता है. यकीन तब ही किया जा सकता है जब कोई किसी का बहुत खास हो. राजनीति में भरोसे की कत्ल की कई तस्वीरें और कहानियां जनता ने देखी और सुनी हैं. अगर बात सीएम की कुर्सी को लेकर करें तो इसकी मिसाल के तौर पर जीतन राम मांझी और नीतीश कुमार के बीच चला संघर्ष याद होगा. वर्ष 2014 में बिहार के मुख्यमंत्री रहते नीतीश कुमार ने अपनी कुर्सी जीतन राम मांझी को सौंप दी थी. नीतीश का दावा था कि वो नैतिक आधार पर ये फैसला ले रहे हैं और आगे बिहार के मुखिया जीतन राम मांझी होंगे. लेकिन जीतन राम मांझी लंबे समय तक राज्य की कमान नहीं संभाल पाए और नीतीश कुमार ने दोबारा उन्हें कुर्सी से उतार दिया.

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हालांकि इसके लिए नीतीश कुमार को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. नीतीश जब दोबारा मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, तो जीतन राम मांझी कुर्सी से हटने को तैयार नहीं थे. मांझी को कुर्सी से हटाने के लिए नीतीश कुमार को कई दांव-पेच चलने पड़े. आखिरकार बाद में जीतन राम मांझी को कुर्सी से हटाकर नीतीश कुमार दोबारा सीएम बन गए थे. हालांकि, तब बिहार में पार्टी के भीतर ऐसा संकट नहीं आया था, जो फिलहाल दिल्ली में आम आदमी पार्टी के सामने है. AAP के बड़े नेता ED की कार्रवाई के बाद जेल जा रहे हैं, लेकिन बिहार में नीतीश ने स्वेच्छा से कुर्सी छोड़ी थी. बाद में उनके साथ खेला हो गया.

अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद समर्थकों का विरोध प्रदर्शन

'रबर स्टैंप की तरह काम करवाना चाहते थे नीतीश'
एक कार्यक्रम में जीतन राम मांझी ने कहा था कि नीतीश कुमार उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर रबर स्टैंप की तरह काम करवाना चाहते थे और खुद की मनमर्जी के मुताबिक सरकार चलाना चाहते थे. जीतन राम मांझी ने ये भी आरोप लगाया था कि जब वे गरीबों को हक दिलाने की बात करने लगे तो नाजायज तरीके से नीतीश कुमार ने उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटा दिया. जीतन राम मांझी ने कहा था कि कुचक्र रचकर उन्हें कुर्सी से हटाया गया. वहीं, नीतीश ने कहा था कि जीतन मांझी को सीएम बनाना उनकी सबसे बड़ी भूल थी. दिल्ली की बात करें तो केजरीवाल को भी इस बात की आशंका सता सकती है कि कुर्सी छोड़ने के बाद पार्टी में कहीं उनके साथ भी खेला न हो जाए.

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दूसरे मायने में समझने की कोशिश करें तो दिल्ली में AAP के आने के बाद केजरीवाल लगातार सीएम हैं और उनके पास सरकार चलाने का अनुभव है. इसके बाद सबसे बड़ा सवाल ये होगा कि क्या पार्टी के बाकी नेता राजनीतिक तौर पर इतने मैच्योर हैं कि वो सरकार चला सकते हों. सवाल ये भी रहेगा कि क्या कार्यकर्ताओं को केजरीवाल के अलावा कोई अन्य सीएम स्वीकार्य होगा? क्योंकि मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और सत्येन्द्र जैन जैसे सभी वरिष्ठ नेता जेल के अंदर हैं, इस लिहाज से भी केजरीवाल चाहेंगे कि सत्ता की चाबी उन्हीं के पास रहे. केजरीवाल की जनता में लोकप्रियता पार्टी के बाकी नेताओं से ज्यादा है.

केजरीवाल की गिरफ्तारी का AAP उठा सकती है सियासी फायदा
अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी का आम आदमी पार्टी सियासी फायदा उठा सकती है. AAP अब विक्टिम कार्ड खेलेगी. आम आदमी पार्टी जनता के बीच जाकर सहानुभूति के तौर सियासी फायदा उठाने की कोशिश करेगी. आप जनता को ये बताना चाहेगी कि उनकी पार्टी के नेताओं के साथ गलत हो रहा है और भाजपा तानाशाही तौर पर ED के जरिये विपक्ष के नेताओं को गिरफ्तार करा रही है.

विपक्ष का पहले से ही कहना है कि केंद्र में बैठी सरकार, एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर रही है. नेता अक्सर ये आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार इस देश से विपक्ष को खत्म करना चाहती है. केजरीवाल की गिरफ्तारी की टाइमिंग को लेकर भी आम आदमी पार्टी इसका सियासी लाभ लेना चाहेगी. चूंकि लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है और पहले चरण की वोटिंग में भी एक महीने से कम का समय बचा है, ऐसे में AAP जनता के बीच जाकर ये कहेगी कि आम चुनाव शुरू होने से कुछ दिन पहले ही केजरीवाल को क्यों गिरफ्तार किया गया? आम आदमी पार्टी के पास गिरफ्तारी की टाइमिंग को सियासी तौर पर भुनाने का अच्छा मौका है.

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AAP के पास दिल्ली में बड़ा जनाधार है. ऐसा दिल्ली के तीन विधानसभा चुनावों में देखा गया है, जब पार्टी ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया और देश की बड़ी सियासी पार्टियों को चौंका दिया. दिल्ली की जनता AAP के काम को पसंद कर रही है, इसलिए पार्टी दो बार, दो तिहाई से ज्यादा सीट जीतकर सत्ता पर काबिज हुई है. जनता के बीच जाकर AAP अपने नेता के गिरफ्तारी का सियासी फायदा लेंगे. AAP जनता के बीच जाकर ये कहेगी कि हमने आपको, बिजली, पानी, स्कूल, मेडिकल सारी सुविधाएं दीं, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार हमें काम नहीं करने दे रही है और हमारे नेताओं को जेल में डाला जा रहा है. AAP के साथ बाकी पार्टी के नेता लगातार ये बताने की कोशिश में हैं कि पीएम मोदी लोकसभा चुनाव में हार की डर से विपक्ष के नेताओं को जेल में डाल रहे हैं.

आम आदमी पार्टी के दफ्तर के बाहर नारेबाजी करते कार्यकर्ता-PTI

BJP भी राजनीतिक लाभ लेने की होड़ में
अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी का भाजपा भी सियासी फायदा उठा सकती है. भाजपा जनता के बीच जाकर ये कह सकती है कि आम आदमी पार्टी का जन्म ही भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हुआ था और ये पार्टी और इसके नेता भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हैं. भाजपा ये कहेगी कि सियासत में कदम रखने से पहले आप बाकी पार्टियों को भ्रष्टाचारी बताती थी और आज खुद पार्टी और उसके नेता भ्रष्टाचार कर जेल हैं. पार्टी ये कहेगी कि केजरीवाल खुद को कट्टर ईमानदार बताते रहे और उनके नेता और वह खुद भ्रष्टाचार करते रहे.

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भाजपा बताएगी वह भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस की नीति पर कायम है 
भाजपा जनता के बीच ये कहेगी कि उनकी पार्टी भ्रष्टाचार पर अपनी जीरो टॉलरेंस नीति की प्रतिबद्धता पर कायम है. BJP, ED द्वारा देश के बाकी हिस्सों के सियासी नेताओं पर छापेमारी को सही ठहरायेगी और सबको भ्रष्टाचारी बताकर ED की जांच को सही और निष्पक्ष बताने की कोशिश करेगी.

हालांकि, विपक्ष अक्सर ये आरोप लगाता रहा है कि BJP बदले की कार्रवाई करती है और ED का इस्तेमाल बस विपक्षी नेताओं पर किया जा रहा है. विपक्ष का अक्सर ये आरोप रहता है कि भाजपा में जो नेता शामिल हो जाता है वह पाक-साफ हो जाता है. उसके ऊपर लगे सभी आरोप खत्म कर दिए जाते हैं. विपक्ष भाजपा को वॉशिंग मशीन बताता रहा है. जिसमें शामिल होने के बाद दागदार नेताओं के दाग धुल जाते हैं. पार्टी ये मैसेज देगी कि देश के साथ भ्रष्टाचार करने वालों को ही जेल में डाला जा रहा है.

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