
वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक बुधवार को लोकसभा में पेश कर दिया गया. खबर लिखे जाने तक लोकसभा में विधेयक के पक्ष और विपक्ष में लगातार बहस जारी है. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि यह विधेयक मोदी सरकार के लिए वॉटरलू का युद्ध साबित होगा. जहां सिकंदर हार गया था. यानि कि वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक मोदी सरकार के पतन का कारण बनेगा. अखिलेश यादव की यह भविष्यवाणी कितनी सही साबित होगी, यह तो समय बताएगा पर देश के कई हिस्सों में जिस तरह मुसलमानों के पटाखे छोड़ने और मिठाई बांटने की खबर आ रही है वो समाजवादी पार्टी के लिए चिंता की बात जरूर हो सकती है. विधेयक का समर्थन करते हुए कई सांसदों ने कहा कि वक्फ बोर्ड के संशोधन की बात इतिहास में हमेशा के लिए याद रखी जाएगी. आइये देखते हैं कि वक्फ बोर्ड विधेयक बीजेपी के लिए मुश्किलें लाती है या मोदी सरकार के लिए गेमचेंजर साबित होने जा रही है.
1-बिल के पक्ष में बहुमत जुटाकर साबित कर दिया कि सरकार 2.0 जैसी ही मजबूत
मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के सबसे अहम बिल पर लगभग जीत हासिल करने की ओर बढ़ रही है. अगर सरकार ने खुद किसी रणनीति के तहत बिल को लंबित नहीं किया तो अब कोई भी ताकत बिल पास करने से नहीं रोक सकती है. अब तक नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू, देवगौड़ा, चिराग पासवान, मांझी, जयंत चौधरी की पार्टी ने बिल के समर्थन की हरी झंडी दे दी है. कर्नाटक में सहयोगी दल जेडीएस के दोनों सांसदों ने वक्फ संशोधन बिल के समर्थन के लिए तैयार हैं.
लोकसभा चुनावों में बहुमत पाने में असफल रहने वाली बीजेपी संसद में वक्फ संशोधन बिल पर बहुमत से अधिक सांसद उसके पास हैं. मोदी सरकार इस समय 14 सहयोगी दलों के 53 सांसदों के समर्थन पर टिकी है, पर वक्फ बिल पर सभी उसके साथ हैं.
जाहिर है कि इस बिल के पास होने के बाद सरकार और मजबूत होकर उभरेगी. आम जनता के बीच एक कमजोर सरकार की छवि को लेकर शासन करना बहुत मुश्किल होता है. इस जीत के बाद सरकार कई और महत्वपूर्ण फैसले ले सकेगी.
2-अनुच्छेद 370 की तरह मोदी सरकार के लिए उपलब्धि की तरह याद किया जाएगा
2019 में दूसरी बार सरकार बनाने के बाद मोदी सरकार ने अपने पहले ही साल में एक निर्णायक फैसला लिया. अनुच्छेद 370 को समाप्त करना एक इतना बड़ा फैसला था जिसके बारे में आम लोग सोच भी नहीं सकते थे. राम मंदिर बनने के बारे में तो एक बार ख्याल कर भी लेते थे पर 370 को सरकार हटा लेगी यह सोच से ही परे था. पर मोदी सरकार ने यह कर दिखाया. वैसे ही वक्फ बोर्ड बिल का संशोधन करना है. बीजेपी के जो सबसे बड़े नारे थे उसमें वक्फ बिल संशोधन का कहीं जिक्र नहीं था. समान सिविल संहिता, राम मंदिर, 370 को खत्म करना ही सबसे बड़ा टार्गेट होता था. पर जिन लोगों ने वक्फ बोर्ड अधिनियम के बारे में ठीक से जानते हैं उन्हें पता है कि इसमें संशोधन करना कितन जरूरी था. शायद वक्फ बोर्ड बिल को संशोधिक करना अनुच्छेद 370 को खत्म करने, राम मंदिर बनाने से भी अधिक जरूरी था. मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में ही यह उपलब्धि हासिल करके 2019 को दुहराना चाहती है.
3-वक्फ बिल का जितना विरोध होगा, आम लोगों की नजरों से विपक्ष उतर जाएगा
कल्पना करिए आपकी जमीन और घर के बारे में अगर नोटिस आ जाए कि ये वक्फ की है तो आप क्या करेंगे. आप कहेंगे कि मैं कोर्ट जाऊंगा. पर आप गलतफहमी में हैं. जिस जमीन या मकान पर वक्फ बोर्ड दावा करता है उस मामले में आपको कोर्ट जाने का अधिकार ही नहीं है. आप वक्फ बोर्ड के ट्रिब्यूनल में ही सिर्फ जा सकते हैं.
पिछले कुछ वर्षो में वक्फ बोर्ड ने सैकड़ों मंदिर और चर्च की जमीन को वक्फ घोषित कर दिया है. संसद की जमीन को भी वक्फ बोर्ड का नोटिस मिल चुका है. वक्फ बोर्ड को अधिकार है कि किसी भी जमीन को वह अपनी जमीन घोषित कर सकता है. इससे भी खतरनाक यह है कि मुस्लिम समुदाय किसी भी जमीन को खरीद कर वक्फ को दे सकता है. इसके बाद उस जमीन को कोई न खरीद सकता है न बेच सकता है. इस तरह वक्फ बोर्ड की जमीन का क्षेत्रफल एक दिन सेना और रेलवे की जमीन को भी क्रॉस कर सकता है. ये एक षडयंत्र भी हो सकता है. गुजरात के सूरत में शिवशक्ति सोसायटी का उदाहरण तो कई लोगों के लिए चेतावनी भरा हो सकता है. वहां सोसायटी के एक प्लाट को उसके खरीदार ने वक्फ कर दिया. कुछ दिन बाद उस प्लाट पर लोग नमाज पढ़ने आने लगे. जिसके बाद विवाद की स्थिति बनने लगी. और इससे यह डर पैदा हो गया कि यदि किसी मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में कोई एक अपार्टमेंट यदि कोई वक्फ कर दे तो उसे मस्जिद में बदला जा सकता है. इसमें बाकी अपार्टमेंट वालों की मंशा कोई मायने नहीं रखती है. और ऐसी स्थिति में कोर्ट की शरण भी नहीं जा सकते.
जाहिर है कि इन बातों को बीजेपी आम लोगों को बताएगी ही. अभी तो मुस्लिम लोगों को ही वक्फ बोर्ड के बारे में नहीं पता है. पर बीजेपी इसे हर हिंदू के घर तक लेकर जाएगी. जाहिर है कि ऐसी स्थिति में लोगों का भरोसा विपक्ष के नेताओं से उठ जाएगा. बीजपी इसके लिए अपनी आक्रामक प्रचार रणनीति का प्रयोग करेगी. बिहार-बंगाल और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जीतने के लिए यह रणनीति काम आएगी.
4- राम मंदिर की तरह विपक्ष के बहुत से लोग चाहते हैं वक्फ बिल में संशोधन हो, लालू यादव भी
देश में राम मंदिर के निर्माण की बात हो या कश्मीर से 370 को खत्म करने की, बीजेपी ही नहीं दूसरे दल को लोगों में भी इसे लेकर पॉजिटिव विचार रहे हैं. भले ही पार्टी की रणनीति के चलते वो कुछ नहीं बोलते हों. हालांकि 370 के मसले पर तो कई विरोधी दलों ने भी मोदी सरकार का सपोर्ट किया था. कांग्रेस सहित दूसरे दलों में तमाम ऐसे लोग थे जो चाहते थे कि राम मंदिर बनें.
ठीक उसी तरह सभी दलों में ऐसे लोग हैं जो दिल से चाहते हैं कि वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पास होकर कानून बने.आज आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें वे खुद वक्फ को लेकर कड़ा कानून बनाने की मांग कर रहे हैं. इस वीडियो को अब बीजेपी और तमाम सहयोगी दल शेयर कर रहे हैं.बताया जा रहा है कि यह विडियो 2010 का है. संसद में लालू यादव यह कह रहे हैं, देखिए कानून बनाना चाहिए बहुत कड़ा. सारी जमीनें हड़प ली गई हैं. ऐसा नहीं है कि कोई खेती-बाड़ी वाली जमीन है. पटना के डाकबंगला पर जितनी प्रॉपर्टी थी सब पर अपार्टमेंट बन गया. आगे से लाइए… पास हम लोग कर देते हैं संशोधन आपका.
बिहार सरकार के मंत्री नितिन नवीन ने भी इस वीडियो को एक्स पर पोस्ट किया है. उन्होंने लिखा कि 2010 में लालू जी ने संसद में स्वयं वक्फ को लेकर कठोर कानून बनाने की बात की थी और माना था कि वक्फ बोर्ड के नाम पर जमीन कब्जे की बड़ी लूट चल रही है. संसद में लल्लन सिंह और अनुराग ठाकुर ने भी लालू यादव के इस विडियो का जिक्र किया.
5-अगर मुस्लिमों का कल्याण हो गया तो नरेंद्र मोदी का नाम इतिहास में दर्ज हो जाएगा
वक्फ बोर्ड के पास इस समय रेलवे और सेना के बाद सबसे अधिक जमीन है. इतनी जमीन होने के बाद भी पूरे साल में वक्फ बोर्ड इस संपत्ति से केवल 166 करोड़ की कमाई करता है. कारण है कि वक्फ बोर्ड पर कुछ खास लोगों का कब्जा है और बोर्ड में भ्रष्टाचार की गंगा बह रही है. कल्पना करिए कि आपके पास साढ़े नौ लाख एकड़ जमीन हो तो आप उस जमीन से कितनी कमाई करेंगे. वक्फ की जमीन का उपयोग गरीब मुसलमानों के लिए करने का प्रावधान है. पर आज मुसलमानों में जितनी गरीबी है उतनी किसी और धर्म के लोगों में नहीं है. जाहिर है कि वक्फ बोर्ड अधिनियम में सुधार होने के बाद अगर 20 प्रतिशत गरीब मुसलमानों के जीवन में भी कुछ सुधार होता है तो देश की तकदीर बदल सकती है. देश को 2045 तक विकसित राष्ट्र बनाने का सपना साकार हो सकेगा.