
दिल्ली चुनाव में मतदान जैसे जैसे आगे बढ़ रहा है, आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी अपने अपने मतदाताओं को हर कीमत पर बूथ पहुंचाने पर लगे हुए हैं. पर दूसरी तरफ सुबह से मीडिया में दिल्ली चुनावों के साथ प्रधानमंत्री मोदी का महाकुंभ में संगम स्नान भी चर्चा में है. पीएम नरेंद्र मोदी महाकुंभ में डुबकी लगा चुके हैं. आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को लगता है कि पीएम मोदी ने आज का दिन यानि 5 फरवरी का दिन संगम स्नान के लिए इसलिए चुना है ताकि दिल्ली विधानसभा के लिए होने वाले मतदान में वोटर्स को प्रभावित किया जा सके. भारतीय जनता पार्टी को चुनावों में विजय दिलाने के लिए पीएम मोदी इस तरह की रणनीति पर बहुत भरोसा करते हैं. और करें भी क्यों न इस रणनीति के बल पर ही उन्होंने बीजेपी को कई बार जीत का स्वाद चखाया है. पर केवल कोई भी नेता या राजनीतिक अपनी आध्यात्मिक यात्रा के जरिए वोटर्स को प्रभावित कर सकता यह किसी भी तर्कशील व्यक्ति के गले नहीं उतरेगा.
पीएम पहले भी ऐसा करके पार्टी को विजय दिलाते रहे हैं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी वोटिंग के दिन अपनी आध्यात्मिक यात्रा को अंजाम देते रहे हैं. 2014 में पीएम बनने के बाद मोदी अब तक कई बार वोटिंग के दिन किसी न किसी तीर्थ यात्रा पर रहे हैं. इस दौरान 2 बार लोकसभा और 6 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए. दोनों लोकसभा में बीजेपी ने सत्ता हासिल की. जबकि 6 राज्यों में से 4 राज्यों में बीजेपी ने सरकार बनाई. यानि कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वोटिंग के दिन होने वाली आध्यात्मिक यात्रा अधिकतर बीजेपी के लिए फायदेमंद रही है. वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा कहते हैं कि वोटिंग डे पर तीर्थ यात्रा पर जाना मोदी की पॉलिटिकल स्ट्रेटजी का हिस्सा हो सकता है पर यह कहना कि इससे पार्टी दिल्ली जैसा कठिन जीत लेगी यह सही नहीं है. मोदी के महाकुंभ में जाने से सीधा बीजेपी के वोटर्स पर ही पड़ेगा. जिन्हें आम आदमी पार्टी को या कांग्रेस को वोट देना है वो देंगे ही. 19 मई 2019, लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में 8 राज्यों की 59 सीटों पर वोट डाले जाने थे. इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ मंदिर में भगवा कपड़े पहने ध्यान लगाए हुए थे.
1 जून 2024 को लोकसभा चुनावों के आखिरी चरण की वोटिंग पर मोदी एक आध्यात्मिक यात्रा पर थे. एक तरफ देश वोटिंग कर रहा था दूसरी तरफ कन्याकुमारी के विवेकानंद रॉक मेमोरियल में वो भगवान के दरबार में अर्जी लगा रहे थे. 5 अक्टूबर 2024 को हरियाणा में वोटिंग हो रही थी. इसी दिन प्रधानमंत्री की तस्वीरें महाराष्ट्र के एक मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए नजर आईं थीं. यही नहीं पीएम मोदी की यह स्ट्रैटजी उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात आदि विधानसभा चुनावों के समय भी रही. वो अलग-अलग मंदिरों में उपरोक्त राज्यों के वोटिंग वाले दिनों में उपस्थित रहे.
हालांकि कुछ बार उनकी यह रणनीति काम नहीं आई. जैसे पश्चिम बंगाल में 2021 में हुआ था. 27 मार्च 2021 को पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 30 और असम में 47 सीटों पर वोटिंग होनी थी. इस दिन भी PM मोदी बांग्लादेश की यात्रा पर थे. पीएम ने ढाका में यशोश्वरी मंदिर मां काली की आराधना की. उन्होंने मतुआ समुदाय के मंदिर में भी पूजा अर्चना की. बंगाल में बीजेपी जीत तो नहीं सकी पर इतना जरूर हुआ कि पहली बार बीजेपी को इस राज्य में इतना बहुमत मिला कि वो मुख्य विपक्षी पार्टी बनने में सफल हुई. असम में पार्टी को जीत मिली थी.
मोदी के संगम स्नान का विरोध करने से ज्यादा फायदा
सवाल उठाया जा रहा है कि नरेंद्र मोदी के संगम स्नान करने से बहुत से लोग बीजेपी को वोट देंगे, यह हास्यास्पद ही लगता है. अगर वास्तव में ऐसा होता तो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी पीछे नहीं रहते. आखिर अरविंद केजरीवाल तो खुलकर हिंदू कार्ड खेलते ही हैं. हर मौके पर हनुमान मंदिर जाना, राम मंदिर उद्घाटन के बाद अयोध्या जाना, भारतीय रुपये पर गांधी की जगह माता लक्ष्मी की फोटो लगवाने की डिमांड करना, दिल्ली के लोगों को मुफ्त तीर्थ यात्रा कराना, पुजारियों को वेतन देना आदि ऐसे कार्य हैं जिसे अरविंद केजरीवाल के सॉफ्ट हिंदुत्व के समर्थक के रूप में देखा जाता है.
अगर केवल कुंभ में डुबकी लगाने से पार्टी के कुछ वोट भी बढ़ जाने की उम्मीद होती तो राजनीतिक दल वहां लाइन लगाकर खड़े हो जाते. सबको पता है कि मोदी के कुंभ स्नान की आलोचना करके जितने वोट मिल जाएंगे उतने वोट गंगा स्नान करके नहीं मिलने वाले हैं. राजनीतिक विश्वेषक सौरब दुबे कहते हैं कि मोदी के महाकुंभ जाने से दिल्ली चुनाव में कोई खास इम्पैक्ट नहीं होने वाला है. हां इतना जरूर है कि BJP के कोर वोटर्स की मोदी के प्रति भक्ति भावना और बड़ जाएगी. आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच कुंभ स्नान का विरोध केवल इसलिए हो रहा है कि मुट्ठी भर अल्पसंख्यकों का वोट पाने के लिए होड़ लगी हुई है.
बीजेपी और आप में जो बीजेपी का विरोध जितना करेगा उसके साथ अंतिम समय में मुसलमानों के कुछ वोट जरूर ट्रांसफर हो सकेंगे. पत्रकार विनोद शर्मा कहते हैं कि दरअसल संगम स्नान से कुछ वोट प्रभावित हो सकते हैं पर यह कहना अतिशयोक्ति ही होगा कि इससे चुनाव प्रभावित हो सकते हैं. जनता जिसे वोट देने का मन बना चुकी होगी उसे वोट देगी ही. दूसरे केवल संगम स्नान करके मोदी अपने समर्थकों को खुश कर सकते हैं और अपने विरोधियों को और नाराज कर सकते हैं. इससे अधिक की उम्मीद करना बेमानी ही है.