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हरियाणा में कुमारी सैलजा के सीएम पद की दावेदारी से BJP को कितना फायदा? । Opinion

कुमारी सैलजा 12 सितंबर से हरियाणा में पार्टी के प्रचार से दूर थीं. हालांकि कहा जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उन्हें मना लिया है. 26 सितंबर से सैलजा कांग्रेस का प्रचार करने लगेंगी. पर सैलजा पूरी शिद्दत के साथ सीएम पद की दावेदारी की बात कर रही हैं.

कुमारी शैलजा की नाराजगी दूर पर सीएम पद पर दावेदारी बरकरार कुमारी शैलजा की नाराजगी दूर पर सीएम पद पर दावेदारी बरकरार
संयम श्रीवास्तव
  • नई दिल्ली,
  • 24 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 1:54 PM IST

हरियाणा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और बीजेपी के बीच आमने-सामने की टक्कर चल रही है. जाट और दलित वोटर्स के भरोसे कांग्रेस बढ़त बनाती दिख रही थी पर दलित नेता कुमारी सैलजा की नाराजगी पार्टी पर भारी पड़ती दिख रही है. कुमारी सैलजा 12 सितंबर से हरियाणा में पार्टी के प्रचार से दूर थीं. हालांकि कहा जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उन्हें मना लिया है. 26 सितंबर से सैलजा कांग्रेस का प्रचार करने लगेंगी. रणदीप सुरजेवाला ने भी ट्वीट करके यह जानकारी दी है. पर इस बीच जिस तरह सैलजा खुद को सी
एम पद का दावेदार बताने लगी हैं उससे क्या कांग्रेस को खतरा नहीं हो सकता है? 23 सितंबर को आज तक पंचायत में उन्होंने सीएम पद की दावेदारी से इनकार नहीं किया और फिर इंडियन एक्सप्रेस से भी बातचीत में भी उन्होंने अपने आपको सीएम पद का दावेदार बताया है. मतलब साफ है कि वो सीएम पद के लिए पार्टी नेतृत्व से आश्वस्त हो जाना चाहती हैं.

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1-क्या सैलजा के समर्थन में राहुल गांधी भी हैं

अब जब कांग्रेस अध्यक्ष खरगे से मुलाकात के बाद कुमारी सैलजा ने साफ कर दिया है क‍ि वो 26 सितंबर को नरवाना से प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगी. इस खबर के सामने आने के बाद यह भी खबर आई है क‍ि राहुल गांधी भी हरियाणा चुनाव में प्रचार उतरने का दिन तय कर दिया है. ज‍िस दिन कुमारी सैलजा चुनाव प्रचार के ल‍िए उतरेंगी, उसी दिन यानी 26 सितंबर को राहुल गांधी भी चुनाव प्रचार करने हर‍ियाणा के मैदान में होंगे. कांग्रेस पार्टी को नजदीक से जानने वालों को पता है कि राहुल गांधी पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर हुड्डा के बजाय हमेशा से कुमारी सैलजा को तरजीह देते रहे हैं. बीच में ऐसी भी खबरें आईं थीं कि सैलजा को सीएम पद का उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस गेम कर सकती है.

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इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि सैलजा को उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस उत्तर भारत में बीजेपी से लीड लेते हुए दिख सकती थी. पर हरियाणा कांग्रेस में हुड्डा की मजबूत उपस्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता. कांग्रेस नेतृत्व किसी भी कीमत पर हुड्डा को नाराज कर हरियाणा में सफल होने का सपना नहीं पाल सकती है. शायद यही कारण था कि सैलजा की सीएम पद की उम्मीदवारी मुल्तवी हो गई. पर सैलजा के प्रति जो अपमानित करने वाले शब्द बोले गए और उनके खासमखास दो समर्थकों के टिकट जो जानबूझकर काटे गए उसे वो बर्दाश्त नहीं कर सकीं. आज करीब 12 दिनों से यही कारण है कि वो प्रचार से गायब हैं. हो सकता है कि राहुल गांधी को भी यह सब बुरा लगा हो.

अब कहा जा रहा है कि राहुल गांधी 26 सितंबर से हरियाणा में चुनाव प्रचार की शुरुआत करेंगे. लेकिन सबसे खास बात, उन्‍होंने पहली चुनावी रैली असंध से उम्मीदवार शमशेर सिंह के लिए करना तय किया है. शमशेर सिंह को कुमारी सैलजा का करीबी माना जाता है. 
हुड्डा खेमे के ल‍िए भी राहुल गांधी उसी द‍िन करेंगे प्रचार करेंगे. दोनों गुटों को साधे रखने में कांग्रेस को मदद मिलेगी. हुड्डा और सैलजा खेमे के बीच हर‍ियाणा चुनाव में काफी तगड़ी लड़ाई है और कांग्रेस नहीं चाहती क‍ि इनकी लड़ाई में पार्टी को कोई नुकसान हो जाए.

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2-क्या यह कांग्रेस का पोलिटिकल गेम है

राजनीति दुरभिसंधियों का खेल है. जिस तरह कांग्रेस में पहले कुमारी सैलजा नाराज होती हैं और फिर करीब 2 हफ्ते के बाद मैदान में फिर आने का संकेत देती हैं उससे कई बातें सामने आती हैं. 

 पहली बात यह है कि हरियाणा के पिछले विधानसभा चुनावों  या 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी को जो वोट मिले हैं क्या वो अकेले कुमारी सैलजा की वजह से मिले हैं. इसका उत्तर सीधे नहीं है. उत्तर प्रदेश में कुमारी सैलजा जैसा कोई भी कद्दावर दलित नेता नहीं है फिर भी कांग्रेस को इस समुदाय को वोट मिले हैं.संविधान बचाओ के मुद्दे पर कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों में दलितों का अच्छा खासा वोट शेयर हासिल किया अब विधानसभा चुनावों में भी काफी कुछ स्थिति वैसी ही है. इसलिए ऐसा नहीं कहा जा सकता कि कुमारी सैलजा की नाराजगी की वजह से कांग्रेस के वोट कम हो जाएंगे. और यह भी नहीं कहा जा सकता कि अगर वो कांग्रेस के साथ रहेंगी तो दलितों का वोट नहीं बंटेगा.

हां एक बात और हो सकती है. अगर कांग्रेस प्रचार के दौरान सैलजा खुद को सीएम उम्मीदवार बताती रहीं तो इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि प्रदेश के दलित वोटों में कांग्रेस की हिस्सेदारी थोड़ी और बढ़ जाए.इसलिए ये भी हो सकता है कि कांग्रेस पार्टी की सोची समझी रणनीति के तहत कुमारी सैलजा की पहले नाराजगी फिर उन्हें सीएम पद की दावेदारी की बात करने की छूट देना इसी रणनीति के तहत हो रहा हो.

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3-हुड्डा और सैलजा की लड़ाई में बीजेपी को कितना फायदा होने की उम्मीद

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अशोक तंवर और कुमारी सैलजा का उदाहरण देते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए उसे दलित विरोधी पार्टी करार दिया.वे हरियाणा के टोहाना और यमुनानगर में दो रैलियों को संबोधित कर रहे थे.शाह कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा दलित नेताओं का अपमान किया है, चाहे वह अशोक तंवर हों या बहन कुमारी सैलजा.टोहाना में शाह ने कहा, कांग्रेस पार्टी एक दलित विरोधी पार्टी है। मैं हुड्डा जी और राहुल बाबा को 2005 के गोहाना कांड की याद दिलाना चाहता हूं. इसके लिए कौन जिम्मेदार था? यह कांग्रेस थी.

गृह मंत्री ने 2010 के मिर्चपुर कांड का भी जिक्र किया, जिसमें कई दलित परिवारों को पलायन करने के लिए मजबूर किया गया था, जब ऊंची जाति के लोगों ने उनके घरों को आग लगा दी थी. इस घटना में एक किशोरी और उसके पिता की जलकर मौत हो गई थी. गोहाना में भी एक दलित पर ऊंची जाति के व्यक्ति की हत्या में शामिल होने का संदेह होने पर दलितों के कुछ घरों को आग लगा दी गई थी.
जाहिर है कि बीजेपी सैलजा की नाराजगी को कैश करना चाहती है. अमित शाह ही नहीं प्रदेश के पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर भी सैलजा को बीजेपी में आने की दावत दे रहे हैं. पर सैलजा शायद पार्टी का साथ नहीं छोड़ना चाहती हैं.

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हरियाणा के वरिष्ठ पत्रकार आदेश रावल एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहते हैं कि बीजेपी ने दलित वोटों के लिए ही इनेलो और बीएसपी का गठबंधन करवाई है और दूसरी ओर जेजेपी और चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी के बीच गठबंधन हुआ है.पर इन गठबंधनों का कांग्रेस के ऊपर कोई असर नहीं होने वाला है.हालांकि रावल यह जरूर स्वीकार करते हैं कि पिछले 10 दिनों में कांग्रेस पार्टी की लोकप्रियता में जरूर गिरावट हुई है.  
 

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