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वक्‍फ बिल पर विपक्ष का विरोध इन चार मुद्दों पर, लेकिन ये इतने बेदम क्‍यों?

वक्फ बोर्ड संशोधन के विरोध के नाम पर विपक्ष को सिर्फ इतना ही पता है कि सरकार मुसलमानों को परेशान कर रही है. केंद्र सरकार जिन मुद्दों के आधार पर ये बिल पेश कर रही है उनका जवाब किसी ने नहीं दिया. किसी ने ये बताने की जहमत नहीं उठाई कि वक्फ बोर्ड की मनमानी के खिलाफ क्या होना चाहिए? किसी ने इस सवाल का उत्तर नहीं दिया कि 39 लाख एकड़ जमीन का फायदा गरीब मुसलमान को क्यों नहीं मिलना चाहिए?

लोकसभा में वक्फ बिल पर बोलते हुए अखिलेश यादव, केसी वेणुगोपाल और असदुद्दीन ओवैसी लोकसभा में वक्फ बिल पर बोलते हुए अखिलेश यादव, केसी वेणुगोपाल और असदुद्दीन ओवैसी
संयम श्रीवास्तव
  • नई दिल्ली,
  • 03 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 1:58 PM IST

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक पेश किए जाने के बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव और टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी, एआईएमआईएम के असद्दुदीन ओवैसी आदि ने बुधवार को सरकार के खिलाफ लोकसभा में मोर्चा खोला. पर हैरानी की बात यह रही है कि किसी के पास फैक्ट नहीं थे. विरोध के नाम पर सिर्फ इतना ही था कि सरकार मुसलमानों को परेशान कर रही है. केंद्र सरकार जिन मुद्दों के आधार पर ये बिल पेश कर रही है उनका जवाब किसी ने नहीं दिया. किसी ने ये बताने की जहमत नहीं उठाई कि वक्फ बोर्ड की मनमानी और बदइंतजामी के खिलाफ क्या होना चाहिए?

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किसी ने इस सवाल का उत्तर नहीं दिया कि 39 लाख एकड़ जमीन का फायदा गरीब मुसलमान को क्यों नहीं मिलना चाहिए. किसी ने नहीं बताया कि कई सौ एकड़ जमीन का किराया सालों से मात्र कुछ हजार क्यों वसूला जा रहा है. आखिर सरकार इन समस्याओं को हल करने के लिए ही तो 2013 में हुए संशोधन को खत्म करने जा रही है. कांग्रेस की सबसे वरिष्ठ और जिम्मेदार नेता सोनिया गांधी तक ने किसी जरूरी मुद्दे की बजाय कांग्रेस पार्टी की मीटिंग में कहा कि सरकार ने जबरन वक्फ बोर्ड संशोधन अधिनियम लोकसभा से पास कराया. विपक्ष ने बिल के विरोध का आधार इन खास मुद्दों को न बनाकर कुछ ऐसे मुद्दों को बनाया जो वास्तविक रूप से केवल मुस्लिम समुदाय को भड़काने जैसा ही है. 

1-सतही: कहा, वक्फ में संशोधन नहीं हो सकता जबकि ऐसा कई बार हुआ

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वक्फ बोर्ड पर बहस करते हुए बिल के विरोध में बोलने वाले इस संशोधन को असंवैधानिक बता रहे थे. कांग्रेस नेता वेणुगोपाल , असद्द्दीन ओवैसी आदि ने इस संशोधन को ही असंवैधानिक बताने के लिए अपने तर्क दिए. पर देश के संविधान में वक्फ का कहीं भी जिक्र नहीं है. पहला वक्फ अधिनियम 1954 में बनाया गया था. इसी के तहत वक्फ बोर्ड का गठन किया गया. पहली बार वक्फ अधिनियम में संशोधन 1955 में किया गया. इसके बाद देश में नया वक्फ कानून 1995 में आया. इस संशोधन के बाद राज्यों को भी वक्फ बोर्ड बनाने की शक्ति मिल गई. फिर  2013 में इसमें संशोधन सेक्शन 40 जोड़ा गया. जो अब तक के सभी संशोधन में सबसे विवादित रहा.

सवाल यह उठता है कि जब इतने संशोधन इसके पहले ही हो चुके हैं तब किसी ने उसे असंवैधानिक क्यों नहीं कहा?  आज जब समय की मांग के अनुसार सरकार फिर उस कानून में सुधार करना चाहती है तो यह असंवैधानिक कैसे हो गया? संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजुजी सही ही कहते हैं कि आप सब कुछ छोड़कर जिसका लेना-देना नहीं है, उसका जिक्र कर लोगों को बरगला रहे हैं. रिजिजू ने कहा कि 2013 में इलेक्शन में कुछ ही दिन बचे थे. 5 मार्च 2014 को 123 प्राइम प्रॉपर्टी को दिल्ली वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर कर दिया गया. चुनाव में कुछ दिन बाकी थे, आप इंतजार करते. आपने सोचा कि वोट मिलेंगे, लेकिन आप चुनाव हार गए.

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2- भ्रम फैलाया: कहा, सरकार बात नहीं करती जबकि जेपीसी बना दी गई थी

सबसे हास्यास्पद स्थिति यह है कि सरकार का किसी किसी बहाने विरोध करने वाले लोग बिना कोई तर्क तैयार किए वक्फ बिल का विरोध कह रहे थे कि सरकार बात ही नहीं करना चाहती. कांग्रेस सदस्य के.सी. वेणुगोपाल ने सरकार पर विधेयक को जबरन पारित कराने का प्रयास का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें अपने संशोधन पेश करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया. के.सी.वेणुगोपाल ने कहा, आप वास्तव में कानून को जबरन थोप रहे हैं, आपको संशोधनों के लिए समय देने की जरूरत है. उनके पास संशोधनों के लिए समय नहीं है. 

आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन द्वारा विधेयक पर सरकार द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर कुछ आपत्तियां उठाए जाने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष का आग्रह था कि संयुक्त संसदीय समिति बनाई जाए. हमारे पास कांग्रेस जैसी समिति नहीं है. हमारे पास लोकतांत्रिक समिति है, जो विचार-विमर्श करती है. कांग्रेस के जमाने में समिति होती थी जो ठप्पा लगाती थी. हमारी समिति चर्चा करती है, चर्चा के आधार पर विचार-विमर्श करती है और बदलाव करती है. अगर बदलाव स्वीकार नहीं किए जाने हैं, तो समिति का क्या मतलब है. इसमें व्यवस्था का कोई मुद्दा नहीं है.

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वक्फ संशोधन विधेयक के लिए संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने बताया हमने पिछले छह महीनों में जेपीसी की बैठकें की हैं. हमने विपक्ष को हर दिन 8 घंटे सुना है. रिजिजू ने बताया कि मैं यह कहना चाहता हूं कि वक्फ संशोधन विधेयक पर दोनों सदनों की संयुक्त समिति में जो चर्चा हुई है, वह भारत के संसदीय इतिहास में आज तक कभी नहीं हुई. मैं संयुक्त समिति के सभी सदस्यों को धन्यवाद और बधाई देता हूं.आज तक विभिन्न समुदायों के कुल 284 प्रतिनिधिमंडलों ने समिति के समक्ष अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत किए हैं. 25 राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्डों ने भी अपनी दलीलें पेश की हैं. रिजूजी ने कहा कि पिछले साल अगस्त में पेश किए गए इस विधेयक के संबंध में 97.27 लाख याचिकाएं प्राप्त हुईं. जेपीसी ने इसकी जांच की. इससे पहले रिजिजू ने मीडिया से कहा कि यह विधेयक देश के हित में है.

3-गैरइस्लामी लोगों को क्यों बोर्ड में जगह दी जा रही है?

विपक्ष के नेताओं को वक्फ बिल का सबसे बड़ा मुद्दा यही नजर आता है कि मुसलमानों के मामले में गैरइस्लामी लोगों को क्यों शामिल किया जा रहा है. शायद नेताओं ने बिल को पढ़ा नहीं. उन्हें केवल इतना ही पता है इसलिए इस मुद्दे पर ही खेल रहे हैं. बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे कहते हैं कि ये पूरी दुनिया के जानने का सवाल है कि हिंदू वक्फ बोर्ड में क्यों आया. पहला वक्फ मोहम्मद साहब को जिसने किया, वो यहूदी था. उसने अपने सात बगीचे मदीना में मोहम्मद साहब को गिफ्ट किया. पहला वक्फ यदि मुसलमानों ने नहीं किया तो मोहम्मद साहब के सिद्धांत के खिलाफ जाकर हिंदुओं को कैसे रोक सकते हो.

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दूबे कहते हैं कि एमपी वक्फ बोर्ड बनाम शुभम साह का ऑर्डर लेकर आया हूं. हिंदू दान दे, बहुत अच्छा लेकिन वक्फ बोर्ड में मुसलमान छोड़कर दूसरा कैसे हो गया. वक्फ की संपत्ति राजा-महाराजा ने दी तो हिंदुओं को क्यों सदस्य नहीं बनाओगे. आज देश में फैसला हो जाना चाहिए. यहां गोरी आए, गजनी आए, बाबर आए. तीनों लुटेरे के तौर पर आए. आप मानते हो कि नहीं. यदि मानते हो तो हिंदुस्तान में पहला वक्फ गोरी ने किया. हिंदुओं की संपत्ति को लूटा और उसी में से दो गांव वक्फ को दे दिए.  आप इतिहास के पन्नों से नहीं लड़ सकते हो. 

गृहमंत्री अमित शाह ने खुद कहा कि कोई मुसलमानों के धार्मिक मामले में कोई भी गैरइस्लामिक व्यक्ति नहीं शामिल होगा. दरअसल वक्फ बोर्ड बहुत सी संपत्तियां जो हिंदुओं की हैं या ईसाइयों की हैं उन्हें भी वक्फ में शामिल करता है. अगर दूसरे धर्म के जमीन को शामिल करना है तो उसकी वैधता की जांच एक मुसलमान कैसे कर सकता है. इस बात को समझे बिना आप गैर इस्लामिक लोगों को बोर्ड में शामिल करने की बात नहीं समझ सकता.

4- डर फैलाओ: मुसलमानों के अधिकार छीन लिये जाएंगे, उन्‍हें मार्जिनलाइज किया जा रहा है

विपक्ष का वक्फ बोर्ड बिल के उपबंधों पर बहस करने का इरादा बिल्कुल भी नहीं था. शायद यही कारण है कि विपक्ष के किसी भी नेता उन मुद्दों की चर्चा नहीं की जिसके चलते सरकार अधिनियम में संशोधन करने का विचार कर रही है. विपक्ष का विरोध केवल इस पर फोकस्ड है जिसमें केवल मुस्लिम आम जनता को डराया जा सके. कई मु्स्लिम विचारक , धर्मगुरु इस आधार पर ही बिल का सपोर्ट कर रहे हैं. बुधवार को कई शहरों में मुसलमानों द्वारा पत्थरबाजी की जगह मिठाइयां बांटी गईं. गृहमंत्री शाह ने कहा कि वक्फ में एक भी गैर इस्लामिक नहीं आएगा. ऐसा कोई प्रोविजन भी नहीं है. वोट बैंक के लिए माइनॉरिटीज को डराया जा रहा है. वक्फ एक अरबी शब्द है. इसका मतलब है अल्लाह के नाम पर धार्मिक उद्देश्यों के लिए संपत्ति का दान. दान उसी चीज का किया जाता है, जिस पर हमारा हक है.

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शाह ने कहा- जहां तक भारत का सवाल है। आजादी के बाद इसे बदला गया. ये पूरा झगड़ा 1995 से चल रहा है. ये पूरा झगड़ा वक्फ में दखल का है. सुबह से जो चर्चा चल रही है. उसे मैंने बारीकी से सुना है. ढेर सारी भ्रांतियां सदस्यों में हैं. कई भ्रांतियां देश में फैलाई जा रही हैं.

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