Advertisement

महिला आरक्षण के बाद मोदी सरकार क्या EBC कोटा की भी सौगात देगी?

INDIA गठबंधन ने अपनी बैठक में जातिगत आरक्षण पर फोकस रहने का फैसला किया था. महिला आरक्षण की तो उसमें कोई बात भी नहीं थी. लिहाजा, मोदी सरकार का असली सरप्राइज और विपक्षी दांव की काट तो तभी होगी जब जातिगत आरक्षण पर कोई विधेयक लाया जाए. OBC में अति पिछड़ा वर्ग यानी EBC का कोटा तय किये जाने की संभावना तो बन रही है.

कैबिनेट की मीटिंग में PM मोदी (फोटो- आजतक) कैबिनेट की मीटिंग में PM मोदी (फोटो- आजतक)
संयम श्रीवास्तव
  • नई दिल्ली,
  • 19 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 5:15 PM IST

जिस दिन से पार्लियामेंट के स्पेशल सीजन बुलाने की बात सरकार ने की है, उसी दिन से यह अटकलें लगाईं जा रहीं हैं थीं कि महिला आरक्षण, समान सिविल संहिता, ओबीसी कोटे में अति पिछड़ों के लिए आरक्षण का बिल सरकार पेश कर सकती है. महिला आरक्षण पर कैबिनेट की स्वीकृति के बाद अब किस बिल की बारी है?

दरअसल विपक्ष के पास जातिगत जनगणना का ऐसा हथियार है जिसे वो एनडीए सरकार के खिलाफ 2024 के चुनावों में ब्रह्मास्त्र की तरह इस्तेमाल करने वाला है. अब चू्ंकि इंडिया एलायंस की समन्वय समिति ने यह प्रस्ताव भी पारित कर दिया है कि वो अगले चुनावों में इसे मुद्दा बनाएगी. निश्चित ही बीजेपी इसका तोड़ ढूंढ रही है. इसलिए यह उम्मीद की जा रही है कि संसद के विशेष अधिवेशन में सरकार रोहिणी आयोग की रिपोर्ट को लोकसभा में रख सकती है.

Advertisement

पीएम ने 5 साल पहले ही दिया था संकेत 

बागपत में 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे देश को समर्पित करने के अवसर पर एक रैली की थी. इस अवसर पर उन्होंने कहा था कि  'सरकार ने पिछड़ी जातियों के सब-कैटेगराइजेशन के लिए कमीशन के गठन का निर्णय भी किया है. सरकार चाहती है कि OBC समुदाय में जो अति पिछड़े हैं, उन्हें सरकार और शिक्षण संस्थाओं में तय सीमा में रहते हुए आरक्षण का और ज्यादा फायदा मिले. उन्होंने कहा कि जो वादा मोदी ने किया है वह उसे पूरा ही करेंगे. असल में मंडल कमीशन की रिपोर्ट को लागू करने के बाद सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 फीसदी का आरक्षण मिल रहा है. पर यह अकसर कहा जाता रहा है कि इस आरक्षण का लाभ कुछ मजबूत जातियां ही उठा रही हैं. आरक्षण का लाभ कमजोर लोगों को भी मिल सके, ये पता लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2017 में रोहिणी कमिशन का गठन कर दिया था. इसी साल जुलाई महीने में आयोग ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को सौंपी है.

Advertisement

बीजेपी के लिए क्यों है जरूरी

यह सभी जानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी को अखिल भारतीय स्तर की पार्टी बनाने के पिछड़े वोटों से ही ताकत मिली है. ब्राह्मणों और बनियों की पार्टी को कल्याण सिंह (उत्तर प्रदेश) और उमा भारती (मध्य प्रदेश) आदि के मुख्यमंत्रित्व काल में पिछड़ों का समर्थन मिलना शुरू हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद को अति पिछड़ा बताकर पार्टी की पहचान पिछड़ों की पार्टी के रूप में बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है. उत्तर प्रदेश में 2014 का लोकसभा और 2017 का विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मिली जबर्दस्त जीत में अति पिछड़े वर्ग के मतदाताओं की बड़ी भूमिका रही है.

बीजेपी गठबंधन को यूपी की 403 में से 325 सीटों पर जीत मिली थी. पर 2022 आते-आते बीजपी की लोकप्रियता में गिरावट आई और सीटों की संख्या 255 (एनडीए 273) तक पहुंच गई. सीटों में गिरावट का बहुत बड़ा कारण ये रहा कि अतिपिछड़ा बहुल आबादी वाले जिलों आजमगढ़-मऊ-गाजीपुर-बलिया आदि से बीजेपी का सफाया होने लगा. दूसरी तरफ बिहार में लालू यादव और नीतीश कुमार के साथ आ जाने से बीजेपी कमजोर हुई है. इस जोड़ी से मुकाबला करना है तो बीजेपी को पिछड़ों के वोट में सेंध लगाने के लिए कुछ अलग करना होगा. बीजेपी को लोक सभा चुनावों में सबसे अधिक सीट यूपी और बिहार से ही मिलने की उम्मीद है. इन दोनों राज्यों में पार्टी का बढ़िया परफार्मेंस बीजेपी की वापसी का कारण बनेगा.  

Advertisement


विपक्ष के ब्रह्मास्त्र का तोड़ होगा रोहिणी कमीशन की सिफारिशों को लागू करना

जातिगत जनगणना के मुद्दे को विपक्ष आगामी लोकसभा चुनावों में ब्रह्मास्त्र के रूप में इस्तेमाल करने वाला है. इस बात की घोषणा भी इंडिया गठबंधन की समन्वय समिति की ओर से हो चुकी है. केंद्र की एनडीए सरकार के पास इसके लिए रोहिणी कमीशन का रिपोर्ट पेश करने का एक ऐसा हथियार है जिससे चुनावों में बीजेपी खुद को अति पिछडों का सबसे बड़ा हितैशी साबित कर सकती है.

मीडिया में सूत्रों के आधार पर अब तक जो जानकारियां सामने आ रही हैं उससे लगता है कि सरकार ओबीसी कोटे को तीन से चार श्रेणी में बांटने की सिफारिश कर सकती है.इस तरह उन जातियों को सबसे अधिक महत्व दिया जा सकता है जिन्हें अब तक आरक्षण का एक बार भी लाभ नहीं मिला है. यानी कि उन जातियों को सबसे अधिक शेयर दिया जा सकता है जो अति पिछड़ी भी हैं और अब तक उनको सबसे कम आरक्षण का लाभ मिला है.

महिला आरक्षण की तरह विपक्ष की मजबूरी होगा EBC का समर्थन

महिला आरक्षण का प्रस्ताव पास कर जिस तरह एनडीए सरकार ने मास्टरस्ट्रोक खेला है जिसका विरोध करना विपक्ष के लिए नामुकिन है, उसी तरह विपक्ष के लिए ओबीसी कोटा में कोटा का विरोध करना भी मुश्किल साबित होगा. क्योंकि विपक्ष शासित कई स्टेट में ओबीसी कोटा के तहत कोटा का प्रावधान किया गया है. कई जगहों पर कोर्ट ने इसे अस्वीकर कर दिया है. 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement